अध्याय-4: अम्ल क्षारक और लवण
अम्ल
अम्ल स्वाद में खट्टा होता है। पदार्थों का स्वाद खट्टा इसलिए होता है, क्योंकि इनमें अम्ल (एसिड) होते है। एसिड शब्द की उत्पत्ति “लैटिन शब्द एसियर” से है जिसका अर्थ है खट्टा । अम्लों को जल में घोलने पर हाइड्रोजन आयन प्राप्त होता है। अम्ल नीले लिटमस पत्र को लाल कर देते है । इनको चखने पर खट्टे लगते है । इनका PH मान 7 से कम होता है। दही, नींबू का रस, संतरे का रस, सिरके का स्वाद खट्टा होता है।
अम्ल वर्षा
जब वर्षा जल में अम्ल की मात्रा अत्याधिक होती है, तो वह अम्ल वर्षा कहलाती है। वर्षा जल, अम्लीय इसलिए हो जाता है, क्योंकि कार्बनडाइऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन डाइऑक्साइड जैसी गैसें, जो वायु में प्रदूषकों के रूप में निर्मुक्त होती है शुद्ध वर्षा जल में घुलकर क्रमशः कार्बोनिक अम्ल, सल्फ्ऱयूरिक अम्ल और नाइट्रिक अम्ल बनाती हैं।
अम्ल वर्षा, भवनों, ऐतिहासिक इमारतों, पौधें और जंतुओं को क्षति पहुँचा सकती है।
अम्लों के प्रकार
अम्लों को चार भागों में बांटा गया हैं। जो कि निम्नलिखित हैं।
हाइड्रो अम्ल – ऐसे अम्ल जिनमे ऑक्सीजन नहीं होती है। किंतु इसके अतिरिक्त हाइड्रोजन के साथ अन्य अधात्विक तत्व होते हैं। हाइड्रो अम्ल कहलाते हैं।
जैसे – हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCL), हाइड्रोफलुओरिक अम्ल (HF), हाइड्रोब्रोमिक अम्ल (HBr) आदि।
आक्सी अम्ल – ऐसे अम्ल जिनमे हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के साथ साथ अन्य दूसरे तत्व भी उपस्थित होते है, आक्सी अम्ल कहलाते है।
जैसे – सल्फ्यूरिक अम्ल, फास्फोरस क्लोरस अम्ल, नाइट्रिक अम्ल ।
प्रबल अम्ल – वे अम्ल जो जलीय विलयन में पूर्ण रूप में आयनित होते है। प्रबल अम्ल कहलाते है ।
जैसे – HCL
दुर्बल अम्ल – वे अम्ल जो जलीय विलयन में आंशिक रूप से आयनित होते है। दुर्बल अम्ल कहलाते है।
जैसे – एसिटिक अम्ल, फार्मिक अम्ल, कार्बोनिक अम्ल आदि।
क्षार
क्षार स्वाद में कड़वा होता है। ऐसे पदार्थ, जिनका स्वाद कड़वा होता है और जो स्पर्श करने पर साबुन जैसे लगते हैं, क्षारक कहलाते हैं। जो चीजें स्वाद में कड़वी होती हैं वे क्षारक (Alkali) कहलाती हैं । कभी – कभी किसी चीज के स्वाद से उसको अम्लीयता या क्षारीयता का पता नहीं चलता है, इसलिए किसी चीज के अम्लीयता या क्षारीयता का पता लगाने के लिए उनका परीक्षण (testing) किया जाता है । जिन पदार्थों का 7.1 से 14 तक का ph मान होता है, वे क्षार होते हैं ।
क्षार को छूने पर साबुन की तरह महसूस होते है तथा क्षार की प्रकति संक्षारक होती है इन्हे कभी भी स्पर्श नही करना चाहिए और नाही कभी चखना चाहिए क्योकि ये हमे नुकसान पहुचा सकते है क्षार कहलाते है|
क्षारों के गुण
- बहुत से क्षार जल में विलेय हैं। जैसे- सोडियम हाइडॉक्साइड, अमोनिया आदि) किन्तु कुछ विलेय नहीं हैं जैसे- एल्युमिनियम हाइडॉक्साइड।
- सांद्र क्षार जैविक चींजों के लिये दाहक (flammable) होते हैं तथा अम्लीय पदार्थों के साथ तेजी से क्रिया करते हैं।
- तेलों एवं वसाओं से वे साबुन एवं ग्लीसरीन बनाने के काम आते हैं।
- क्षार, लिटमस पत्र को नीला कर देते हैं तथा फेनॉफ्थलीन को गुलाबी बना देते हैं।
- क्षारों में जल मिलाने से इनकी सांद्रता (Concentration) कम होता है और तनुता बढ़ती है, तनुता बढ़ने के साथ-साथ क्षारों का प्रभाव भी कम होता है।
- कुछ क्षार प्रबल (Strong) होते हैं और कुछ क्षार कमजोर (Weak)।
- क्षारों के जलीय बिलयन तथा पिघले हुए क्षार विद्युत के सुचालक होते हैं एवं इन रूपों में ये आयनों में बिलगित हो जाते हैं।
क्षार के उपयोग:-
- कैल्सियम हाइड्राक्साइड – इसका उपयोग विरंजक पाउडर के निर्माण में कंकरीट व प्लास्टर मे चुना पोतने में जल के मृदुकरण में, व अम्लीय मृदा को उपचारित करने में किया जाता है।
इसकी सहायता से चमड़े की बाहरी सतह पर स्थित बालों को भी हटाया जाता है।
- मैग्निशियम हाइड्राक्साइड – इसका उपयोग प्रति अम्ल के रूप में व चीनी उद्योग में किया जाता है।
- सोडियम हाइड्राक्साइड – इसे हम कास्टिक सोडा के नाम से भी जानते हैं।इसका उपयोग धातुओं से ग्रीस हटाने में, कागज बनाने में ,कठोर साबुन और अपमार्जक के निर्माण में हुआ टेक्सटाइल उद्योग में किया जाता है।
इसके अलावा इसका उपयोग पेट्रोलियम के शोधन में तथा घरों की सफाई में किया जाता है।
- पोटेशियम हाइड्राक्साइड – इसका उपयोग प्रयोगशाला अभिकर्मक के रूप में, मृदु साबुन, शैंपू का शेविंग क्रीम के निर्माण में किया जाता है।
- कैल्शियम ऑक्साइड – इसका उपयोग शुष्क कारक के रूप में विरंजक चूर्ण के निर्माण में गाड़ी में एक अवयव के रूप में किया जाता है।
- मैग्नीशियम ऑक्साइड – इसका उपयोग भट्टी में अग्निसह ईट के निर्माण में रबड़ पूरक के रूप में वालों के प्रयोग में किया जाता है।
सूचक
कोई पदार्थ अम्लीय अथवा क्षरकीय है इसका परीक्षण करने के लिए विशेष प्रकार के पदार्थों का उपयोग किया जाता है। सूचक पदार्थ वे पदार्थ होते हैं, जिनका उपयोग पदार्थ की अम्लीय या क्षारीय प्रकृति की पहचान करने में किया जाता है।
सूचक पदार्थों को अम्लीय या क्षारीय पदार्थों के विलयन में मिला देने पर इनका रंग बदल जाता है। नीला लिटमस पेपर और लाल लिटमस पेपर तथा गुड़हल की पंखुड़ियां एक प्राकृतिक सूचक हैं। जब नीले लिटमस पेपर को अम्लीय विलयन में डुबोते हैं, विलयन लाल हो जाता है और लाल लिटमस पेपर को क्षारीय विलयन में डुबोते हैं, पर वह नीला हो जाता है।
इसी तरह गुड़हल की पंखुड़ियों को अम्लीय विलयन में मिलाने पर विलयन का रंग गहरा गुलाबी हो जाता है। इन्हीं गुड़हल की पंखुड़ियों को क्षारीय विलयन में मिलाने पर विलयन का रंग हरा हो जाता है
लिटमस पेपर
सूचक के प्रकार –
- प्राकृतिक सूचक।
- कृत्रिम सूचक।
- गन्धिय सूचक।
प्राकृतिक सूचक
ये पौधे में पाए जाते है – जैसे – लिटमस, लाल पत्ता गोभी, हायड्रेजिया पौधे के फूल, हल्दी आदि।
प्राकृतिक सूचक
कृत्रिम सूचक
ये रासायनिक पदार्थ होते है जैसे – मिथाइल ऑरेंज, मिथाइल रेड, फिनाफ्थलीन आदि।
कृत्रिम सूचक
गंधीय सूचक
ऐसे पदार्थ जो अम्ल या क्षार के उपस्थित होने पर अपने गंध में परिवर्तन करते हैं ऐसे पदार्थ को हम गंधीय सूचक कहते है। गंधीय सूचक खासकर से नेत्रहीन विद्यार्थियों के लिए बहुत उपयोगी होता है, क्योंकि छात्र उन पदार्थों की गंध के द्वारा उनके आसानी से पता चल जाता है। जैसे प्याज, वेनिला इसेस और लौंग आदि। इन सभी वस्तुओं का मनुष्य अगर अंधा भी हो तो उससे उनकी गंध से आसानी से पता चल जाता है, कि वह कौन सा पदार्थ है। इन पदार्थों की गंध अम्लीय या क्षारीय माध्यम में बदल जाती हैं । जैसे – प्याज, लौंग का तेल आदि।
गंधीय सूचक
लिटमस :- सामान्य रूप से उपयोग किया जाने वाला प्राकृतिक सूचक लिटमस है। इसे
लाइकेन से निष्कर्षित किया जाता है।
लाइकेन में अम्लीय विलयन मिलाया जाता है, तो यह लाल हो जाता है। लाइकेन में क्षारीय विलयन मिलाया जाता है, तो यह नीला हो जाता है। यह लाल और नीले लिटमस पत्र के रूप उपलब्ध होता है।
उदासीन विलयन :- ऐसे विलयन, जो लाल अथवा नीले लिटमस पत्र के रंग को परिवर्तित नही करते, उदासीन विलयन कहलाते हैं।
ऐसे पदार्थ न तो अम्लीय होते हैं और न ही क्षारकीय।
उदासीनीकरण :- किसी अम्ल और किसी क्षारक के बीच होने वाली अभिक्रिया उदासीनीकरण कहलाती है। इस प्रक्रम में ऊष्मा के निर्मुक्त होने के साथ-साथ लवण और जल निर्मित होते हैं।
अम्ल + क्षारक –> लवण + जल
उदाहरण :- हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCI ) + सोडियम हाईड्रॉक्साइड (NaOH ) –> सोडियम क्लोराइड (NaC1) + जल (H2O) ) + (उष्मा)
अपाचन :- हमारे आमाशय में हाइड्रोक्लोरिक अम्ल पाया जाता है। भोजन के पाचन में हमारी सहायता करता है,
लेकिन आमाशय में अम्ल की आवश्यकता से अधिक मात्रा होने से अपाचन होता है।
चींटी का डंक :- जब चींटी काटती है तो यह त्वचा में अम्ल डाल देती है। ढंक के प्रभाव को नमीयुक्त खाने का सोडा (सोडियम हैड्रोजनककार्बोनेट) अथवा कैलेमाइन विलयन मलकर उदासीन किया जाता है, जिसमें जिंक कार्बोनेट होता है। चिंटी का जो डंक होता है उसमें कौन सा अम्ल होता है ।
जिसके कारण हमें जलन होती है और वह जगह लाल हो जाती है। चींटी के डंक में फॉर्मिक अम्ल (formic acid) होता है जिस के कारण जब चींटी काटती है तब जलन होती है और वह हिस्सा लाल हो जाता है।
मृदा उपचार :- यदि मृदा अत्यधिक अम्लीय अथवा अत्यधिक क्षारकीय हो , तो पादपों (पौधों) की वृद्धि अच्छी नही होती । मृदा अत्यधिक अम्लीय होने पर,
उसे बिना बुझा हुआ चुना (कैल्शियम हाईड्रॉक्साइड) जैसे क्षारकों से उपचारित किया जाता है
यदि मृदा क्षारकीय हो, तो इसमें जैव पदार्थ मिलाए जाते हैं। जैव पदार्थ (कम्पोस्ट खाद) मृदा में अम्ल निमूर्क्त करते हैं।
कारखानों का अपशिष्ट :- कारखानों के अपशिष्ट को जलाशयों व नदियों में विसर्जित करने से पहले क्षारकीय पदार्थ मिलाकर उदासीन किया जाता हैं। कारखानों के अपशिष्ट आमतौर पर अम्लीय प्रकृति के होते हैं। उन्हें उदासीन करना बहुत आवश्यक है कि नहीं तो वे जलीय जीवन को नुकसान पहुंचाते हैं। इसलिए क्षारकीय पदार्थों से इन्हें उदासीन किया जाता है।
लवण
धातु , अम्लों से हाइड्रोजन परमाणुओं का हाइड्रोजन गैस के रूप में विस्थापन करती है और एक यौगिक बनाता है जिसे लवण कहते हैं।
लवण के गुण:-
- लवण ठोस अवस्था में मिलते हैं।
- सामान्यतः लवण उदासीन होते हैं।
- लवणों के जलीय विलयन विद्युत के सुचालक होते हैं।
लवण के प्रकार:-
(i) अम्लीय लवण: अम्लीय लवण प्रबल अम्ल एवं दुर्बल क्षारक के आपसी अभिक्रिया के फलस्वरूप प्राप्त होता है |
अम्लीय लवण (Acidic Salt): NH4Cl
HCl + NH4OH → NH4Cl + H2O
प्रबल अम्ल दुर्बल क्षारक अम्लीय लवण
(ii) उदासीन लवण: उदासीन लवण प्रबल अम्ल एवं दुर्बल क्षारक के आपसी अभिक्रिया से प्राप्त होता है |
उदासीन लवण (Neutral Salt): NaCl
HCl + NaOH → NaCl + H2O
प्रबल अम्ल प्रबल क्षारक उदासीन लवण
(iii) क्षारकीय लवण: क्षारकीय लवण प्रबल क्षारक एवं दुर्बल अम्ल की आपसी अभिक्रिया से प्राप्त होता है|
क्षारकीय लवण (Basic Salt): NaC2H3O2
HC2H3O2 + NaOH → NaC2H3O2 + H2O
दुर्बल अम्ल प्रबल क्षारक क्षारकीय लवण
पॉप टैस्ट:-
हाइड्रोजन गैस से निहित परखनली के पास जब एक जलती हुई मोमबत्ती लाई जाती है, तो पॉप की ध्वनि उत्पन्न होती है। इस टैस्ट को हाइड्रोजन की उपस्थिति दर्शाने के लिए प्रयोग करते हैं।
NCERT SOLUTIONS
प्रश्न (पृष्ठ संख्या 58-59)
प्रश्न 1 अम्लों और क्षारकों के बीच अंतर बताइए।
उत्तर- अम्ल और क्षारकों के बीच अंतर
अम्ल :
→ अम्ल स्वाद में खट्टे होते हैं।
→ अम्ल नीले लिटमस को लाल कर देते हैं।
→ अम्ल लाल लिटमस को नहीं बदलते।
→ गुड़हल के पुष्प का सूचक अम्लीय विलयनों को गहरा गुलाबी (मेजेन्टा) कर देता है।
→ अम्ल हल्दी का रंग नहीं बदलते।
क्षारक :
→ क्षारकों का स्वाद कड़वा होता है।
→ क्षारक नीले लिटमस को नहीं बदलते।
→ क्षारक लाल लिटमस को नीला कर देते हैं।
→ गुड़हल के पुष्प का सूचक क्षारकीय विलयनों को हरा कर देता है।
→ क्षारक हल्दी को लाल कर देते हैं।
प्रश्न 2 अनेक घरेलू उत्पादों, जैसे खिड़की साफ करने के मार्जकों आदि में अमोनिया पाया जाता है। ये लाल लिटमस को नीला कर देते हैं। इनकी प्रकृति क्या है?
उत्तर- क्षारक लाल लिटमस को नीले रंग में बदल देती हैं, इसलिए अमोनिया की प्रकृति क्षारकीय है।
प्रश्न 3 उस स्रोत का नाम बताइए, जिससे लिटमस विलयन को प्राप्त किया जाता है। इस विलयन का क्या उपयोग है?
उत्तर- लिटमस को लाइकेन से निकाला जाता है। आसुत जल में इसका माउव (बैंगनी) रंग होता है। जब एक अम्लीय विलयन में मिलाया जाता है, यह लाल हो जाता है और जब एक मूल विलयन में मिलाया जाता है, तो यह नीला हो जाता है।
तो, इसका उपयोग विलयनों के अम्लीय या मूल प्रकृति का परीक्षण करने के लिए किया जाता है।
प्रश्न 4 क्या आसुत जल अम्लीय/क्षारकीय/उदासीन होता है? आप इसकी पुष्टि कैसे करेंगे।
उत्तर- आसुत जल प्रकृतिक रूप से उदासीन होता है। हम लिटमस टेस्ट द्वारा इसे सत्यापित कर सकते हैं। आसुत जल लाल या नीले लिटमस का रंग नहीं बदलता है।
प्रश्न 5 उदासीनीकरण के प्रक्रम को एक उदाहरण देते हुए समझाइए।
उत्तर- जब एक अम्लीय विलयन और एक क्षारीय विलयन उपयुक्त मात्रा में मिलाया जाता है, तो दोनों एक दुसरे के प्रभाव को नष्ट कर देते है। परिणामी विलयन न तो अम्लीय होता है और न ही क्षारकीय होता है, यह उदासीन हो जाता है। इस प्रक्रिया को उदासीनीकरण अभिक्रिया के रूप में जाना जाता है।
तनु हाइड्रोक्लोरिक एसिड से टेस्ट ट्यूब का एक चौथाई भरें और लिटमस की कुछ बूंद डालें उपाय। अब घोल का रंग लाल हो जाता है। अब इस अम्लीय घोल में मिलाएं सोडियम हाइड्रॉक्साइड घोल की बूंदें धीरे-धीरे एक-एक करके ड्रॉपर के साथ मिलती हैं। ट्यूब हिलाओ धीरे। तब तक हिलाते हुए सोडियम हाइड्रॉक्साइड घोल की बूंद को जोड़ते रहें रंग बस हरा हो जाता है। अब हाइड्रोक्लोरिक एसिड के प्रभाव को बेअसर कर दिया गया है बेस सोडियम हाइड्रोक्साइड।
प्रश्न 6. निम्नलिखित कथन यदि सही हैं, तो (T) अथवा गलत हैं, तो (F) लिखिए।
- नाइट्रिक अम्ल लाल लिटमस को नीला कर देता है।
- सोडियम हाइड्रॉक्साइड नीले लिटमस को लाल कर देता है।
- सोडियम हाइड्रॉक्साइड और हाइड्रोक्लोरिक अम्ल एक-दूसरे को उदासीन करके लवण और जल बनाते हैं।
- सूचक वह पदार्थ है, जो अम्लीय और क्षारकीय विलयनों में भिन्न रंग दिखाता है।
- दंत क्षय, क्षार की उपस्थिति के कारण होता है।
उत्तर-
- F
- F
- T
- T
- F
प्रश्न 7 दोरजी के रैस्टोरेन्ट में शीतल (मृदु) पेय की कुछ बोतलें हैं। लेकिन दुर्भाग्य से वे चिन्चिहित नहीं हैं। उसे ग्राहकों की माँग के अनुसार पेय परोसने हैं। एक ग्राहक अम्लीय पेय चाहता है, दूसरा क्षारकीय और तीसरा उदासीन पेय चाहता है। दोरजी यह कैसे तय करेगा, कि कौन-सी बोतल किस ग्राहक को देनी है।
उत्तर- दोरजी इन पेय पर लिटमस टेस्ट का उपयोग कर सकते हैं। बस लिटमस पेपर पर पेय की कुछ बूंदें डालें और निम्नलिखित के अनुसार निर्णय लें
- यदि यह नीला हो जाता है, तो पेय बुनियादी है।
- यदि यह लाल हो जाता है, तो पेय अम्लीय है।
- यदि यह हरा हो जाता है, तो पेय उदासीन है।
प्रश्न 8 समझाइए, ऐसा क्यों होता है
- जब आप अतिअम्लता से पीडि़त होते हैं, तो प्रतिअम्ल की गोली लेते हैं।
- जब चींटी काटती है, तो त्वचा पर कैलेमाइन का विलयन लगाया जाता है।
- कारखाने के अपशिष्ट को जलाशयों में बहाने से पहले उसे उदासीन किया जाता है।
उत्तर-
- हाइड्रोक्लोरिक अम्ल की अधिकता के कारण, हम अम्लता से पीड़ित होते हैं। अतिअम्लता की स्थिति में अमाशय में अम्ल की अधिकता हो जाती है जिससे जलन होता है | प्रतिअम्ल की गोली में मिल्क ऑफ़ मैग्नेशिया (मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड) होता है। जो एक क्षार है और ये अम्ल के प्रभाव को बेअसर कर देता है जिससे अतिअम्लता समाप्त हो जाती है |
- चींटी के डंक में फॉर्मिक एसिड होता है जो त्वचा पर जलन पैदा करता है। कैलेमाइन सोल्युशन में जिंक कार्बोनेट होता है, जो एक क्षार है। कैलेमाइन सोल्युशन त्वचा पर लगाने पर चींटी के काटने का प्रभाव को बेअसर कर देता है |
- कई कारखानों के कचरे में एसिड होता है। अगर उन्हें पानी में बहने दिया जाए
शरीर, एसिड जलीय जीवों को मार देंगे। इसलिए, कारखाने के अपशिष्ट पदार्थों को जलाशयों में बहाने से पहले उसे उदासीन किया जाता है |
प्रश्न 9 आपको तीन द्रव दिए गए हैं, जिनमें से एक हाइड्रोक्लोरिक अम्ल है, दूसरा सोडियम हाइड्रॉक्साइड और तीसरा शक्कर का विलयन है। आप हल्दी को सूचक के रूप में उपयोग करके उनकी पहचान कैसे करेंगे?
उत्तर-
- हल्दी का रंग पीला होता है। जब इसे क्षार में डाला जाता है, तो विलयन गुलाबी रंग में बदल जाता है। अर्थात वह विलयन सोडियम हाइड्रोक्साइड का है जो की एक क्षार है|
- यदि विलयन में हल्दी डालने से गर्म हो जाये और उसका रंग में कोई परिवर्तन न हो तो वह विलयन अम्लीय है अर्थात अवह हाइड्रोक्लोरिक अम्ल है |
- यदि विलयन में हल्दी डालने से न तो गर्म होता है और न कोई रंग में परिवर्तन होता है तो वह उदासीन विलयन है |
प्रश्न 10 नीले लिटमस पत्र को एक विलयन में डुबोया गया। यह नीला ही रहता है विलयन की प्रकृति क्या है? समझाइए।
उत्तर- यदि एक विलयन में डूबा हुआ नीला लिटमस पेपर नीला रहता है, तो इसका मतलब है कि विलयन या तो क्षार या उदासीन है।
प्रश्न 11 निम्नलिखित वक्तव्यों को ध्यान से पढ़ेंः
- अम्ल और क्षारक दोनों सभी सूचकों के रंगों को परिवर्तित कर देते हैं।
- यदि कोई सूचक अम्ल के साथ रंग परिवर्तित कर देता है, तो वह क्षारक के साथ रंग परिवर्तन नहीं करता।
- यदि कोई सूचक क्षारक के साथ रंग परिवर्तित करता है, तो वह अम्ल के साथ रंग परिवर्तन नहीं करता।
- अम्ल और क्षारक में रंग परिवर्तन सूचक के प्रकार पर निर्भर करता है।
ऊपर लिखे वक्तव्यों में से कौन-से वक्तव्य सही हैं?
- सभी चार
- (a) और (b)
- (b) और (c)
- सिर्फ (d)
उत्तर-
(iv) सिर्फ (d)
