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Class 7 हिन्दी – अध्याय-1: हम पंछी उन्मुक्त गगन के

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-शिवमंगल सिंह सुमन

काव्यांश

हम पंछी उन्‍मुक्‍त गगन के

पिंजरबद्ध न गा पाएँगे,

कनक-तीलियों से टकराकर

पुलकित पंख टूट जाएँगे।

भावार्थ- कविता की इन पंक्तियों में पंछियों की स्वतंत्र होने की चाह को दर्शाया है। इन पंक्तियों में पक्षी मनुष्यों से कहते हैं कि हम खुले आकाश में उड़ने वाले प्राणी हैं, हम पिंजरे में बंद होकर खुशी के गीत नहीं गा पाएँगे। आप भले ही हमें सोने से बने पिंजरे में रखो, मगर उसकी सलाख़ों से टकरा कर हमारे कोमल पंख टूट जाएँगे।

हम बहता जल पीनेवाले

मर जाएँगे भूखे-प्‍यासे,

कहीं भली है कटुक निबोरी

कनक-कटोरी की मैदा से,

भावार्थ- आगे पक्षी कह रहे हैं कि हम तो बहते झरनों-नदियों का जल पीते हैं। पिंजरे में रहकर हमें कुछ भी खाना-पीना अच्छा नहीं लगेगा। चाहे आप हमें सोने की कटोरी में स्वादिष्ट पकवान लाकर दो, हमें तब भी अपने घोंसले वाले नीम की निबौरी ज्यादा पसंद आएगी। पिंजरे में हम कुछ भी नहीं खाएँगे और भूखे-प्यासे मर जाएँगे।

स्‍वर्ण-श्रृंखला के बंधन में

अपनी गति, उड़ान सब भूले,

बस सपनों में देख रहे हैं

तरू की फुनगी पर के झूले।

भावार्थ- कवि शिवमंगल सिंह जी ने हम पंछी उन्मुक्त गगन के कविता की इन पंक्तियों में पिंजरे में बंद पक्षियों का दुख-दर्द दिखाया है। पिंजरे में बंद रहते-रहते बेचारे पक्षी अपनी उड़ने की सब कलाएँ और तेज़ उड़ना भूल चुके हैं। कभी वो बादलों में उड़ा करते थे, पेड़ों की ऊँची टहनियों पर बैठ करते थे। अब तो उन्हें बस सपने में ही पेड़ की सबसे ऊँची डाल पर बैठना नसीब होता है।

ऐसे थे अरमान कि उड़ते

नील गगन की सीमा पाने,

लाल किरण-सी चोंचखोल

चुगते तारक-अनार के दाने।

अरमान-इच्छा

तारक- तारे

भावार्थ- पंछियों के मन में यह इच्छा थी कि वो उड़कर आसमान की सभी सीमाओं को पार कर जाएँ और अपनी लाल चोंच से सितारों को दानों की तरह चुनें। मगर, इस गुलामी भरी ज़िंदगी ने उनके सभी सपनों को चूर-चूर कर दिया है। अब तो पिंजरे में कैद होकर रह गए हैं और बिल्कुल खुश नहीं हैं।

होती सीमाहीन क्षितिज से

इन पंखों की होड़ा-होड़ी,

या तो क्षितिज मिलन बन जाता

या तनती साँसों की डोरी।

भावार्थ- कवि शिवमंगल सिंह सुमन जी ने हम पँछी उन्मुक्त गगन के कविता की आखिरी पंक्तियों में पक्षियों की स्वतंत्र होकर उड़ने की इच्छा का बड़ा ही मार्मिक वर्णन किया है।

इन पंक्तियों में पक्षी कहते हैं कि अगर हम आजाद होते तो उड़कर इस आसमान की सीमा को ढूँढ़ने निकल जाते। अपनी इस कोशिश में हम या तो आसमान को पार कर लेते, तो फिर अपनी जान गंवा देते। पक्षियों की इन बातों से हमें पता चलता है कि उन्हें अपनी आज़ादी कितनी प्यारी है।

नीड़ न दो, चाहे टहनी का

आश्रय छिन्‍न-भिन्‍न कर डालो,

लेकिन पंख दिए हैं, तो

आकुल उड़ान में विघ्‍न न डालो।

भावार्थ- हम पंछी उन्मुक्त गगन के कविता की आखिरी पंक्तियों में मनुष्यों से उन्हें स्वतंत्र कर देने की विनती की है। वो मनुष्यों से कहते हैं कि आप हमसे हमारा घोंसला छीन लो, हमें आश्रय देने वाली टहनियाँ छीन लो, हमारे घर नष्ट कर दो, लेकिन जब भगवान ने हमें पंख दिए हैं, तो हमसे उड़ने का अधिकार ना छीनो। कृपया हमें इस अंतहीन आकाश में उड़ने के लिए स्वतंत्र छोड़ दो।

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कविता से (पृष्ठ संख्या 2)

प्रश्न 1 हर तरह की सुख सुविधाएँ पाकर भी पक्षी पिंजरे में बंद क्यों नहीं रहना चाहते?

उत्तर- पक्षी के पास पिंजरे के अंदर वे सारी सुख सुविधाएँ है जो एक सुखी जीवन जीने के लिए आवश्यक होती हैं, परन्तु हर तरह की सुख-सुविधाएँ पाकर भी पक्षी पिंजरे में बंद नहीं रहना चाहते क्योंकि उन्हें बंधन नहीं अपितु स्वतंत्रता पसंद है। वे तो खुले आकाश में ऊँची उड़ान भरना, बहता जल पीना, कड़वी निबौरियाँ खाना ही पसंद करते हैं।

प्रश्न 2 पक्षी उन्मुक्त रहकर अपनी कौन-कौन सी इच्छाएँ पूरी करना चाहते हैं?

उत्तर- पक्षी उन्मुक्त होकर वनों की कड़वी निबोरियाँ खाना, खुले और विस्तृत आकाश में उड़ना, नदियों का शीतल जल पीना, पेड़ की सबसे ऊँची टहनी पर झूलना और क्षितिज से मिलन करने की इच्छाओं को पूरी करना चाहते हैं।

प्रश्न 3 भाव स्पष्ट कीजिए–

“या तो क्षितिज मिलन बन जाता/ या तनती साँसों की डोरी।”

उत्तर- प्रस्तुत पंक्ति का भाव यह है कि पक्षी क्षितिज के अंत तक जाने की चाह रखते हैं, जो कि मुमकिन नहीं है परन्तु फिर भी क्षितिज को पाने के लिए पक्षी किसी भी स्थिति का सामना करने के लिए तैयार है यहाँ तक कि वे इसके लिए अपने प्राणों को भी न्योछावर कर सकते हैं।

कविता से आगे (पृष्ठ संख्या 2-3)

प्रश्न 1 

  1. बहुत से लोग पक्षी पालते हैं–

पक्षियों को पालना उचित है अथवा नहीं? अपना विचार लिखिए।

  1. क्या आपने या आपकी जानकारी में किसी ने कभी कोई पक्षी पाला? उसकी देखरेख किस प्रकार की जाती होगी, लिखिए।

उत्तर- 

  1. मेरे अनुसार पक्षियों को पालना बिल्कुल भी उचित नहीं है क्योंकि ईश्वर ने उन्हें उड़ने के लिए पंख दिए हैं, तो हमें उन्हें बंधन में रखना सर्वथा अनुचित है। अपनी इच्छा से ऊँची-से-ऊँची उड़ान भरना, पेड़ों पर घोंसले बनाकर रहना, नदी-झरनों का जल पीना, फल-फूल खाना ही उनकी स्वाभाविक पशु प्रवृत्ति है। आप किसी को भी कितना ही सुखी रखने का प्रयास करें परंतु उसके स्वाभाविक परिवेश से अलग करना अनुचित ही माना जाएगा।
  2. एक बार एक घायल कबूतर हमारे घर आ गया। जिसकी हमने देखभाल की और उसके ठीक होने के बाद वह हमारे साथ ही रहने लगा। सब घरवालों के लिए वह कौतूहल का विषय बन गया था। हम सब घरवाले एक नन्हें बच्चे की तरह उसकी देखभाल करते थे। उसे रोज नहलाया जाता। उसके खाने-पीने का बराबर ख्याल रखा जाता। इस प्रकार से हम अपने पक्षी का पूरा ख्याल रखते थे।

प्रश्न 2 पक्षियों को पिंजरे में बंद करने से केवल उनकी आज़ादी का हनन ही नहीं होता, अपितु पर्यावरण भी प्रभावित होता है। इस विषय पर दस पंक्तियों में अपने विचार लिखिए।

उत्तर- पक्षियों को पिंजरों में बंद करने से सबसे बड़ी समस्या पर्यावरण में आहार श्रृंखला असंतुलित हो जाएगी। जैसे घास को छोटे कीट खाते हैं तो उन कीटों को पक्षी। यदि पक्षी न रहे तो इन कीटों की संख्या में वृद्धि हो जाएगी जो हमारी फसलों के लिए उचित नहीं है। इस कारण पर्यावरण असंतुलित हो जाएगा। पक्षी जब फलों का सेवन करते हैं तब बीजों को यहाँ वहाँ गिरा देते हैं जिसके फलस्वरूप नए-नए पौधों पनपते हैं। कुछ पक्षी हमारी फैलाई गंदगी को खाते हैं जिससे पर्यावरण साफ़ रहता है यदि ये पक्षी नहीं रहेंगे तो पर्यावरण दूषित हो जाएगा और मानव कई बीमारियों से ग्रस्त हो जाएगा अत: जिस प्रकार पर्यावरण जरुरी है, उसी प्रकार पक्षी भी जरुरी है।

अनुमान और कल्पना (पृष्ठ संख्या 3)

प्रश्न 1 क्या आपको लगता है कि मानव की वर्तमान जीवन-शैली और शहरीकरण से जुड़ी योजनाएँ पक्षियों के लिए घातक हैं? पक्षियों से रहित वातावरण में अनेक समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं। इन समस्याओं से बचने के लिए हमें क्या करना चाहिए? उक्त विषय पर वाद-विवाद प्रतियोगिता का आयोजन कीजिए।

उत्तर- हाँ, इसमें कोई शक नहीं है कि मानव की वर्तमान जीवन-शैली और शहरीकरण से जुड़ी योजनाएँ पक्षियों के लिए सभी दृष्टिकोण से घातक हैं। अंधाधुंध शहरीकरण के कारण पक्षी प्रकृति से समाप्त होते चले जा रहे हैं। बड़ी संख्या में पेड़ काटे जा रहे हैं जिससे पक्षियों का आश्रय समाप्त हुआ है। कल-कारखानों के खुलने से वातावरण का प्रदूषण बढ़ गया है। इस कारण पक्षियों का आसमान में उड़ना भी कठिन हो गया है क्योंकि उनका आश्रय समाप्त होने के साथ-साथ पेड़ों से प्राप्त खाद्य पदार्थ, फल-फूल आदि उन्हें नहीं मिल पाते । ऐसा होने पर उन्हें मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। पक्षियों के पलायन से सबसे बड़ा खतरा है। अनाज़ में कमी होने का है। पर्यावरण संतुलित नहीं रहेगा इससे पर्यावरण संतुलन पर गहरा असर पड़ेगा और तब मनुष्य को अपने भविष्य की चिंता सताने लगेगी। अतः आवश्यक है कि मनुष्य जागरूक हो जाए और पक्षियों के संरक्षण के लिए अधिक से अधिक संख्या में वृक्षारोपण करें। पक्षियों के लिए जलाशयों के साथ-साथ बाग-बगीचों का भी निर्माण करवाएँ। पक्षियों को पिंजरों में बंदी बना करके नहीं रखना चाहिए।

अन्य समस्याओं के बारे में छात्र स्वयं सोचे और विचार-विमर्श करें। इसके लिए विद्यालय में वाद-विवाद प्रतियोगिता का आयोजन करें

प्रश्न 2 यदि आपके घर के किसी स्थान पर किसी पक्षी ने अपना आवास बनाया है और किसी कारणवश आपको अपना घर बदलना पड़ रहा है तो आप उस पक्षी के लिए किस तरह के प्रबंध करना आवश्यक समझेंगे? लिखिए।

उत्तर- यदि हमारे घर में किसी पक्षी ने अपना घोंसला बनाया हो और किसी कारणवश हमें घर बदलना पड़ रहा हो तो हम संभवतः प्रयास तो यह करेंगे कि घोंसले को छेड़ा न जाए और उस पक्षी के बाहर आने-जाने का स्थान भी खुला रहे। लेकिन यदि ऐसा न हो पाए तो हम घोंसले को सावधानीपूर्वक उठाकर घर के बाहर किसी ऊँचे स्थान पर रखेंगे जहाँ उस पक्षी की नज़र पड़ सके।

भाषा की बात (पृष्ठ संख्या 3)

प्रश्न 1 स्वर्ण-श्रृंखला और लाल किरण-सी में रेखांकित शब्द गुणवाचक विशेषण हैं।

कविता से ढूंढ़कर इस प्रकार के तीन और उदाहरण लिखिए।

उत्तर- पुलकित-पंख, कटुक-निबौरी, कनक-कटोरी।

प्रश्न 2 ‘भूखे-प्यासे’ में द्वंद्व समास है। इन दोनों शब्दों के बीच लगे चिहन को सामासिक चिह्न (-) कहते हैं। इस चिहन से ‘और’ का संकेत मिलता है, जैसे– भूखे – प्यासे = भूखे और प्यासे।

इस प्रकार के दस अन्य उदाहरण खीजकर लिखिए।

उत्तर- अमीर-गरीब, सुख-दुःख, रात-दिन, तन-मन, मीठा-खट्टा, अपना-पराया, पाप-पुण्य, सही-गलत, धूप-छाँव, सुबह-शाम।

Class 7 भूगोल – अध्याय-5: जल

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जल चक्र

सदियों से वही पानी दुनिया भर में पुनर्चक्रण की मदद से चल रहा है। पानी के पुनर्चक्रण की यह प्रक्रिया पृथ्वी के विकास में सहायक होती है। पृथ्वी के जल को सतह के ऊपर और नीचे ले जाने की इस प्रक्रिया को जल चक्र कहा जाता है।

सतह से बादलों तक और बादलों से सतह तक पानी की निरंतर गति को हाइड्रोलॉजिकल चक्र भी कहा जाता है। जल चक्र की प्रक्रिया में सूर्य, वायु और कई अन्य कारक शामिल होते हैं। जल चक्र की प्रक्रिया में पानी ठोस, तरल और गैस जैसी सभी अवस्थाओं से होकर गुजरता है।

जल चक्र एक प्रक्रिया है, जिसमें पानी सतह से वायुमंडल में वाष्पित हो जाता है। बादलों में बारिश के माध्यम से ठंडा और संघनित होता है और फिर से वर्षा की प्रक्रिया के साथ सतह पर गिर जाता है।

वर्षा के बाद पानी भूजल, नदियों, तालाबों, झीलों आदि के रूप में एकत्र हो जाता है। नदियों का पानी महासागरों में मिल जाते हैं, और फिर से वाष्पित हो जाते हैं। यह क्रिया लगातार होता रहता हैं। जिसके कारण पृथ्वी पर पानी सामान रूप से विधमान रहता हैं। पानी एक नवीकरणीय संसाधन हैं।

महासागरों या समुद्र के जल वाष्प में नमक शामिल नहीं होता है क्योंकि नमक अपने उच्च घनत्व के कारण वाष्प के साथ ऊपर नहीं उठ पता है। जिसका अर्थ है कि महासागरों या समुद्र से वाष्पित पानी नमकीन नहीं होता है।

जलवायु पर प्रभाव

जल चक्र की प्रक्रिया के अधिकांश चरणों में सूर्य की महत्वपूर्ण भूमिका होती है, क्योंकि सौर ऊर्जा जल चक्र को शक्ति प्रदान करती है। वाष्पीकरण के प्रभाव से वायुमंडलीय तापमान में वृद्धि होती है, लेकिन वाष्पीकरण ठंडा होने के कारण तापमान कम हो जाता है।

जिससे वातावरण ठंडा हो जाता है। यह वाष्पीकरण शीतलन महासागरों के माध्यम से वाष्पीकरण प्रक्रिया द्वारा किया जाता है क्योंकि वैश्विक वाष्पीकरण का 86% महासागरों से होता है।

गर्मी के दिनों में जल वाष्प अधिक बनता हैं जिससे कारण तापमान और अधिक गर्म होता जाता हैं। जबकि वर्षा के दिनों में जल वाष्प ठंडा होने लगता हैं साथ ही तापमान भी काम होता हैं। ठण्डा जलवाष्प बदल में संघनित होकर वर्षा करते हैं। 

इससे हम कह सकते हैं कि ऊष्मा के अधिक या कम से जल चक्र लगातार चलता रहता है। जल चक्र की इस प्रक्रिया में ऊर्जा का आदान-प्रदान लगातर होता रहता है। जो पृथ्वी की जलवायु को प्रभावित करता है। 

वाष्पीकरण की प्रक्रिया में यह वातावरण को ठंडा बनाने के लिए ऊर्जा प्राप्त करता है और पानी को संघनित करते समय यह ऊर्जा को मुक्त करता है। जिससे यह ठंडा हो जाता है। जिससे जलवायु और तापमान स्थिर हो जाती है। वायुमण्डल में बनने वाले जलवाष्प सामान्यतः क्षोभमंडल तक सीमित रहते हैं।

जल चक्र के प्रकार

दुनिया भर में शुद्ध पानी बहुत कम मात्रा में उपलब्ध है। हलाकि महासागरों में अथाह जल हैं। लेकिन उसका उपयोग किया जाना कठिन हैं। क्योकि उसमे नमक का स्तर बहुत अधिक होता हैं। प्रकृति ने इससे शुद्ध करने के लिए जल चक्र जैसी अद्धभुत किया तैयार किया हैं। इससे पानी दुनिया भर में घूमती रहती है। चलिए जानते हैं जल चक्र में कौन कौन से चरण शामिल होते हैं-

जल चक्र की प्रक्रिया में मुख्य रूप से 4 चरण शामिल हैं जो इस प्रकार हैं:

  1. वाष्पीकरण
  2. संक्षेपण
  3. वर्षा
  4. अपवाह 

वाष्पीकरण

वाष्पीकरण एक बहुत ही महत्वपूर्ण प्रक्रिया है, क्योंकि इस चरण में पृथ्वी की सतह से जल वाष्प के रूप में वायुमंडल में पानी का स्थानांतरण करती है। आम तौर पर पानी का वाष्पीकरण तब होता है जब पानी अपने क्वथनांक यानी 100 डिग्री को छूता है। 

वाष्पीकरण को वाष्पोत्सर्जन के रूप में भी जाना जाता है। जलवाष्प के रूप में पौधे की पत्तियों पर मौजूद सूक्ष्म छिद्रों से भी वायुमंडल में पानी वाष्पोत्सर्जन होता है जिसे वाष्पीकरण कहा जाता है। 

वाष्पीकरण की प्रक्रिया से वायुमंडल का तापमान ठंडा होता रहता है क्योंकि सौर ऊर्जा पृथ्वी की सतह पर गिर रही है जिससे सतह गर्म हो रही है और बढ़ती वायु धाराओं के कारण समुद्र में मौजूद पानी के वाष्प वातावरण की ओर बढ़ रही है। 

इसी प्रकार, पौधों, पेड़ों, कुओं, भूमिगत जल आदि से वाष्प आकाश में ऊपर उठती है जिससे पृथ्वी की सतह ठंडी हो जाती है। वाष्प को बर्फ या बर्फ के माध्यम से भी पानी में परिवर्तित किए बिना भी बनाया जा सकता है।

ठोस को सीधे गैसीय अवस्था में बदलने की इस प्रक्रिया को “उच्च बनाने की क्रिया” कहा जाता है। उच्च बनाने की क्रिया के लिए आवश्यक बुनियादी तत्वों में तेज धूप, कम वायुदाब, तेज हवा, कम तापमान और कम आर्द्रता शामिल हैं।

संक्षेपण

आकाश में ऊपर उठने वाले जल को वाष्प में बदलने की प्रक्रिया के बाद, तापमान में वृद्धि के कारण वाष्प फिर से तरल रूप में परिवर्तित हो जाती है क्योंकि यह ठंडी हवा के संपर्क में आने से वातावरण को ठंडा बनाती है, वाष्पों के रूपांतरण की यह प्रक्रिया पुनः द्रव रूप में संघनन कहलाता है। 

संघनन की यह प्रक्रिया वायु में जलवाष्प से भरते ही प्रारंभ हो जाती है और वाष्पों को पुनः जल की बूंदों में बदलने के लिए तैयार हो जाती है। जलवाष्प 0 डिग्री तापमान से टकराने के बाद तरल के रूप में परिवर्तित हो जाती है और पानी की एक छोटी बूंद बनाने के लिए मिलती है, ये छोटी बूंदें पानी की एक बड़ी बूंद बनाने के लिए एक साथ विलीन हो जाती हैं। 

जब जलवाष्प द्वारा निर्मित बादल के ऊपर बहाव को पार करने के लिए बूंद काफी बड़ी होती है, तो पानी की बूंदें बादल से बाहर निकल जाती हैं और पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण के कारण नीचे गिर जाती हैं, पानी की बूंदों के गिरने की यह प्रक्रिया पृथ्वी की सतह को वर्षण कहते हैं जो संघनन के बाद आता है। यदि ये मर्ज की गई बूंदें उच्च वायुदाब से गुजरती हैं तो 

वह बूंदें क्रिस्टलीकृत या जम सकती हैं और बर्फ, बर्फ आदि जैसे ठोस रूप में पृथ्वी की सतह पर गिर सकती हैं। यदि परिस्थितियां बर्फ और बारिश के बीच होती हैं, तो बूंदें बर्फीली ठंड, आधे जमे हुए पानी के साथ गिरेंगी छोटी बूंद जिसे ‘स्लीट’ के नाम से जाना जाता है।

वर्षा

संघनन के बाद जल वाष्प पानी की बूंदों में बदल जाती है जो बादलों के अंदर होती हैं, जो दुनिया भर में घूम रही हैं। हवा की गति के कारण ये बादल एक-दूसरे से टकराते हैं, जिसके परिणामस्वरूप बारिश होती है और वायुमंडलीय तापमान के आधार पर बारिश, ओले, बर्फ या ओलावृष्टि के रूप में पृथ्वी की सतह पर वापस गिर जाते हैं। 

पानी की बूंदों के फिर से गिरने की यह प्रक्रिया पृथ्वी की सतह को “वर्षा” कहा जाता है। मूल रूप से, वर्षा तब होती है जब हवा पानी की और बूंदों को धारण नहीं कर सकती है। 

पानी के रूप में गिरने वाली वर्षा आगे वाष्पीकरण के लिए विभिन्न स्थानों पर गिर सकती है जैसे कुछ वाष्पीकरण की प्रक्रिया से वायुमंडल में वापस आ सकते हैं, कुछ पत्तियों और पौधों की सतह के माध्यम से वाष्पित हो सकते हैं, कुछ जल निकायों में मिल सकते हैं। 

वाष्पित होने के लिए सीधे महासागरों में बहती है, कुछ धाराओं और भूजल में घुसपैठ की प्रक्रिया के साथ मिट्टी में प्रवेश करती है। ज्वालामुखियों के पास या तापीय ऊर्जा स्रोत के पास कहीं भी मौजूद पानी को ‘वसंत’ कहा जाता है।

अपवाह

जब पानी गिरता है और झीलों, महासागरों, कुओं, भूमि आदि में रुक जाता है, तो इस प्रक्रिया को “अपवाह” कहा जाता है। नीचे गिरते समय यदि बूँदें बर्फ या बर्फ के रूप में मिल जाती हैं, तो झीलों और महासागरों में पानी के रूप में पिघल जाती हैं। 

इससे झीलों और नदियों में जल प्रवाह बढ़ जाता है, जिससे बाढ़ की समस्या उत्पन्न हो सकती है। यही कारण है कि सर्दियों की तुलना में आमतौर पर वसंत या गर्मी के मौसम में अधिक बाढ़ आती है।

जल चक्र की यह प्रक्रिया एक चक्रीय प्रक्रिया है जिसका कोई अंत या शुरुआत नहीं है। इस चक्र का मुख्य लाभ यह है कि इसमें पानी का नुकसान नहीं होता है और समुद्रों और समुद्रों में मौजूद पानी हमेशा समतल रहता है और हर बार आसमान में बादल छाए रहते हैं।

जल का भूमण्डलीय वितरण

पृथ्वी पर पाए जाने वाला जल कम से कम 97%, खारा जल होता है जो महासागरों में पाया जाता है। हम खारे जल को पीने के काम में नहीं ला सकते हैं या फिर उसको फसलों की सिंचाई के काम ही में ला सकते हैं। समुद्री जल से नमक को निकालना तकनीकी रूप से संभव है, लेकिन यह विधि काफी महँगी है। केवल 2.7% पानी ही पृथ्वी पर अलवण जल के रूप में पाया जाता है और इसमें 1000 पीपीएम से भी कम किसी भी प्रकार का घुला हुआ ठोस होता है, पृथ्वी का लगभग 2% जल ठोस अवस्था में पाया जाता है। (इसका अर्थ है लगभग 66% सभी प्रकार के अलवण जल का हिस्सा है।), अंटार्कटिका हिमच्छद (हिमशिखर) और हिमनदों, जो कि ऊँचे अल्पाइन स्थानों पर पाये जाते हैं, क्योंकि ये जमे हुए हैं और काफी दूर स्थित हैं, हिमशिखरों पर पाया जाने वाला अलवण जल को उपयोग में नहीं लाया जा सकता है।

इस तरह से पृथ्वी पर पाये जाने वाले जल का कुल 1% भाग ही मनुष्यों, पौधों एवं स्थलीय जन्तुओं के लिये उपयोग करने लायक होता है। अलवण जल झीलों, नदियों, जल धाराओं, तालाबों एवं जमीन में पाया जाता है। जल का एक छोटे से छोटा भाग (0.001%) वाष्प के रूप में वायुमंडल में पाया जाता है। अलवण जल का वितरण जो भौगोलिक दृष्टि से एक समान नहीं है, इसके वितरण में यह एक देश से दूसरे देश में भी बहुत अंतर है और यहाँ तक कि किसी देश में एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में भी अंतर पाया जाता है।

उदाहरण के लिये विश्व के कुछ क्षेत्र अलवण जल की आपूर्ति के मामले में काफी धनी हैं जबकि कुछ क्षेत्र सीमित आपूर्ति के कारण शुष्क अथवा अर्धशुष्क क्षेत्र होते हैं। कुछ क्षेत्रों में वर्षा जल की अधिकांश मात्रा जल संग्रहण के अपर्याप्त साधनों की कमी के कारण उपयोग में नहीं आती हैं। इस प्रकार, यह वर्षाजल काफी मात्रा में बेकार हो जाता है या फिर भयंकर बाढ़ का कारण होता है, जिसका परिणाम जीवन एवं संपत्ति की हानि होती है।

यद्यपि पानी एक नवीकरणीय संसाधन है, लेकिन अलवण जल की मात्रा निश्चित है। अलवण जल एक कमी वाला संसाधन है और भारत सहित दुनिया के बहुत से भागों में ऐसा ही है। जलस्रोतों के प्रदूषण के कारण और बढ़ती हुई जनसंख्या की मांग के कारण अलवण जल पर काफी दबाव है। दुनिया भर में जल का उपभोग लगभग 6 गुना बढ़ गया है। यह कमी जनसंख्या वृद्धि दर की तुलना में दोगुने से भी अधिक हो गयी है।

महासागरीय परिसंचरण

महासागरों की गतियों को इस प्रकार वर्गीकृत कर सकते हैं जैसे – तरंगे, ज्वार – भाटा एवं धाराएँ।

तरगें

जब महासागरीय सतह पर लगातार उठता और गिरता रहता है, तो इन्हें कहते है। भूकंप , ज्वालामुखी उदगार, या जल के नीचे भूस्खलन के कारण महासागरीय जल अत्यधिक विस्थापित होता है। इसके परिणामस्वरूप 15 मीटर तक की ऊँचाई वाली ज्वारीय तरंगे उठ सकती हैं, जिसे सुनामी कहते हैं।

ज्वार-भाटा

दिन में दो बार नियम से महासागरीय जल का उठना एवं गिरना ‘ ज्वार-भाटा ‘कहलाता देता है। सूर्य और चन्द्रमा की आकर्षण शक्ति के कारण जब समुद्र का जल ऊपर की ओर उठता है तो उसे ज्वार तथा जल का नीचे गिरता है तो उसे भाटा कहते है।

सूर्य एवं चंद्रमा के शक्तिशाली गुरुत्वाकर्षण बल के कारण पृथ्वी की सतह पर ज्वार-भाटे आते हैं।

पूर्णिमा एवं अमावस्या के दिनों में सूर्य, चंद्रमा एवं पृथ्वी एक सीध में होते हैं जिसके कारण ऊँचे ज्वार उठते है इस ज्वार को बृहत् ज्वार कहते है।

चाँद एवं सूर्य का गुरुत्वाकर्षण बल विपरीत दिशाओं से महासागरीय जल पर पड़ता है जिसके कारण निम्न ज्वार आता हैइस ज्वार को लघु ज्वर-भाटा कहते है।

महासागरीय धाराएँ

निश्चित दिशा में महासागरीय सतह पर नियमित रूप से बहने वाली जल धाराएँ होती हैं। महासागरीय धाराएँ गर्म या ठंडी हो सकती हैं।

गर्म महासागरीय धाराएँ

भूमध्य रेखा के निकट उत्पन्न होती हैं एवं ध्रुवों की ओर प्रवाहित होती है। गल्फस्ट्रीम गर्म जलधाराएँ होती है। गर्म धाराओं से स्थलीय सतह का तापमान गर्म हो जाता है।

ठंडी महासागरीय धाराएँ

Sध्रुवों या उच्च अक्षांशो से उष्णकटिबंधीय या निम्न अक्षांशो की ओर प्रवाहित होती है। ये लेब्राडोर शीत महासागरीय धाराएँ होती है।

जिस स्थान पर गर्म एवं शीत जलधाराएँ मिलती है , वह स्थान विश्वभर में सर्वोत्तम मत्स्यन क्षेत्र माना जाता है। जापान के आस-पास एवं उत्तर अमेरिका के पूर्वी तट इसके उदाहरण है

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प्रश्न (पृष्ठ संख्या 37)

प्रश्न 1 निम्न प्रश्नों के उत्तर दीजिए:- 

  1. वर्षण क्या है ?
  2. जल चक्र क्या है ?
  3. लहरों की ऊँचाई प्रभावित करने वाले कारक कौन – से है ?
  4. महासागरीय जल की गति को प्रभावित करने वाले कारक कौन – से हैं ?
  5. ज्वार – भाटा क्या है तथा ये कैसे उत्पन्न होते है ?
  6. महासागरीय धाराएँ क्या है ?

उत्तर –

  1. वायुमण्डलीय जल के संघनित होकर किसी भी रूप में पृथ्वी की सतह पर वापस आने को वर्षण कहते हैं। वर्षण के कई रूप हो सकते हैं, जैसे वर्षा, फुहार, हिमवर्षा, हिमपात। यह वर्षा, ओलावृष्टि, बर्फ या बर्फ के रूप में पृथ्वी पर पानी का जमाव है।
  2. सूर्य के ताप के कारण जल वाष्पित हो जाता है और ठंडा होने पर जलवाष्प संघनित होकर बादलों का रूप ले लेता है। यहाँ से यह वर्षा, हिम अथवा सहिम वृष्टि के रूप में धरती या समुद्र पर नीचे गिरता है। जिस प्रक्रम में जल लगातार अपने स्वरूप को बदलता रहता है और महासागरों, वायुमंडल एवं धस्तों के बीच चक्कर लगाता रहता है, उस को जल चक्र कहते है।
  3. लहरों की ऊँचाई को प्रभावित करने वाले कारक निम्नलिखित है, जैसे:- तूफ़ान में तेज वायु के कारण, सूर्य एवं चन्द्रमा के शक्तिशाली गुरुत्वाकर्षण बल के कारण, जल के नीचे भूस्खलन के कारण, ज्वालामुखी के उद्गार के कारण।
  4. महासागरीय जल की गति को प्रभावित करने वाले कारक निम्नलिखित है, जैसे:- समुन्द्र के नीचे या आस –  पास भूकंप के कारण, पानी के तापमान के ज्यादा होने के कारण, ज्वालामुखी के विस्फोट के कारण।
  5. दिन में दो बार नियम से महासागरीय जल का उठना एवं गिरना ‘ज्वार – भाटा ‘ कहलाता है। जब सर्वाधिक ऊँचाई तक उठकर जल, तट के बड़े हिस्से को डुबो देता है, तब उसे ज्वार कहते हैं। जब जल अपने निम्नतम स्तर तक आ जाता है एवं तट से पीछे चला जाता है, तो उसे भाटा कहते हैं। सूर्य एवं चंद्रमा के शक्तिशाली गुरुत्वाकर्षण बल के कारण पृथ्वी की सतह पर ज्वार – भाटे आते हैं। जब पृथ्वी का जल चंद्रमा के निकट होता है उस समय चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण बल से जल अभिकर्षित होता है, जिसके कारण उच्च ज्वार आते हैं।
  6. महासागरीय धाराएँ, निश्चित दिशा में महासागरीय सतह पर नियमित रूप से बहने वाली जल की धाराएँ होती हैं। महासागरीय धाराएँ गर्म या ठंडी हो सकती हैं। गर्म महासागरीय धाराएँ, भूमध्य रेखा के निकट उत्पन्न होती हैं एवं ध्रुवों को ओर प्रवाहित होती हैं। ठंडी भाराएँ, ध्रुवों या उच्च अक्षांशों से की उष्णकटिबंधीय या निम्न अक्षांशों की ओर प्रवाहित होती हैं।

प्रश्न 2 कारण बताइए :- 

  1. समुंद्री जल नमकीन होता है।
  2. जल की गुणवत्ता का हास हो रहा है।

उत्तर –

  1. समुंद्र में नदियाँ अपना जल बहाकर लाती हैं। ये बड़ी मात्रा में खनिज लवणों को बहाकर समुंद्र में लाती है। समुंद्र में जल का नियमित रूप से भारी मात्रा में वाष्पीकरण होता रहता है। लवणीय पदार्थों का वाष्पीकरण नहीं होता। इसलिए समुंद्र का जल नमकीन हो जाता हैं।
  2. मनुष्य की वजह से जल की गुणवता के ह्रास होने के निम्नलिखित कारण हैं:-
  • नदियों में कूड़ा – करकट फेंक दिया जाता है ।
  • उद्योगों से रसायन व प्रदूषित जल की निकासी नदियों में होती है।
  • नदियों में मानव की जली तथा अधजली लाशें, जानवरों के शव, आदि फेंक दिए जाते हैं।
  • खेतों में कीटनाशकों तथा उर्वरकों के हानिकारक तत्त्व भी पानी में मिलते रहते हैं।

प्रश्न 3 सही (√) उत्तर चिह्नित कीजिए :-

  1. वह प्रक्रम जिस में जल लगातार अपने स्वरूप को बदलता रहता है और महासागर, वायुमंडल एवं स्थल के बीच चक्कर लगाता रहता है।

(i) जल चक्र  (ii)  ज्वार – भाटा  (iii)  महासागरीय धाराएँ

  1. सामान्यत:  गर्म महासागरीय धाराएँ उत्पन्न होती हैं

(i) ध्रुवों के निकट  (ii) भूमध्य रेखा के निकट  (iii) दोनों में से कोई नहीं

  1. दिन में दो बार नियम से महासागरीय जल का उठना एवं गिरना कहलाता है ?

(i) ज्वार – भाटा  (ii) महासागरीय धाराएँ  (iii) तरंग

उत्तर –

  1. जल चक्र
  2. भूमध्य रेखा के निकट
  3. ज्वार –  भाटा

प्रश्न 4 निम्नलिखित स्तंभों को मिलाकर सही जोड़े बनाइए:- 

उत्तर –

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Class 7 भूगोल – अध्याय-4: वायु

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वायुमंडल

हमारी पृथ्वी चारों ओर से वायु की घनी चादर से घिरी हुई है, जिसे वायुमंडल कहते हैं। पृथ्वी पर सभी जीव जीवित रहने के लिए वायुमंडल पर निर्भर हैं। यह हमें साँस लेने के लिए वायु प्रदान करता है एवं सूर्य की किरणों के हानिकारक प्रभाव से हमारी रक्षा करता है। यदि सुरक्षा की यह चादर न हो तो हम दिन के समय सूर्य की गर्मी से तप्त होकर जल सकते है एवं रात के समय ठंड से जम सकते हैं। अत: यह वह वायुराशि है जिसने पृथ्वी के तापमान को रहने योग्य बनाया है।

वायुमंडल का संघटन

जिस वायु का उपयोग हम साँस लेने के लिए करते हैं , वास्तव में वह अनेक गैसों का मिश्रण होती है। नाइट्रोजन तथा ऑक्सीजन ऐसी दो गैसों हैं, जिनसे वायुमंडल का बड़ा भाग बना है।

1. नाइट्रोजन -78% 2. ऑक्सीजन -21% 3. कार्बन डाइऑक्साइड 0.03% 4. आर्गान – 0.093%  अन्य सभी 0.04%

  1. नाइट्रोजन:- वायु में सर्वाधिक पाई जाने वाली गैस है। जब हम साँस लेते हैं तब फेफड़ो में कुछ नाइट्रोजन भी ले जाते हैं और फिर उसे बाहर बाहर निकाल देते हैं। परंतु पौधों को अपने जीवन के लिए नाइट्रोजन की आवश्यकता होती है।
  2. ऑक्सीजन:- वायु में प्रचुरता से मिलने वाली दूसरी गैस है। मनुष्य तथा पशु साँस लेने में वायु में ऑक्सजीन प्राप्त करते हैं। हरे पादप, प्रकाश संश्लेषण द्वारा ऑक्सीजन उत्पन्न करते हैं।
  3. कार्बन डाइऑक्साइड:- अन्य महत्वपूर्ण गैस है। हरे पादप अपने भोजन के रूप में कार्बन डाइऑक्साइड का प्रयोग करते हैं और ऑक्सीजन वापस देते हैं।

मनुष्य और पशु कार्बन डाइऑक्साइड बाहर निकालते हैं। मनुष्यों तथा पशुओं द्वारा बाहर छोड़ी जाने वाली कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा पादपों द्वारा प्रयोग की जाने वाली गैस के बराबर होती है जिससे संतुलन बना रहता है।

  1. आर्गान:- एक रासायनिक तत्व है। यह एक निष्क्रिय गैस है। कुछ अन्य गैस भी है हीलियम, हाइट्रोजन आदि

पृथ्वी के वायुमण्डल की संरचना

पृथ्वी के वायुमण्डल को पृथ्वी की सतह से लेकर उसके ऊपरी स्तर तक निम्नलिखित पाँच स्तरों में बाँटा गया है-

  • क्षोभमण्डल (Troposphere)
  • समतापमण्डल (Stratosphere)
  • मध्यमण्डल (Mesosphere)
  • तापमण्डल (Thermosphere)
  • बाह्यमण्डल (Exosphere)
Vayumandal Ki Parte - वायुमण्डल की परतें

क्षोभमण्डल

  • यह वायुमण्डल की सबसे निचली परत है, जिसकी ऊँचाई ध्रुवों पर लगभग 8 किमी. और भूमध्यरेखा पर लगभग 18 किमी. होती है|
  • सभी वायुमंडलीय या मौसमी घटनाएँ इसी मण्डल में घटित होती हैं|
  • सम्पूर्ण वायुमण्डल का 80% द्रव्यमान इसी मण्डल में उपस्थित है| वायुमंडल का लगभग 50% द्रव्यमान तो 5.6 किमी. की ऊँचाई तक ही मिलता है, जो मुख्यतः नाइट्रोजन, ऑक्सीजन और कुछ अन्य गैसों से मिलकर बना है|
  • वायुमंडल की लगभग सम्पूर्ण जलवाष्प क्षोभमंडल में ही पायी जाती है, इसी कारण यहाँ मौसमी घटनाएँ होती हैं|
  • क्षोभमंडल में नीचे से ऊपर जाने पर 6.50C/किमी. की दर से तापमान घटता जाता है|
  • इसकी सबसे ऊपरी सीमा क्षोभमण्डल सीमा (Tropopause) कहलाती है|

समतापमण्डल

  • यह वायुमण्डल की दूसरी सबसे निचली परत है, जिसकी ऊँचाई लगभग 12 से 50 किमी. होती है|
  • ओज़ोन परत इसी मण्डल की ऊपरी सीमा पर पायी जाती है, जो पराबैंगनी किरणों का अवशोषण करती है|
  • समतापमण्डल में तापमान लगभग समान रहता है लेकिन ऊँचाई बढ़ने के साथ इसका ताप बढ़ने लगता है, जिसका कारण पराबैंगनी किरणों का ओज़ोन परत द्वारा अवशोषण है|
  • वायुमण्डलीय या मौसमी घटनाएँ इस मण्डल में घटित नहीं होती हैं|
  • इसकी सबसे ऊपरी सीमा समताप सीमा (Stratopause) कहलाती है|
  • वायुयान की उड़ान हेतु यह मण्डल सर्वाधिक उपयुक्त होता है|

मध्यमण्डल

  • यह वायुमण्डल की तीसरी सबसे निचली और समतापमण्डल के ऊपर स्थित परत है, जिसकी ऊँचाई लगभग 50 से 80 किमी. होती है |
  • क्षोभमण्डल में नीचे से ऊपर जाने पर से तापमान घटता जाता है|
  • मध्यमण्डल की सबसे ऊपरी सीमा पृथ्वी का सबसे ठंडा स्थान है, जहाँ का औसत तापमान लगभग −85°C होता है |
  • अन्तरिक्ष से पृथ्वी के वायुमण्डल में प्रवेश करने वाले लगभग सभी उल्कापिंड इस परत आकर जल जाते हैं |

तापमण्डल

  • यह मध्यमण्डल के ऊपर स्थित परत है, जिसकी ऊँचाई लगभग 80 से 700 किमी. होती है |
  • तापमण्डल में नीचे से ऊपर जाने पर से तापमान बढ़ता जाता है|
  • इसकी सबसे ऊपरी सीमा तापसीमा (Thermopause) कहलाती है |
  • तापमंडल की निचली परत (80 – 550 किमी.) आयनमण्डल कहलाती है क्योंकि यह परत सौर्यिक विकिरण द्वारा आयनीकृत (Ionized) हो जाती है | आयनमंडल पूरी तरह से बादल व जलवाष्प विहीन परत है | आयनमंडल से ही रेडियो तरंगें परावर्तित होकर वापस पृथ्वी की ओर लौटती हैं और रेडियो,टेलीवीजन आदि के संचार को संभव बनाती हैं | संचार उपग्रह इसी मण्डल में स्थित होते हैं |
  • उत्तरी ध्रुवीय प्रकाश (aurora borealis) तथा दक्षिणी ध्रुवीय प्रकाश (aurora australis) की घटनाएँ तापमण्डल में ही घटित होती हैं |

बाह्यमण्डल

  • यह तापमण्डल के ऊपर स्थित परत है, जिसकी ऊँचाई लगभग 700 से 10,000 किमी. तक होती है |
  • यह वायु मण्डल की सबसे बाहरी परत है, जो अंततः अन्तरिक्ष में जाकर मिल जाती है |
  • बाह्यमण्डल में हाइड्रोजन व हीलियम गैस की प्रधानता होती है|

मौसम एवं जलवायु

मौसम, वायुमंडल की प्रत्येक घंटे तथा दिन-प्रतिदिन की स्थिति होती है। मौसम नाटकीय रूप से दिन-प्रतिदिन बदलता है। जलवायु दीर्घ काल में किसी स्थान का औसत मौसम, उस स्थान की जलवायु बताता है।

ग्रीन हाउस प्रभाव

ग्रीन हाउस प्रभाव एक प्रक्रिया है जिसके कारण ऊष्मीय विकिरण (Thermal Radiations) किसी ग्रह पर उपस्थित कुछ विशिष्ट गैसों द्वारा अवशोषित किये जाते हैं एवं पुनः सभी दिशाओं में विकिरित किये जाते हैं। अब चूँकि इस पुनर्विकिरित विकिरणों का कुछ भाग सतह की ओर एवं निचले वातावरण की ओर भी आता है अत: यह सतह के औसत तापमान को सामान्य से बढ़ा देते हैं और यह अवशोषण और पुनर्विकिरण वातावरण में कुछ विशेष गैसों की उपस्थिति के कारण होता है, इन्हें ही ग्रीन हाउस गैसे एवं ग्रीन हाउस गैसों के प्रभाव से होने वाली ताप वृद्धि को ही ग्रीन हाउस प्रभाव कहते हैं।

वातावरणीय ताप वृद्धि की यह प्रक्रिया अन्य ग्रहों एवं खगोलीय पिण्डों में भी होती है परन्तु यहाँ पर केवल पृथ्वी पर इस प्रभाव के बारे में तथ्यों को सीमित रखा जा रहा है। ग्रीन हाउस प्रभाव को दो प्रकारों में विभक्त किया जा सकता है जो अग्र प्रकार से हैं-

(1) प्राकृतिक ग्रीन हाउस प्रभाव-

यह एक सामान्य प्राकृतिक प्रक्रिया के कारण होने वाली वातावरणीय तापवृद्धि है जो जीवन के लिए अनिवार्य भी है।

(2) मानवीय प्रभावों के कारण ग्रीन हाउस प्रभाव-

मानवीय क्रियाकलापों के परिणामस्वरूप होने वाले पर्यावरणीय परिवर्तनों के कारण होने वाली तापवृद्धि को इस श्रेणी में वर्गीकृत किया जा सकता है। मानवीय क्रियाकलापों के कारण उत्पन्न कुछ गैंसे, जिन्हें ग्रीन हाउस गैसें कहते हैं, उनकी पर्यावरण/वायुमंडल में अधिकता वायुमंडल के ताप को बढ़ा देती है।

यह सूर्य की हानिकारक पराबैंगनी किरणों (UV-rays) से हमारी रक्षा करती है, किन्तु यह गम्भीरता का विषय बन गया है कि क्लोरोफ्लोरोकार्बन गैस (CFC) के अत्यधिक इस्तमाल से जीवनरक्षक ओजोन पर्त में छिद्र बन गए हैं जिससे पराबैंगनी किरणें हम तक पहुँचने लगी। और उनके परिणाम मानव एवं वनस्पतियों के लिए हानिकारक होते हैं।

पृथ्वी पर सूर्य की किरणों का सन्तुलन (Earth’s Radiation Balance)

पृथ्वी पर ऊर्जा का सार्वभौमिक स्रोत सूर्य है। पृथ्वी पर सूर्य से अत्यधिक मात्रा ऊर्जा विकिरण के द्वारा आती है तथा इस ऊर्जा की दर का सन्तुलन अति आवश्यक होता है। पृथ्वी सूर्य की किरणों को 66 प्रतिशत अवशोषित कर लेती है तथा शेष 34 प्रतिशत यह वापन भेज देती है। इस प्रकार ऊर्जा का सन्तुलन बना रहता है। पृथ्वी की सतह का ताप 1°C लगभग होता है।

कार्बन डाइ-ऑक्साइड वायुमण्डल के ट्रोपोस्फीयर संस्तर में पायी जाती है। वायुमण्डल में इसकी 0.033% मात्रा पायी जाती है। CO2 गैस सबसे अधिक मात्रा में वातावरण को प्रदूषित करती है। सूर्य से आने वाली प्रकाश एवं ताप किरणों को CO2, तथा H2O द्वारा अवशोषित कर लिया जाता है जिसमें पृथ्वी की सतह का ताप कई गुना बढ़ जाता हैं इस क्रिया को ‘हरितगृह प्रभाव’ (Green house effect) कहते हैं।

लकड़ी, कोयले एवं जीवाश्म ईंधन मुख्य रूप से पेट्रोलियम पदार्थों आदि के जलने से भी वातावरण में O2 की मात्रा कम होने लगती है तथा CO2 की मात्रा बढ़ने लगती है जिससे हरितगृह प्रभाव (Green house effect) प्रभावित होता है एवं वातावरण के तापमान में वृद्धि होती है।

इस प्रकार वातावरण को हरितगृह के प्रभाव तथा कार्बन डाइ-ऑक्साइड गैस की मात्रा में कमी लाने के लिए एवं वातावरण को दूषित होने से बचाने के लिए यह आवश्यक है कि अधिक-से-अधिक मात्रा में पेड़-पौधे लगाए जाएं तथा उन्हें कटने से रोका जाए साथ-ही-साथ हरितगृह गैसों का उत्सर्जन कम-से-कम किया जाए।

तापमान

वायु में मौजूद ताप एवं शीतलता के परिमाण को तापमान कहते हैं। वायुमंडल का तापमान ऋतुओं के अनुसार भी बदलता है।

आतपन:- सूर्य से आने वाली वह ऊर्जा जिसे पृथ्वी रोक लेती है, आतपन कहलाती है।

  • आतपन (सूर्यातप) की मात्रा भूमध्य रेखा से ध्रुवों की ओर घटती है। इसलिए ध्रुव बर्फ़ से ढँके हुए है।
  • इसी कारण नगर के भीड़ वाले ऊँचे भवन गर्म वायु को रोक लेते हैं, जिससे नगरों का तापमान बढ़ जाता है।
  • गाँवों की अपेक्षा नगरों का तापमान बहुत अधिक होता है।
  • दिन के समय में ऐसाफेल्ट से बनी सड़के एवं धातु और कंक्रीट से बने भवन गर्म हो जाते हैं।
  • रात के समय यह ऊष्मा मुक्त हो जाती है।

वायु दाब

पृथ्वी की सतह पर वायु के भार द्वारा लगाया गया दाब, वायु दाब कहलाता है। वायु हमारे शरीर पर उच्च दाब के साथ बल लगाती है। किंतु हम इसका अनुभव नहीं करते यह इसलिए होता है, क्योंकि वायु का दाब हमारे ऊपर सभी दिशाओं से लगाता है, और हमारा शरीर विपरीत बल लगाता है।

  • वायुमंडल में ऊपर की और जाने पर वायु  पर दाब तेज़ी से गिरने लगता है।
  • समुद्र स्तर पर वायु दाब का क्षैतिज विवरण किसी स्थान पर उपस्थित वायु के तप द्वारा प्रभावित होता है।
  • वायु सदैव उच्च दाब से निम्न दाब क्षेत्र की और गमन करती है।

पवन:- उच्च दाब क्षेत्र से निम्न दाब क्षेत्र की ओर वायु की गति को ‘ पवन ‘ कहते हैं।

पवन के प्रकार–

  1. 1.स्थायी पवनें:- व्यापारिक पश्चिमी एवं पूर्वी पवनें हैं। ये वर्षभर लगातार निश्चित दिशा में चलती हैं।
  2. मौसमी पवनें:– ये पवनें विभन्न ऋतुओं में अपनी दिशा बदलती रहती है। उदाहरण के लिए -भारत में मानसूनी पवनें। भारत में मानसूनी पवनें।
  3. स्थानीय पवनें:- ये पवनें किसी छोटे क्षेत्र में वर्ष या दिन के किसी विशेष समय में चलती हैं। उदाहरण के लिए -स्थल एवं समुद्री समीर। भारत के उत्तरी क्षेत्र की गर्म एवं शुष्क स्थानीय पवनो को ‘लू ‘ कहते है।

आर्द्रता:- वायु में किसी भी समय जलवाष्प मात्रा को ‘आर्द्रता ‘कहते है।

  • जब वायु में जलवाष्प की मात्रा अत्यधिक होती है, तो उसे आर्द्र कहते है।
  • जब वायु में जलवाष्प की मात्रा कम होती है, तो उसे शुष्क कहते है।

जब जलवाष्प ऊपर उठता है , तो यह ठंडा होना शुरू हो जाता है। जलवाष्प संघनित होकर जल की बूँद बनाते। बादल इन्हीं जल बूँदो का ही एक समूह होता है। जब जल की ये बूँदे इतनी भारी हो जाती हैं कि वायु में तैर न सके ,तब ये वर्षण के रूप में नीचे आ जाती हैं।

वर्षा:– पृथ्वी पर जल के रूप में गिरने वाला वर्षण, वर्षा कहलाता है।

  • ज़्यादातर भौम जल , वर्षा जल से ही प्राप्त होता है।
  • क्रियाविधि आधार पर वर्षा के तीन प्रकार होते है : संवहनी वर्षा, पर्वतीय वर्षा एवं चक्रवाती वर्षा।

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प्रश्न (पृष्ठ संख्या 27)

प्रश्न 1 निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:-

  1. वायुमंडल क्या है ?
  2. वायुमंडल का अधिकतर भाग किन दो गैसों से बना है ?
  3. वायुमंडल में कौन – सी गैस हरित गृह प्रभाव पैदा करती है ?
  4. मौसम किसे कहते है ?
  5. वर्षा के तीन प्रकार लिखें।
  6. वायुदाब क्या है ?

उत्तर –

  1. हमारी पृथ्वी चारों ओर से वायु की घनी चादर से घिरी हुई है जिसे वायुमंडल कहते हैं। पृथ्वी पर सभी जीव जीवित रहने के लिए वायुमंडल पर निर्भर हैं। यह हमें साँस लेने के लिए वायु प्रदान करता है एवं सूर्य की किरणों के हानिकारक प्रभाव से हमारी रक्षा करता है। यदि सुरक्षा की यह चादर न हो तो हम दिन के समय सूर्य की गर्मी से तप्त होकर जल सकते है एवं रात के समय ठंड से जम सकते हैं। अत : यह वह वायुराशि है जिसने पृथ्वी के तापमान को रहने योग्य बनाया है।
  2. वास्तव में वायुमंडल अनेक गैसों का मिश्रण है। लेकिन नाइट्रोजन तथा ऑक्सीजन ऐसी दो गैसे हैं, जिनसे वायुमंडल का बड़ा भाग बना है।
  1. कार्बन डाइऑक्साइड, क्लोरोफ्लोरोकार्बन।
  2. “ क्या आज वर्षा होगी ?” “ क्या आज दिन साफ़ होगा और धूप निकलगी ? “ कितनी ही बार हमने क्रिकेट प्रेमियों के मुँह से एकदिवसीय मैच के भविष्य पर अनुमान लगाते सुना होगा ? यदि हम कल्पना करें कि हमारा शरीर एक रेडियो है और मस्तिष्क उसके स्पीकर, तो मौसम वह है जो इसके नियंत्रण बटनों से छेड़छाड़ करता रहता है। मौसम, वायुमंडल की प्रत्येक घंटे तथा दिन – प्रतिदिन की स्थिति होती है। मौसम नाटकीय रूप से दिन – प्रतिदिन बदलता है। किंतु दीर्घ काल में या किसी स्थान का औसत मौसम, उस स्थान की जलवायु बताता है।
  3. पृथ्वी पर जल के रूप में गिरने वाला वर्षण, वर्षा कहलाता है। क्रियाविधि आधार पर वर्षा के तीन प्रकार होते हैं : संवहनीय वर्षा, पर्वतीय वर्षा एवं चक्रवाती वर्षा। पौधों तथा जीव – जंतुओं के जीवित रहने के लिए वर्षा बहुत महत्त्वपूर्ण हैं। इससे धरातल को ताजा जल प्रदान होता है। यदि वर्षा कम हो, तो जल की कमी तथा सूखा हो जाता है इसके विपरीत अगर वर्षा अधिक होती है तो बाढ़ आ जाती है।
  4. वायु हमारे शरीर पर उच्च दाब के साथ बल लगाती है। किंतु हम इसका अनुभव नहीं करते हैं। यह इसलिए होता है क्योंकि वायु का दाब हमारे ऊपर सभी दिशाओं से लगता है और हमारा शरीर विपरीत बल लगाता है। पृथ्वी की सतह पर वायु के भार द्वारा लगाया गया दाब, वायु दाब कहलाता है। वायुमंडल में ऊपर की ओर जाने पर दाब तेजी से गिरने लगता है। समुद्र स्तर पर वायु दाब सर्वाधिक होता है और ऊँचाई पर जाने पर यह घटता जाता है। वायु दाब का क्षैतिज वितरण किसी स्थान पर उपस्थित वायु के ताप द्वारा प्रभावित होता है।

प्रश्न 2 सही (√) उत्तर चिह्नित कीजिए:-

  1. निम्नलिखित में से कौन – सी गैस हमें सूर्य की हानिकारक किरणों से बचाती है ?

(i) कार्बन डाइऑक्साइड (ii) नाइट्रोजन (iii) ओजोन

  1. वायुमंडल की सबसे महत्त्वपूर्ण परत है

(i) क्षोभमंडल  (ii) बाह्य वायुमंडल  (iii) मध्यमंडल

  1. वायुमंडल की निम्न परतों में कौन–सी बादल विहीन हैं ?

(i) क्षोभमंडल  (ii) समताप मंडल  (iii) मध्यमंडल

  1. वायुमंडल की परतों में जब हम ऊपर जाते हैं, तब वायुदाब

(i) बढ़ता है   (ii) घटता है    (iii) सामान रहता है

  1. जब दृष्टि तरल रूप में पृथ्वी पर आती है, उसे हम कहते है

(i) बादल     (ii) वर्षा      (iii) हिम

उत्तर –

  1. (iii) ओजोन
  2. (i) क्षोभमंडल
  3. (ii) समताप मंडल
  4. (ii) घटता है
  5. (ii) वर्षा

प्रश्न 3 निम्नलिखित स्तम्भों को मिलाकर सही जोड़े बनाइए:-

उत्तर –

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प्रश्न 4 कारण बताइए :-

  1. आद्र दिन में गीले कपड़े सूखने में अधिक समय लेते हैं।
  2. भूमध्य रेखा से ध्रुवों की ओर जाने पर आतपन की मात्रा घटती जाती है।

उत्तर –

  1. जब जल पृथ्वी एवं विभिन्न जलाशयों से वाष्पित होता है तो यह जलवाष्प बन जाता है। वायु में किसी भी समय जलवाष्प की मात्रा को ‘आर्द्रता’ कहते हैं। जब वायु में जलवाष्प की मात्रा अत्यधिक होती है, तो उसे हम आद्र दिन कहते हैं। जैसे – जैसे वायु गर्म होती जाती है, इसकी जलवाष्प धारण करने की क्षमता बढ़ती जाती है और इस प्रकार यह और अधिक आद्र हो जाती है। आद्र दिन में, कपड़े सूखने में काफी समय लगता है एवं हमारे शरीर से पसीना आसानी से नहीं सूखता और हम असहज महसूस करते हैं।
  2. भूमध्य रेखा पर सूर्य की किरणे सीधी पड़ती है। ध्रुवों को आयु उत्तरात्मक सूर्य की किरणें तिरछी पड़ती है। इसलिए भूमध्य रेखा से पूर्व की ओर जाने पर आतपन की मात्रा घटती जाती है।
  3. प्रश्न (पृष्ठ संख्या 28)

प्रश्न 5 आओ खेले:-

  1. दिए गए चार्ट की मदद से वर्ग पहेली की समस्या को हल करें:-

नोट – वर्ग पहेली के उत्तर अंग्रेजी के शब्दों में हैं।

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  1. एक सप्ताह का मौसम कैलेंडर बनाएँ। विभिन्न प्रकार के मौसम को दिखाने के लिए चित्रों या संकेतों का उपयोग करो यदि मौसम में बदलाव आता है, तो आप एक दिन में एक से अधिक संकतों का उपयोग कर सकते है। उदाहरण के लिए – वर्षा रुकने पर सूर्य बाहर निकलता है। एक उदाहरण नीचे दिया गया है।

उत्तर –

1. 

1. Humidity                       11. Exosphere

2. Cloud                            12.  Air

3. Loo                               13. Fog

4. Weather                        14. Oxygen

5. Rain                              15. Wine

6. Peepal.                          16. Neem

7. Atmosphere                   17. Noon

8. Carbondioxide               18. Ozone

9. Barometer                     19. Cyclone

10. Insolation

2.

Class 7 भूगोल – अध्याय-3: हमारी बदलती पृथ्वी

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हमारी बदलती पृथ्वी

स्थलमंडल अनेक प्लेटों में विभाजित है , जिन्हे स्थलमंडलीय प्लेट कहते है। ये प्लेट हमेशा धीमी गति से चारों तरफ घूमती रहती हैं , ऐसा पृथ्वी के अंदर पिघले हुए मैग्मा में होने वाले गति के कारण होता है। ये वृत्तीय रूप में घूमता रहता है।

अंतर्जनित बल

प्लेट की इस गति के कारण पृथ्वी की सतह पर परिवर्तन होता है। पृथ्वी की गति को उन बलों के आधार पर विभाजित किया गया है जिनके कारण ये गतियाँ उत्पन्न होती हैं। जो बल पृथ्वी के आंतरिक भाग में घटित होते हैं उन्हें अंतर्जनित बल (एंडोजेनिक फोर्स) कहते हैं।

बहिर्जनिक बल

जो बल पृथ्वी की सतह पर उत्पन्न होते हैं उन्हें बहिर्जनिक बल (एक्सोजेनिक फोर्स) कहते हैं।

ज्वालामुखी

भू-पृष्ठ का वह छिद्र या दरार अथवा पतला मार्ग जिससे भूपृष्ठ के नीचे की पिघली चट्टान धरातल पर आ जाती है ज्वालामुखी कहलाता है। ज्वालामुखी का उद्गार तथा उससे निकलने वाले पदार्थों के बाहर प्रकट होने की प्रक्रिया को ‘ज्वालामुखी के प्रकट होने की क्रिया’ कहा जाता है।

jwalamukhi-kise-kahate-hain

पृथ्वी के भीतरी भागों में चट्टानों के दबाव के चलते या रेडियोधर्मी खनिजों (यूरेनियम, थोरियम) के टुटते रहने के कारण ताप में वृद्धि होती है। इस ताप वृद्धि से भीतर की चट्टानें गर्म होकर फैलने तथा पिघलने लगती हैं। ज्वालामुखी उद्गार के फलस्वरूप निकलने वाले पदार्थ ठोस द्रव एवं गैस तीनों रूपों में होते हैं। गैसें तीव्र विस्फोट के साथ धरातल को तोड़कर बाहर निकलती हैं। इस गैसों में 80-90% भाग जलवाष्प का होता है। अन्य गैसों में कार्बन-डाईऑक्साइड एवं सल्फर डाईऑक्साइड आदि है। तरल पदार्थों में लावा सबसे अधिक महत्वपूर्ण है जो बाहर निकलकर फैल जाता है।

ज्वालामुखी की परिभाषा

प्रायः एक गोलाकार छिद्र अथवा खुला हुआ भाग जिससे होकर पृथ्वी के अत्यंत तप्त भू-गर्भ से गैस, तरल लावा, जल एवं चट्टानों के टुकड़ों से युक्त गर्म पदार्थ पृथ्वी के धरातल पर प्रकट होते हैं, ज्वालामुखी कहलाता है।

ज्वालामुखी क्रिया के दो रूप होते हैं-

  1. अभ्यान्तरिक अथवा धरातल के नीचे
  2. बाह्य अथवा धरातल के ऊपर

आभ्यानरक क्रिया में मैग्मा आदि धरातल के नीचे ही जमकर ठोस रूप धारण कर लेता है तथा इनमें प्रमुख हैं- बैथोलिथ, फैकोलिथ, सिल तथा डाइक। बाह्य क्रिया में गर्म पदार्थ के धरातल पर प्रकट होने की क्रियाएँ सम्मिलित होती हैं। इनमें प्रमुख हैं- ज्वालामुखी, धरातलीय प्रवाह, गर्म जल के स्त्रोत, गीजर, तथा धुंआरे।

ज्वालामुखी उद्गार के कारण

  • भूगर्भिक असन्तुलन (Isostatic Disequilibsium)
  • गैसों की उत्पत्ति (Formation of Gases)
  • भूगर्भ में ताप वृद्धि
  • दाब में कमी
  • प्लेट विवर्तनिकी (Plate Tectonic)

भूकंप

पृथ्वी के धरातल का अचानक कंपन करना भू-कंप कहलाता है। अधिकांश भूकंप सूक्ष्म कंपन होते हैं। तीव्र भूकंप सूक्ष्म कंपन से प्रारंभ होकर उन कंपनों में बदल जाते हैं और विनाश कर देते हैं। भूकंप के झटके मात्र कुछ सेकण्ड के लिए आते हैं। भूकंप एक ऐसी अप्रत्याशित आकस्मिक घटना है जो अचानक ही उत्पन्न हो जाती है।

bhukamp-kya-hai

भूकंप के झटके वर्ष के किसी भी महीने, महीने के किसी भी दिन और दिन के किसी भी समय में अचानक आ सकते हैं। भूकंप के झटके बिना चेतावनी के आते हैं। भूकंप की आशंकाओं को ज्ञात करने के लिए वैज्ञानिकों ने अथक प्रयत्न किया परंतु अभी तक इसका पूर्वाभास एवं भविष्यवाणी संभव नहीं हो पाया है।

भूकंप विज्ञान

भूकंप विज्ञान या सिस्मोलॉजी विज्ञान की वह शाखा है जिसके अंतर्गत जिसमें सिस्मोग्राफ द्वारा अंकित लहरों का अध्ययन किया जाता है।

भूकंप का प्रभाव भू सतह के ऊपर होता है किंतु भूकंप की घटना भूसतह के नीचे होती है। जिस स्थान पर भूकंप की घटना प्रारंभ होती है, उस स्थान को भूकंप का उत्पत्ति केन्द्र या भूकंप मूल कहते हैं। यह भूगर्भ में स्थित वह स्थान होता है जहाँ से भूकंप से उत्पन्न लहरें प्रसारित होती हैं। इस प्रकार की लहरों को भूकंपीय लहर कहते हैं। भूकम्प मूल के ठीक ऊपर धरातल पर भूकम्प का वह केन्द्र होता है, जहाँ पर भूकम्पीय लहरों का ज्ञान सर्वप्रथम होता है। इस स्थान को भूकम्प केन्द्र अथा ‘अभिकेन्द्र’ कहा जाता है।

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भूकंप अभिकेन्द्र सदैव भूकंप मूल के ठीक ऊपर समकोण पर स्थित होता है तथा भूकंप से प्रभावित क्षेत्रों में यह भाग भूकम्प मूल से सबसे नजदीक होता है। अभिकेन्द्र पर लगे यंत्र द्वारा भूकम्पीय लहरों का अंकन किया जाता है। इस यंत्र को भूकंप लेखन यंत्र या सिस्मोग्राफ कहते हैं। इसकी सहायता से भूकम्पीय लहरों की गति तथा उनके उत्पत्ति स्थान एवं प्रभावित क्षेत्रों के विषय में जानकारी प्राप्त हो जाती है। भारत में पूना, मुम्बई, देहरादून, दिल्ली, कोलकाता आदि में भूकम्प लेखन यंत्रों की स्थापना की गई है।

जब भूकंप मूल से भूकम्प प्रारंभ होता है, तो इस केन्द्र से भूकम्पीय लहरें उठने लगती हैं, तथा सर्वप्रथम ये भूकम्प अभिकेन्द्र पर पहुँचती हैं। यहाँ पर सीस्मोग्राफ द्वारा इनका अंकन कर लिया जाता है।

भूकंपीय लहरें

भूकंपीय लहरों को तीन भागों में विभाजित किया जाता है-

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  • प्राथमिक अथवा प्रधान – लहरें इन्हें अंग्रेजी के (P) से निरूपित किया जाता है। ये लहरें ध्वनि तरंगों के समान होती हैं, तथा इनमें अणुओं की कंपन लहरों की दिशा में आगे या पीछे होती रहती है। चूंकि इन लहरों से दबाव पड़ता है, अतः इन्हें दबाववाली लहरें कहते हैं। इन लहरों का उद्भव चट्टानों के कणों के सम्पीड़न से होता है।
  • अनुप्रस्थ लहरें – इन्हें अंग्रेजी के (S) से निरूपित किया जाता है। ये लहरें प्रकाश तरंग के समान होती हैं। इनमें अणु की गति लहर क समकोण पर होती है। इन्हें द्वितीयक अथवा गौण लहरें भी कहते हैं, क्योंकि ये प्राथमिक सीधी लहर के बाद प्रकट होती हैं। इनकी गति प्राथमिक लहर की अपेक्षा कम होती है। इस लहर को विध्वंसक लहर भी कहते हैं।
  • धरातलीय लहरें – इन्हें अंग्रेजी के (L) से निरूपित किया जाता है। ये लहरें प्राथमिक तथा द्वितीयक लहरों की तुलना में कम वेगवान होती है तथा इनका भ्रमण पथ पृथ्वी का धरातलीय भाग ही होता है। इन्हें दोनों लहरों की तुलना में अधिक लंबा पथ तय करना पड़ता है। इस कारण ये तरंगे धरातल पर सबसे विलंब से पहुँचती है।। इन तरंगों को लंबी अवधि वाली तरंगें भी कहते हैं। ये लहरें जल से होकर गुजर सकती हैं इसलिए इनका प्रभाव जल तथा थल दोनों में होता है, और ये सर्वाधिक विनाशकारी होती हैं।

भूकंप का उदगम केंद्र और अभिकेन्द्र

इसी प्रकार, स्थलमंडलीय प्लेटों के गति करने पर पृथ्वी की सतह पर कंपन होता है। यह कंपन पृथ्वी के चारों ओर गति कर सकता है। इस कंपन को भूकंप कहते ह भू-पर्पटी के नीचे वह स्थान जहाँ कंपन आरंभ होता है, उद्‌गम केंद्र कहलाता है। उद्‌गम केंद्र के भूसतह पर उसके निकटतम स्थान को अधिकेंद्र कहते हैं। अधिकेंद्र से कंपन बाहर की ओर तरंगों के रूप में गमन करती हैं। अधिकेंद्र के निकटतम भाग में सर्वाधिक हानि होती है एवं अधिकेंद्र से दूरी बढ़ने के साथ भूकंप की तीव्रता धीरे-धीरे कम होती जाती है।

स्थलाकृतियाँ

स्थलाकृति की परिभाषाएँ –

(1) बेविल नामक जर्मन विद्वान ने स्थलाकृति की परिभाषा देते हुए यह स्पष्ट किया कि आकाश एवं पृथ्वी के धरातल का वह भाग जो प्रत्यक्ष रूपा से दृष्टिगोचर हो वह स्थलाकति का द्योतक है।

(2) ग्रेनों के अनुसार दृष्टिकोण क्षेत्र को स्थलाकृति के अन्र्तगत माना है। कुछ जर्मन विद्धानों ने भौगोलिक क्षेत्र को स्थलाकृति के रूपा में माना है।

(3) लाउन्टीसेच नामक विद्वान ने अभौतिक तत्वों जैसे, जातिय एवं भाषा सम्बन्धी तत्वों को भी इसके क्षेत्र के अन्तर्गत सम्मिलित किया है।

(4) मेउल नामक विद्वान ने स्थलाकति के अंतर्गत राजनीतिक तत्वों को भी सम्मिलित किया है तथा यह स्पष्ट किया कि कोई भी राजनीतिक इकाई क्यों न हो परन्तु उसका प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष सम्बन्ध उस प्रदेश की स्थलाकृति से आंका जा सकता है।

(5) क्रीव ने भमि एवं स्थलाकति में विभिन्नता व्यक्त करते हुए यह स्पष्ट किया कि स्थलाकृति में भूमि के वे भाग है जिनमें एक समान विशेषताएँ लक्षित होते हैं।

नदी

 नदी के जल से दृश्य भूमि का अपरदन होता है। जब नदी किसी खड़े ढाल वाले स्थान से अत्यधिक कठोर शैल या खड़े ढाल वाली घाटी में गिरती है, तो यह जलप्रपात बनाती है।

जब नदी मैदानों क्षेत्र में प्रवेश करती है, तो वह मोड़दार मार्ग पर बहने लगती है जिसे विसर्प कहते है।

इसके बाद विसर्पों के किनारों पर लगातार अपरदन एवं निक्षेपण शुरू हो जाता है। विसर्प लूप के सिरे निकट आते जाते है। समय के साथ विसर्प लूप से नदी से कट एक अलग झील बनाते है जिसे चापझील भी कहते है।

कभी-कभी नदी अपने तटों से बाहर बहने लगती है जिसे निकटवर्ती क्षेत्रों में बाढ़ आ जाती है। नदी के उत्थित तटों को तटबंध कहते हैं।

नदी अमल धाराओं में विभाजित हो जाती है, जिनको वितरिका खा जाता है। नदी अपने साथ मलबे का निक्षेपण करती हुई मुहानों के अवसादों के सग्रंह से डेल्टा का निर्माण करती है।

समुद्री तरंग के अपरदन एवं निक्षेपण तटीय स्थलाकृतियाँ बनाते हैं। समुद्री तरंगे लगातार शैलों से टकराती रहती हैं, जिसे दरार विकसित होती है।

समय के साथ बड़ी और चौड़ी होती जाती हैं, इनको समुद्री गुफा कहते हैं। इन गुफाओं के बड़े होते जाने पर इनमें केवल छत ही बचती है, जिससे तटीय मेहराब बनते हैं। लगातार अपरदन छत को भी तोड़ देता है जिसे केवल दीवारें बचती जिसे स्टैक कहते हैं।

समुद्री जल के ऊपर लगभग ऊध्वर्रधर उठे हुए ऊँचे तटों को भी समुद्र भृगु कहते हैं।

हिमनद

हिमनद अथवा हिमानी बर्फ़ की नदियाँ होती है। छोटे-बड़े शैल, रेत, एवं तलछट मिट्टी निक्षेपित होते हैं। ये निक्षेपण हिमनद हिमोढ़ का निर्माण करते हैं।

पवन

रेगिस्तान में पवन, अपरदन एवं निक्षेपण का प्रमुख कारक है। रेगिस्तान आप छत्रक के आकार के शैल देख सकते है, जिन्हे सामान्यत: छत्रक शैल कहते है।

पवन चलने से रेत को एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुँचाती है। जब पवन का बहाव रुकता है तो यह रेट गिरकर छोटी पहाड़ी बनाती है। इनको बालू डिब्बा का हैं।

जब ये बालू कण विस्तृत क्षेत्र में निक्षेपित हो जाते है, तो इसे लोएस कहते हैं।

NCERT SOLUTIONS

प्रश्न (पृष्ठ संख्या 17- 18)

प्रश्न 1 निम्न प्रश्नों के उत्तर दीजिए:

  1. प्लेटें क्यों घूमती है ?
  2. बहिर्जनिक एवं अंतर्जनित बल क्या है ?
  3. अपरदन क्या है ?
  4. बाढ़कृत मैदान का निर्माण कैसे होता है ?
  5. बालू टिब्बा क्या है ?
  6. समुद्री पुलिन का निर्माण कैसे होता है?
  7. चापझील क्या है ?

उत्तर –

  1. स्थलमंडल अनेक प्लेटों में विभाजित है, जिन्हें स्थलमंडलीय प्लेट कहते हैं। ये प्लेट हमेशा धीमी गति से चारों तरफ घूमती रहती हैं। प्रत्येक वर्ष केवल कुछ मिलीमीटर के लगभग पृथ्वी के अंदर पिघले हुए मैग्मा में होने वाली गति के कारण ऐसा होता है। पृथ्वी के अंदर पिघला हुआ मैग्मा एक वृत्तीय रूप में घूमता रहता है।
  2. पृथ्वी की गति को उन बलों के आधार पर विभाजित किया गया है जिनके कारण ये गतियाँ उत्पन्न होती हैं । जो बल पृथ्वी के आंतरिक भाग में घटित होते हैं उन्हें अंतर्जनित बल (एंडोजेनिक फोर्स) कहते हैं एवं जो बल पृथ्वी की सतह पर उत्पन्न होते हैं उन्हें बहिर्जनिक बल (एक्सोजेनिक फोर्स) कहते हैं। अंतजर्नित बल कभी आकस्मिक गति उत्पन्न करते हैं, तो कभी धीमी गति।
  3. अपक्षय एवं अपरदन नामक दो प्रक्रमों द्वारा दृश्यभूमि लगातार विघटित होती रहती है। पृथ्वी की सतह पर शैलों के टूटने से अपक्षय की क्रिया होती है। भू – दृश्य पर जल, पवन एवं हिम जैसे विभिन्न घटकों के द्वारा होने वाले क्षय को अपरदन कहते हैं। वायु, जल आदि अपरदित पदार्थ को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाते हैं और फलस्वरूप एक स्थान पर निक्षेपित करते हैं।
  4. कभी- कभी नदी अपने तटों से बाहर बहने लगती है। फलस्वरूप निकटवर्ती क्षेत्रों में बाढ़ आ जाती है। बाढ़ के कारण नदी के तटों के निकटवर्ती क्षेत्रों में महीन मिट्टी एवं निक्षेपण करती है। ऐसी मिट्टी एवं पदार्थों को अवसाद कहते हैं, इससे समतल उपजाऊ बाढकृत मैदान का निर्माण होता है।
  5. पवन चलने पर, यह अपने साथ रेत को एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुँचाती है। जब पवन का बहाव रुकता है तो यह रेत गिरकर छोटी पहाड़ी बनाती है इनको बालू टिब्बा कहते है। जब बालू कण महीन एवं हल्के होते हैं,  तो वायु उनको उठाकर अत्यधिक दूर ले जा सकती है। जब ये बालू कण विस्तृत क्षेत्र में निक्षेपित हो जाते , तो इसे लोएस कहते हैं ।
  6. समुद्री तरंगे (लहरें) किनारों पर अवसाद जमा करती रहती हैं। इन अवसादों के जमा होने से समुद्री पुलिन का निर्माण होता है।
  7. जब नदी मैदानी क्षेत्र में प्रवेश करती है, तो वह मोड़दार मार्ग पर बहने लगती है। नदी के इन्हीं बड़े मोड़ों को विसर्प कहते हैं। इसके बाद विसर्पो के किनारों पर लगातार अपरदन एवं निक्षेपण शुरू हो जाता है। विसर्प लूप के सिरे निकट आते जाते हैं। समय के साथ विसर्प लूप नदी से कट जाते हैं और एक अलग झील बनाते हैं, जिसे चापझील कहते हैं।

प्रश्न 2 सही (√) उत्तर चिह्नित कीजिए:-

1. इनमें से कौन–सी समुद्री तरंग की विशेषता नहीं है ?

(i)  शैल  (ii) किनारा  (iii)  समुद्री गुफा

2. इनमें से कौन–सी समुद्री तरंग की विशेषता नहीं है ?

(i)  शैल  (ii) किनारा (iii)  समुद्री गुफा

3. पृथ्वी की आकस्मिक गतियों के कारण कौन – सी घटना होती है ?

(i) ज्वालामुखी    (ii) वलन (iii)  बाढ़कृत मैदान

4. छत्रक शैलें पाई जाती है

(i) रगिस्तान में    (ii) नदी घाटी में   (iii) हिमनद में

5. चापझील कहाँ पाई जाती हैं

(i) हिमनद  (ii)  नदी घाटी  (iii ) रेगिस्तान

उत्तर –

  1. (i) शैल
  2. (iii)  हिमोढ़
  3. (i) ज्वालामुखी
  4. (i)  रेगिस्तान में
  5. (ii) नदी घाटी

प्रश्न 3 निम्नलिखित स्तंभों को मिलाकर सही जोड़े बनाइए:-

उत्तर –

प्रश्न 4 कारण बताइए :-

  1. कुछ शैल छत्रक के आकार में होते हैं।
  2. बाढ़कृत मैदान बहुत उपजाऊ होते हैं।
  3. समुद्री गुफा स्टैक के रूप में परिवर्तित हो जाती है।
  4. भूकंप के दौरान इमारतें गिरती हैं।

उत्तर –

  1. बहती हुई पवन में रेत के कण निचले भाग अर्थात पृथ्वी के सतह के साथ उड़ते है। ये कण रास्ते में आने वाली चट्टान का अपरदन करते हैं। इसलिए पवन के रास्ते में आने वाली शैल के निचले भाग का अपरदन ज्यादा होता है और शैल छतरी के आकार की होती है। इसे छत्रक शैल कहते है।
  2. बाढ़ के कारण नदी के तटवर्ती भागों में महीन मिट्टी एवं अन्य पदार्थों का निक्षेपण होता है । इन्हें अवसाद कहते हैं । इन अवसादों से बनी मिट्टी बहुत उपजाऊ होती है । इसलिए बाढ़कृत मैदान बहुत उपजाऊ होते हैं ।
  3. समुद्री गुफा स्टैक के रूप में परिवर्तित हो जाती है। समुद्री गुफाओं के बड़े होते जाने पर इनमें केवल छत ही बची रह जाती है। लगातार अपरदन होते रहने से छत भी टूट जाती है। केवल दीवार बची रह जाती है। इस बची दीवार को स्टैक कहते हैं।
  4. भूकंप के दौरान इमारतें गिरती हैं। भूकंप के समय भूकंपीय तरंगे केंद्र से बाहर की ओर गमन करती हैं। इन तरंगों के कंपन से इमारतें काँपने लगती हैं और गिरने लगती हैं ।

प्रश्न 5 नीचे दिए गए चित्रों को देखें। यह नदी द्वारा निर्मित स्थलाकृतियाँ है। इन्हें पहचानिए एवं बताइए कि ये नदी के अपरदन एवं निक्षेपण अथवा दोनों का परिणाम है।

उत्तर –

  • पहले चित्र की स्थलाकृति जल प्रपात है अथवा अपरदन का प्रकार है।
  • दूसरा चित्र की स्थलाकृति नदी विसर्प है अथवा अपरदन एवं निक्षेपण का प्रकार है।
  • तीसरे चित्र की स्थलाकृति मैदान है अथवा निक्षेपण का प्रकार है

Class 7 भूगोल – अध्याय-2: हमारी पृथ्वी के अंदर

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Shape, circle

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पृथ्वी का आंतरिक भाग

पृथ्वी की आकृति लध्वक्ष गोलाभ (Oblate spheroid) के समान है। यह लगभग गोलाकार है जो ध्रुवों  पर थोड़ा चपटी है। पृथ्वी पर सबसे उच्चतम बिंदु माउंट एवरेस्ट है जिसकी ऊँचाई 8848 मी. है। दूसरी ओर सबसे निम्नतम बिंदु प्रशांत महासागर में स्थित मारियाना खाई है जिसकी समुद्री स्तर से गहराई 10,911 मी. है। पृथ्वी की आंतरिक संरचना कई स्तरों में विभाजित है। पृथ्वी की आंतरिक संरचना के तीन प्रधान अंग हैं- ऊपरी सतह भूपर्पटी (Crust), मध्य स्तर मैंटल (mantle) और आंतरिक स्तर धात्विक क्रोड (Core)। पृथ्वी के कुल आयतन का 0.5% भाग भूपर्पटी का है जबकि 83% भाग में मैंटल विस्तृत है। शेष 16% भाग क्रोड है।

भूपर्पटी:- भूपर्पटी अथवा क्रस्ट की मोटाई 8 से 40 किमी. तक मानी जाती है। इस परत की निचली सीमा को मोहोरोविसिक असंबद्धता या मोहो असंबद्धता कहा जाता है। पृथ्वी पर महासागर और महाद्वीप केवल इसी भाग में स्थित हैं।

मैंटल:- मैंटल की मोटाई लगभग 2895 किमी. है। यह अद्र्ध-ठोस अवस्था में है। एक संक्रमण परत जो मैंटल को क्रोड या कोर से विभक्त करती है उसे गुटेनबर्ग असंबद्धता कहते हैं।

क्रोड:- बाह्म्तम क्रोड की विशेषता यह है कि यह तरल अवस्था में है जबकि आंतरिक क्रोड का पदार्थ ठोस पदार्थ की भांति व्यवहार करता है। इसकी त्रिज्या लगभग 1255 किमी. है। आंतरिक क्रोड के घूर्णन का कोणीय वेग पृथ्वी के कोणीय वेग से थोड़ा अधिक होता है।

पृथ्वी का निर्माण आयरन (32.1 फीसदी), ऑक्सीजन (30.1 फीसदी), सिलिकॉन (15.1 फीसदी), मैग्नीशियम (13.9 फीसदी), सल्फर (2.9 फीसदी), निकिल (1.8 फीसदी), कैलसियम (1.5 फीसदी) और अलम्युनियम (1.4 फीसदी) से हुआ है। इसके अतिरिक्त लगभग 1.2 फीसदी अन्य तत्वों का भी योगदान है। क्रोड का निर्माण लगभग 88.8 फीसदी आयरन से हुआ है। भूरसायनशास्त्री एफ. डल्ब्यू. क्लार्क के अनुसार पृथ्वी की भूपर्पटी में लगभग 47 फीसदी ऑक्सीजन है।

पृथ्वी की आंतरिक परतें

गहराई (किमी.)परत
0-35भूपर्पटी या क्रस्ट
35-60ऊपरी भूपर्पटी
35-2890मैंटल
2890-5100बाहरी क्रोड
5100-6378आंतरिक क्रोड

प्लेट टेक्टोनिक्स

महाद्वीपों और महासागरों के वितरण को स्पष्ट करने के लिए यह सबसे नवीन सिद्धांत है। इस सिद्धांत के अनुसार स्थलमंडल कई दृढ़ प्लेटों के रूप में विभाजित है। ये प्लेटें स्थलमंडल के नीचे स्थित दुर्बलतामंडल के ऊपर तैर रही हैं। इस सिद्धांत के अनुसार भूगर्भ में उत्पन्न ऊष्मीय संवहनीय धाराओं के प्रभाव के अंतर्गत महाद्वीपीय और महासागरीय प्लेटें विभिन्न दिशाओं में विस्थापित होती रहती हैं। स्थलमंडलीय प्लेटों के इस संचलन को महाद्वीपों तथा महासागरों के वर्तमान वितरण के लिए उत्तरदायी माना जाता है। जहां दो प्लेटें विपरीत दिशाओं में अपसरित होती हैं उन किनारों को रचनात्मक प्लेट किनारा या अपसारी सीमांत कहते हैं। जब दो प्लेटें आमने-सामने अभिसरित होती हैं तो इन्हें विनाशशील प्लेट किनारे अथवा अभिसारी सीमांत कहते हैं।

सबसे पुरानी महासागरीय भूपर्पटी पश्चिमी प्रशांत में स्थित है। इसकी अनुमानित आयु 20 करोड़ वर्ष है। अन्य प्रमुख प्लेटों में भारतीय प्लेट, अरब प्लेट, कैरेबियाई प्लेट, दक्षिणी अमेरिका के पश्चिमी तट पर स्थित नाज्का प्लेट और दक्षिणी अटलांटिक महासागर की स्कॉटिया प्लेट शामिल हैं। लगभग 5 से 5.5 करोड़ वर्ष पूर्व भारतीय व ऑस्ट्रेलियाई प्लेटें एक थी।

पृथ्वी के आयतन का केवल 1% हिस्सा ही पर्पटी है। 84% मेंटल एंव 15% हिस्सा क्रोड है । पृथ्वी की त्रिज्या 6371 किलोमीटर है।

शैल

भूपर्पटी की संरचना जिन तत्वों से हुई है। उन्हें शैल या चट्टान कहते हैं। यह अनेक खनिज एवं लवणों लवणों का मिश्रण होती हैं। इस प्रकार भूपर्पटी का निर्माण विभिन्न प्रकार की सालों सालों से हुआ है शैलो की रचना में फेलस्पार, क्वार्ट्ज, अभ्रक के सिलिकेट खनिजों का अधिक मिलता है।

शैल की परिभाषा

आर्थर होम्स के अनुसार शैल की परिभाषा

“शैले विभिन्न प्रकार के खनिज पदार्थों का मिश्रण होती हैं। कुछ शैले एक ही खनिज के योग से मिलकर बनती हैं। जबकि अधिकांश का निर्माण एक से अधिक खनिजों के योग से होता है ।वह चाहे चीका की भांति मुलायम हो अथवा ग्रेनाइट की भांति कठोर हो शैल कहलाती हैं।”

शैल के प्रकार

उत्पत्ति के आधार पर शैल के तीन प्रकार होते है।

  1. आग्नेय शैल।
  2. अवसादी शैल।
  3. कायान्तरित शैल।

आग्नेय शैल –

जो चट्टाने पिघले चट्टानी पदार्थों के ठंडे होने से ठोस हो गई हैं, आग्नेय शैल कहलाती हैं। भू पृष्ठ पर पाई जाने वाली शैलो में आग्नेय शैल प्राचीनतम शैले हैं। इन शैलो को प्राथमिक सेल भी कहा जाता है, क्योंकि अन्य शैलो की उत्पत्ति इन्हीं के कारण होती है। भूगर्भ का तरल एवं तप्त मैग्मा या लावा भूपृष्ठ पर पहुंचकर ठंडा होने से रवेदार कणों के रूप में जमकर आग्नेय शैल का रूप धारण करता है। आग्नेय शैल के उत्तम उदाहरण बैसाल्ट और ग्रेनाइट हैं।

अवसादी शैल –

अवसादी शैलो का निर्माण तलछट के जमाव से होता है। जिसका जमाव सागरों एवं झीलों की तली में होता है। अवसादो में बजरी, बालू ,चूना ,कीचड़ ,गाद और चिकनी मिट्टी के कण मिले रहते हैं। इसका निक्षेपण कणों के आधार और भार के अनुरूप होता है। अर्थात भारी कण नीचे की ओर तथा हल्के कण ऊपर की ओर निक्षेपित हो जाते हैं। अवसाद की परतों से नीचे होने के कारण ही इन्हें परतदार शैल भी कहा जाता है। भू पृष्ठ पर अवसादी शैलो का विस्तार सबसे अधिक मिलता है।चूना पत्थर और बलुआ पत्थर अवसादी शैल के प्रमुख उदाहरण है

कायान्तरित शैल –

कायांतरण शब्द अँग्रेजी भाषा के मेटामॉरफिक शब्द का हिंदी अनुवाद हैं। इन शैलो का निर्माणा आग्नेय एवं परत दार शैलो के रूप परिवर्तन के कारण होता है।इसलिए इन्हें कायांतरित शैल या रूपांतरित शैल कहा जाता है। कभी-कभी कायांतरित शैल का पुनः कायांतरण हो जाता है। कायांतरण के समय मूल शैल की प्रकृति बदल जाती है इस प्रक्रिया में पुराने खनिज नया रूप धारण कर लेते हैं। जिससे नवीन खनिजों का निर्माण हो जाता है। शैलो में रवे बन जाते हैं।तथा पूर्व निर्मित रवो का रूप भी बदल सकता है संगमरमर महत्वपूर्ण कायांतरित शैल है ।जिसकी रचना चूना पत्थर के कायांतरण से हुई है ।बलुआ पत्थर का कायांतरण क्वार्टजाइट में होता है।

शैल चक्र

शैल चक्र का संबंध चट्टानों के स्वरूपीय परिवर्तन से है। शैलें अपने मूल रूप में अधिक समय तक नहीं रहती हैं, बल्कि इनमें परिवर्तन होता रहता है।

शैल चक्र एक सतत् प्रक्रिया है, जिसमें पुरानी शैलें परिवर्तित होकर नवीन रूप लेती हैं।
आग्नेय शैलें प्राथमिक शैलें हैं तथा अन्य (अवसादी एवं कायांतरित) शैलें इन प्राथमिक शैलों से निर्मित होती हैं। आग्नेय शैलों के अनाच्छादन के फलस्वरूप अवसादी शैलों का तथा अत्यधिक ताप व दाब के फलस्वरूप कायांतरित शैलों का निर्माण होता है।
आग्नेय एवं कायांतरित शैलों से प्राप्त अंशों से अवसादी शैलों का निर्माण होता है। अवसादी शैलें अपखंडों में परिवर्तित हो सकती हैं तथा ये अपखंड अवसादी शैलों के निर्माण का एक स्रोत हो सकते हैं। निर्मित भूपृष्ठीय शैलें (आग्नेय, कायांतरित एवं अवसादी) प्रत्यावर्तन के द्वारा पृथ्वी के आंतरिक भाग में नीचे की ओर जा सकती हैं तथा पृथ्वी के आंतरिक भाग में तापमान बढ़ने के कारण ये शैलें पिघलकर मैग्मा में परिवर्तित हो जाते हैं। यही मैग्मा सभी शैलों का मूल स्रोत हैं।

जीवाश्म

शब्द ‘जीवाश्म’ को प्राचीन जीवन के अवशेषों या लेश तत्वों के रूप में परिभाषित किया जा सकता है जो प्राकृतिक प्रक्रियाओं द्वारा अवसादी शैलों में परिरक्षित हो गए।

  • जीवाश्म प्राचीन जीवन के एक मात्र प्रत्यक्ष प्रमाण को प्रदर्शित करते हैं। ये जीवों के परिरक्षित कंकालों, अस्थियों और कवचों के रूप में पाए जा सकते हैं अथवा व्यवहारगत् क्रियाकलापों जैसे जीवों के पथों ( tracks), पथचिन्हों (trails) और पदचिन्हों (foot prints) की परिरक्षित छापों के रूप में भी पाए जा सकते हैं। 
  • जीवाश्म शब्द सामान्यतः उन जीवों के अवशेषो के लिए सीमित है जो हजारों करोड़ वर्ष पूर्व मर गए थे। ये व्यापक रूप से स्वीकृत है कि शैलों में पाए गए 10,000 वर्ष पूर्व के अवशेष को भी जीवाश्म कहा जा सकता है। 
  • लेकिन 10,000 वर्ष से कम के जैविक अवशेष और जो आज भी जीवाश्मीभवन की प्रक्रिया में है, उन्हें उपजीवाश्म (subfossil) कहते हैं

 जीवाश्म का आकार (साइज) 

  • जीवाश्म विभिन्न साइज के होते हैं। ये एक माइक्रोमीटर व्यास के सूक्ष्मजीवी जीवाणुओं से लेकर विशालकाय डाइनोसॉर अथवा वृक्ष के अनेक मीटर लंबे जीवाश्म तनों तक के हो सकते हैं।
  • आपने पेट्रोलियम, कोयला और प्राकृतिक गैस के विषय में सुना होगा ये सभी ऊर्जा के गैर- नवीकरणीय (non-renewable) स्रोत हैं और यह सामूहिक रूप से जीवाश्मी ईंधन (fossil fuels) कहलाते हैं। जीवाश्मी ईंधन भी प्राचीन जीवों के जैविक अवशेषों से बनते हैं। इनमें कार्बन और हाइड्रोजन का उच्च प्रतिशत रहता है और इसलिए ये सामान्यतः ईंधन के रूप में प्रयोग किए जाते हैं। इन्हें जीवाश्म नहीं माना जाता है क्योंकि ये पूर्व जीवन के विषय में बहुत कम या कोई जानकारी प्रदान नही करते हैं। कभी-कभी कोयले में प्राचीन पादपों की परिरक्षित तने, पत्तियां, जड़े और कोशिकाएं निहित होती है, जिनकी एक निश्चित स्तर तक पहचान की जा सकती है।

जीवाश्मों के प्रकार

शैलों की परतों में अनेक प्रकार के जीवाश्म पाए जाते हैं। उनमें से कुछ जैसे देह (body) और अनुरेख (trace) जीवाश्म अधिक सामान्य हैं जबकि अन्य जीवाश्म कम सामान्य हैं। परिरक्षण की विधियाँ, साइज और उपयोगों के आधार पर जीवाश्मों को सामान्यरूप से अनेक प्रकारों में वर्गीकृत किया गया है।

 परिरक्षण की विधियाँ के आधार पर

  • देह जीवाश्म 
  • अनुरेख जीवाश्म
  • रासायनिक जीवाश्म
  • कूट जीवाश्म

साइज के आधार पर

  • स्थूल जीवाश्म 
  • सूक्ष्म जीवाश्म 
  • परासूक्ष्म जीवाश्म

उपयोगों के आधार पर

  • सूचक जीवाश्म 
  • जीवित जीवाश्म

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प्रश्न (पृष्ठ संख्या 10)

प्रश्न 1 निम्न प्रश्नों के उत्तर दीजिए:-

  1. पृथ्वी की तीन परतें क्या हैं ?
  2. शैल क्या है ?
  3. तीन प्रकार की शैलों के नाम लिखें।
  4. बहिर्भेदी एवं अंतर्भदी शैल का निर्माण कैसे होता है ?
  5. शैल चक्र से आप क्या समझते है ?
  6. शैलों के क्या उपयोग है ?
  7. कायांतरित शैल क्या हैं ?

उत्तर –

  1. एक प्याज की तरह पृथ्वी भी एक के ऊपर एक संकेंद्री परतों से बनी हैI पृथ्वी की सतह की सबसे ऊपरी परत को पर्पटी कहते हैं। यह सबसे पतली परत होती है। यह महाद्वीपीय संहति में 35 किलोमीटर एवं समुद्री सतह में केवल 5 किलोमीटर तक महाद्वीपीय संहति मुख्य रूप से सिलिका एवं ऐलुमिना जैसे खनिजों से बनी है। इसलिए इसे सिएल (सि – सिलिका तथा एल – एलुमिना) कहा जाता है। पर्पटी के ठीक नीचे मैंटल होता है जो 2900 किलोमीटर की गहराई तक फैला होता है। इसकी सबसे आतरिक परत क्रोड है जिसकी त्रिज्या लगभग 3500 किलामीटर है,  यह मुख्यतः निकल एवं लोहे की बनी होती है तथा इसे निफे (नि – निकिल तथा फे – फैरस) कहते हैं ।
  2. पृथ्वी की पर्पटी अनेक प्रकार के शैलों से बनी है। पृथ्वी की पर्पटी बनाने वाले खनिज पदार्थ के किसी भी प्राकृतिक पिंड को शैल कहते हैं। शैल विभिन्न रंग, आकार एवं गठन की हो सकती हैं।  
  3. आग्नेय (इग्नियस) शैल, अवसादी (सेडिमेंट्री) शैल एवं कायांतरित (मेटामॉरफिक) शैल।
  4. आग्नेय शैल दो प्रकार की होती  है :- अंतर्भेदी शैल एवं बर्हिभेदी शैल। वास्तव में आग की तरह लाल द्रवित्त मैग्मा ही लावा है जो पृथ्वी के आंतरिक भाग से निकलकर सतह पर आता है। जब द्रवित लावा पृथ्वी की सतह पर आता है, वह तेजी से ठंडा होकर ठोस बन जाता है। इस प्रकार बहिर्भेदी शैल का निर्माण होता है। इनकी संरचना बहुत महीन दानों वाली होती है उदाहरण के लिए – बेसाल्ट। द्रवित मैग्मा कभी – कभी भू – पर्पटी के अंदर गहराई में ही ठंडा हो जाता है। इस प्रकार अंतर्भेदी शैल का निर्माण होता है। धीरे – धीरे ठंडा होने के कारण ये बड़े दानों का रूप ले लेते हैं। ग्रेनाइट ऐसे ही शैल का एक उदाहरण है।
  5. किन्हीं निश्चित दशाओं में एक प्रकार की शैल चक्रीय तरीके से एक – दूसरे में परिवर्तित हो जाते हैं। एक शैल से दूसरे शैल में परिवर्तन होने की इस प्रक्रिया को शैल चक्र कहते हैं ।

द्रवित मैग्मा ठंडा होकर ठोस आग्नेय शैल बन जाता है । ये आग्नेय शैल छोटे – छोटे टुकड़ों में टूटकर एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानांतरित होकर अवसादी शैल का निर्माण करते हैं । ताप एवं दाब के कारण ये आग्नेय एवं अवसादी शैल कायांतरित शैल में बदल जाते हैं । अत्यधिक ताप एवं दाब के कारण कायांतरित शैल पुनः पिघलकर द्रवित मैग्मा बन जाती है । यह द्रवित मैग्मा पुनः ठंडा होकर ठोस आग्नेय शैल में परिवर्तित हो जाता है।

  1. शैल विभिन्न खनिजों से बनी होती हैं। खनिज मानव जाति के लिए बहुत महत्त्वपूर्ण हैं। कुछ का उपयोग ईंधन की तरह होता है जैसे – कोयला, प्राकृतिक गैस एवं पेट्रोलियम। इनका उपयोग उद्योगों, औषधि एवं उर्वरक में भी होता है जैसे – लोहा, एल्यूमिनियम, सोना, यूरेनियम, आदि। शैल हमारे लिए बहुत उपयोगी हैं। कठोर शैलों का उपयोग सड़क, घर एवं इमारत बनाने के लिए किया जाता है ।
  2. आग्नेय एवं अवसादी शैल उच्च ताप एवं दाब के कारण कायांतरित शैलों में परिवर्तित हो जाती है जिसे कायांतरित शैल कहते है। उदाहरण के लिए:- चिकनी मिट्टी स्लेट में एवं चूना पत्थर संगमरमर में परिवर्तित हो जाता है।

प्रश्न 2 सही (√) उत्तर चिह्नित कीजिए:-

  1. द्रवित मैग्मा से बने शैल

(i) आग्नेय  (ii) अवसादी  (iii)  कायांतरित

  1. पृथ्वी की सबसे भीतरी परत

(i) पर्पटी    (ii)  क्रोड    (iii) मैंटल

  1. सोना, पेट्रोलियम एवं कोयला किसके उदाहरण हैं

(i) शैल   (ii)  खनिज  (iii)  जीवाश्म

  1. शैल , जिसमें जीवाश्म होते हैं

(i) अवसादी शैल (ii) कायांतरित शैल (iii) आग्नेय शैल 

  1. पृथ्वी की सबसे पतली परत है

(i) पर्पटी    (ii)  मैंटल    (iii)  क्रोड

उत्तर –

  1. (i) आग्नेय
  2. (ii) क्रोड
  3. (ii) खनिज
  4. (i) अवसादी शैल
  5. (i) पर्पटी

प्रश्न 3 निम्नलिखित स्तंभों को मिलाकर सही जोड़े बनाइए:-

उत्तर –

Text

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प्रश्न (पृष्ठ संख्या 11)

प्रश्न 4 कारण बताइए

  1. हम पृथ्वी के केंद्र तक नहीं जा सकते हैं।
  2. अवसादी शैल अवसाद से बनती है।
  3. चूना पत्थर संगमरमर में बदलता है।

उत्तर –

  1. हमारी पृथ्वी एक गतिशील ग्रह है। इसके अंदर एवं बाहर निरंतर परिवर्तन होता रहता है। पृथ्वी के आंतरिक भाग में क्या है ? पृथ्वी किन पदार्थों से बनी है ? और इसके केंद्र तक जाने की भावना भी कई बार उत्पन्न होती है लेकिन पृथ्वी के केंद्र तक पहुंचने के लिए (जो बिलकुल असंभव है) आपको समुद्र की सतह पर 6000 किलोमीटर गहराई तक खोदना होगा।
  2. शैल लुढ़ककर, चटककर तथा एक – दूसरे से टकराकर छोटे – छोटे टुकड़ों में टूट जाती हैं,  इन छोटे कणों को अवसाद कहते हैं। ये अवसाद हवा, जल आदि द्वारा एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुँचाकर, जमा कर दिए जाते हैं। ये अदृढ़ अवसाद दबकर एवं कठोर होकर शैल की परत बनाते हैं। इस प्रकार की शैलों को अवसादी शैल कहते है। उदाहरण के लिए, बलुआ पत्थर रेत के दानों से बनता है। इन शैलों में पौधों, जानवरों एवं अन्य सूक्ष्म जीवाणुओं, जो कभी इन शैलों पर रहे हैं, जीवाश्म भी हो सकते है।
  3. चूना एक अवसादी शैल है इसलिए आग्नेय एवं अवसादी शैलें उच्च ताप एवं दाब के कारण कायोतरित शैलों में परिवर्तित हो जाती हैं। चूना पत्थर के साथ यह क्रिया होने पर वह संगमरमर में बदल जाता है।

प्रश्न 5  आओ खेले :-

  1. निम्न वस्तुओं में उपयोग किए गए खनिजों की पहचान करें।
  2. विभिन्न खनिजों से बनी अन्य कुछ वस्तुओं के चित्र बनाए।

उत्तर –

  1. कढ़ाई का उपयोग सब्जी बनाने में, तवे का उपयोग रोटी सेकने में , आभूषणों का उपयोग स्त्रियां अपनी सुंदरता बनाए रखने में करती है।
  2. एक छोटी सूई से लेकर बड़ी बड़ी इमारते भी खनिज से बनी है।

Class 7 भूगोल (Geography) – अध्याय-1: पर्यावरण

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सामाजिक विज्ञान

(भूगोल)

Shape, circle

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अध्याय-1: पर्यावरण

हमारा पर्यावरण

पर्यावरण हमारे जीवन का मूल आधार है। यह हमें साँस लेने के लिए, पीने के लिए जल, खाने के लिए भोजन एवं रहने के लिए भूमि प्रदान करता है।

प्रत्येक जीवित जीव पर्यावरण से घिरा हुआ है। जीवों को घेरने वाले स्थान, प्रकृति या चीजें उनके पर्यावरण के रूप में जानी जाती हैं।

पर्यावरण में प्राकृतिक और मानव निर्मित वातावरण होते हैं। प्राकृतिक पर्यावरण को आगे जैविक और अजैविक वातावरण में विभाजित किया जा सकता है। मानव निर्मित पर्यावरण से तात्पर्य मानवों के बीच कृतियों (जैसे भवन, बस आदि), गतिविधियों और परस्पर क्रियाओं से है।

प्राकृतिक पर्यावरण

प्राकृतिक पर्यावरण का तात्पर्य जैविक और अजैविक दोनों प्रकार के वातावरण से है।

जैविक पर्यावरण: इसमें सभी जीवित जीव जैसे पौधे, जानवर, मनुष्य आदि शामिल हैं।

अजैविक पर्यावरण: इसमें सभी निर्जीव चीजें जैसे भूमि, समुद्र आदि शामिल हैं।

पर्यावरण का अस्तित्व आवश्यक है क्योंकि यह विभिन्न जीवों को जीवन प्रदान करता है। इसमें वह हवा होती है जिसमें हम सांस लेते हैं, जो पानी हम पीते हैं, जो खाना हम खाते हैं और जिस जमीन पर हम रहते हैं। मनुष्य ने पर्यावरण को काफी हद तक बदल दिया है या बदल दिया है। यह सड़कों, भवनों, बांधों, उद्योगों, कारों आदि का निर्माण करके किया गया है।

प्राकृतिक पर्यावरण में भूमि, जल, पौधे, पशु और वायु शामिल हैं। प्राकृतिक पर्यावरण को आगे स्थलमंडल, जलमंडल, वायुमंडल और जीवमंडल में विभाजित किया जा सकता है।

पृथ्वी के चार प्रमुख मंडल : वायुमंडल, जलमंडल, स्थलमंडल, जीवमंडल

स्थलमंडल:

• यह पृथ्वी की सबसे ऊपरी कठोर परत है जो मिट्टी की एक पतली परत से ढकी होती है।

• यह चट्टानों और खनिजों से बना है।

• पृथ्वी का स्थलमंडल असमान है क्योंकि इसमें कई भू-आकृतियाँ हैं जैसे पहाड़, पठार, घाटियाँ और मैदान।

• पृथ्वी के इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर वन, घास के मैदान और भूमि है। वन हमें लकड़ी, भोजन, ईंधन और चारा प्रदान करते हैं। घास के मैदानों का उपयोग चराई के लिए किया जाता है जबकि भूमि का उपयोग खेती और मानव बस्तियों के निर्माण के लिए किया जाता है।

जलमंडल :

• पृथ्वी का वह क्षेत्र जिसमें जल होता है, जलमंडल के नाम से जाना जाता है।

• जलमंडल में विभिन्न जल निकाय जैसे महासागर, नदियाँ, झीलें आदि शामिल हैं।

• यह क्षेत्र महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सभी जीवित जीवों के लिए पानी का स्रोत है।

पृथ्वी का जलमंडल: उद्भव एवं विकास | Hindi Water Portal

जलमंडल

वायुमंडल :

• वायुमंडल हवा की एक पतली परत है जो पृथ्वी को घेरे रहती है। पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण खिंचाव पृथ्वी के चारों ओर वायुमंडल को धारण करता है।

• वातावरण एक कंबल के रूप में कार्य करता है और सूर्य की हानिकारक किरणों और अत्यधिक गर्मी से हमारी रक्षा करता है।

• वातावरण में विभिन्न गैसें, धूल और जलवाष्प शामिल हैं।

Vayumandal Ki Parte - वायुमण्डल की परतें

जीवमंडल :

• पादप और जंतु जगत मिलकर जीवमंडल का निर्माण करते हैं। इसलिए जीवमंडल जीवन का समर्थन करता है।

• यह पृथ्वी का एक संकीर्ण क्षेत्र है जहाँ भूमि, जल और वायु एक दूसरे के साथ परस्पर क्रिया करते हैं।

जीवमंडल परिभाषा क्या है - jeev mandal kya hai - Rexgin

पारितंत्र

पेड़-पौधे जिव जंतु एवं मानव अपने आस-पास के पर्यावरण पर आश्रित होते है प्रया : वे एक दूसरे पर भी आश्रति हैं जीवधरियो का आपसी एवं अपने आस-पास के पर्यावरण के बीच का संबंध ही परितंत्र का निर्माण करता है।

वन, घासस्थल, रेगिस्तान, पर्वत, झील, नदी, महासागर परितंत्र के उदाहरण है।

मानव पर्यावरण

• मनुष्य पर्यावरण के साथ रहते हैं और तालमेल बनाए रखते है। वे इसे अपनी आवश्यकताओं के अनुसार बदलते या परिवर्तित करते हैं।

• मनुष्य अपने आसपास मौजूद पर्यावरण से अपनी सभी जरूरतों को पूरा करता है।

• मानव की जरूरतें और जरूरतें समय के साथ बदलती रहती हैं। पहले मनुष्य ने पहिये का आविष्कार किया और माल को विभिन्न स्थानों पर पहुँचाया। इससे व्यापारिक गतिविधियों के विकास में मदद मिली। इसके बाद औद्योगिक क्रांति ने बड़े पैमाने पर माल के उत्पादन को और बढ़ाया।

• मनुष्यों ने खेती, मकान बनाने, सड़कें, उद्योग आदि के लिए भूमि साफ करके पर्यावरण को भी बदला या संशोधित किया है।

• मनुष्य न केवल अपनी आवश्यकताओं के अनुसार पर्यावरण को बदलता है बल्कि पर्यावरण के अनुसार स्वयं को भी बदलता है। उदाहरण के लिए, तरबूज का सेवन आमतौर पर गर्मियों में शरीर के तापमान को कम रखने के लिए किया जाता है।

• हालांकि, मनुष्यों द्वारा पर्यावरण में बहुत अधिक परिवर्तन इसे नुकसान पहुंचा सकते हैं। वनों की कटाई, खनिज संसाधनों का तेजी से समाप्त होना आदि पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहे हैं। हमें अपने पर्यावरण को शांतिपूर्ण तरीके से जीना और उपयोग करना चाहिए।

Deforestation - Causes, Effects and Solutions To Clearing of Forests -  Conserve Energy Future

मनुष्यों द्वारा अपनी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए

तेजी से वनों की कटाई पर्यावरण के लिए हानिकारक है

NCERT SOLUTIONS

प्रश्न (पृष्ठ संख्या 6)

प्रश्न 1 निम्न प्रश्नों के उत्तर दीजिए:-

  1. पारितंत्र क्या है ?
  2. प्राकृतिक पर्यावरण से आप क्या समझते है ?
  3. पर्यावरण के प्रमुख घटक कौन – कौन से हैं ?
  4. मानव – निर्मित पर्यावरण के चार उदाहरण दीजिए।
  5. स्थलमंडल क्या है ?
  6. जीवीय पर्यावरण के दो प्रमुख घटक क्या हैं ?
  7. जैवमंडल क्या है ?

उत्तर –

  1. वह तंत्र जिसमें समस्त जीवधारी आपस में एक – दूसरे के साथ तथा पर्यावरण के उन भौतिक एवं रासायनिक कारकों के साथ परस्पर क्रिया करते हैं जिसमें वे निवास करते है। ये सब ऊर्जा और पदार्थ के स्थानांतरण द्वारा संबद्ध हैं।
  2. वे सभी वस्तुएँ जो हमारी प्रकृति द्वारा उपलब्ध होती है अर्थात भूमि, जल, वायु, पेड़ – पौधे एवं जीव – जंतु सब मिलकर प्राकृतिक पर्यावरण बनाते है। प्राकृतिक पर्यावरण से तात्पर्य यह है कि पृथ्वी पर जैविक और अजैविक कारको का विद्यमान होना।
  3. पर्यावरण के प्रमुख घटक मानव, प्राकृतिक और मानव निर्मित है।
  1. मानव निर्मित पर्यावरण से तात्पर्य यह है कि जो मानव द्वारा बनाए गए हो जैसे:- पार्क, ईमारतें, सड़के, पुल, उद्योग, स्मारक आदि मानव द्वारा निर्मित पर्यावरण के उदाहरण है।
  2. पृथ्वी की ठोस पर्पटी या कठोर ऊपरी परत को स्थलमंडल कहते हैं। यह चट्टानों एवं खनिजों से बना होता है एवं मिट्टी की पतली परत से ढका होता है। यह पहाड़, पठार, मैदान, घाटी आदि जैसी विभिन्न स्थलाकृतियों वाला विषम धरातल होता है। ये स्थलाकृतियाँ महाद्वीपों के अलावा महासागर की सतह पर भी पाई जाती है। स्थलमंडल वह क्षेत्र है जो हमें वन, कृषि एवं मानव बस्तियों के लिए भूमि, पशुओं को चलने के लिए घास स्थल प्रदान करता है। यह खनिज संपदा का भी एक स्त्रोत है।
  1. जीवीय पर्यावरण वो कहलाते है जिसमें संसार के सभी सजीव प्राणी आ जाते है जैसे :- पादप एवं जंतु अर्थात पेड़ – पौधे, पशु – पक्षी।
  2. पादप एवं जीव – जंतु मिलकर जैवमंडल और सजीव संसार का निर्माण करते है। यह पृथ्वी का वह संकीर्ण क्षेत्र है जहाँ स्थल, जल एवं वायु मिलकर जीवन को संभव बनाते है।

प्रश्न 2 सही (√)  उत्तर चिह्नित कीजिए :-

1. इनमें से कौन – सा प्राकृतिक परितंत्र नहीं है ?

(क) मरूस्थल  (ख) ताल  (ग) वन

2. इनमें से कौन – सा मानवीय पर्यावरण का घटक नहीं है ?

(क) स्थल  (ख) धर्म  (ग) समुदाय

3. इनमें से कौन–सा मानव निर्मित पर्यावरण है ?

(क) पहाड़   (ख) समुन्द्र   (ग) सड़क

4. इनमें से कौन – सा पर्यावरण के लिए खतरा है?

(क) पादप – वृद्धि   (ख) जनसंख्या – वृद्धि  (ग) फसल वृद्धि

उत्तर –

  1. (ख) ताल
  2. (क) स्थल
  3. (ग) सड़क
  4. (ख) जनसंख्या वृद्धि

प्रश्न 3 निम्नलिखित स्तम्भों को मिलाकर सही जोड़े बनाइए :-

उत्तर –

Text, letter

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प्रश्न 4 कारण बताइए:-

  1.  मानव अपने पर्यावरण में परिवर्तन करता है।
  2. पौधे एवं जीव – जंतु एक – दूसरे पर आश्रित है।

उत्तर –

  1. पर्यावरण हमारे जीवन का मूल आधार है। यह हमें साँस लेने के लिए हवा, पीने के लिए जल, खाने के लिए भोजन एवं रहने के लिए भूमि प्रदान करता है अर्थात मानव अपनी विभिन्न आवश्यकताओं की पूर्ति पर्यावरण से करता है। कार का धुआँ वायु को प्रदूषित करता है, पानी को पात्र में एकत्रित किया जाता है, भोजन को बर्तनों में परोसा जाता है और भूमि पर कारखानों का निर्माण होता है। मानव कार, मिल, कारखानों एवं बर्तनों का निर्माण करता है, फलस्वरुप अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए मानव अपने पर्यावरण में परिवर्तन करता है।
  2. सभी प्रकार के जीव–जंतु भोजन के लिए प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से पेड़–पौधों पर आश्रित होते है। पेड़–पौधे ऑक्सीजन गैस छोड़ते हैं। यह जीव – जंतुओं के लिए जीवनदायिनी गैस है। ये पर्यावरण को स्वच्छ रखते हैं तथा जंगली जानवरों को आश्रय देते हैं। पशुओं का गोबर तथा मृत व सड़े–गले जानवर पेड़ों के विकास के लिए भूमि को आवश्यक पोषक तत्त्व प्रदान करते हैं। जीवधारियों का आपसी एवं अपने आस–पास के पर्यावरण के बीच का संबंध ही पारितंत्र का निर्माण करते है।

प्रश्न 5 एक आदर्श पर्यावरण की कल्पना कीजिए जिसमें आप रहना चाहेगे। अपने इस आदर्श पर्यावरण का चित्र बनाए।

A picture containing graphical user interface

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उत्तर – पर्यावरण शब्द का निर्माण दो शब्दों परि और आवरण से मिलकर बना है, जिसमें परि का मतलब है हमारे आसपास अर्थात जो हमारे चारों ओर है, और ‘आवरण’ जो हमें चारों ओर से घेरे हुए है। आदर्श पर्यावरण में पेड़, झाड़ियाँ, बगीचा, नदी, झील, हवा इत्यादि शामिल हैं। सभी एक ऐसे आदर्श पर्यावरण की कल्पना करते है जिसमें चारों तरफ हरियाली हो किसी भी प्रकार से कोई जगह,  हवा दूषित ना हो। यह हमें बढ़ने तथा विकसित होने का बेहतर माध्यम देता है, यह हमें वह सब कुछ प्रदान करता है जो इस ग्रह पर जीवन यापन करने हेतु आवश्यक है। हमारा पर्यावरण भी हमसे कुछ मदद की अपेक्षा रखता है जिससे की हमारा लालन पालन हो, हमारा जीवन बने रहे और कभी नष्ट न हो। यह सब तभी मुमकिन है जब हमारा समाज अच्छे से साफ़ सफाई के साथ साथ पर्यावरण को दूषित होने से बचाए। वाहनों से निकलने वाला धुआँ, औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाला धुँआ, आणविक यंत्रों से निकलने वाली गैसें तथा धूल-कण, जंगलों में पेड़ पौधें के जलने से, कोयले के जलने से तथा तेल शोधन कारखानों आदि से निकलने वाला धुआँ तथा किसी भी कार्य के लिए पेड़ों को काट देना। यह सब बंद हो तभी हमारा पर्यावरण एक आदर्श पर्यावरण हो सकता है और हम इसी आदर्श पर्यावरण की कल्पना करते है, जहाँ चारों ओर शांति हो, वायु और पानी प्रदूषित ना हो।

Class 7 Mathematics – CHAPTER 13 : Visualizing Solid shapes

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Visualizing Solid Shapes

Dimensions

  • Dimension is a measurable length along a direction.
  • Dimensions are length, breadth (or width) or height (or depth).
  • A point is dimensionless.
  • Based on the number of dimensions a figure has, there are one-dimensional, two-dimensional and three-dimensional figures.

1D and 2D figures

  • One-dimensional figures do not enclose any area and have only one direction.

Example: A ray or a line segment.

  • Two-dimensional figures have an area associated with them.

They have length and breadth or width.

They are usually plane figures, like squares, rectangles and circles.

1D and 2D figures

Solid Shapes

  • Solid shapes have length, breadth or width and depth or height.
  • They are called 3D or three-dimensional shapes.
  • Example: Cuboids, Cylinders, Spheres and Pyramids.
Solid Shapes

Perspectives of a Solid Shape

Visualising solid shapes

  • Solid shapes can be visualised in different ways.
  • Solid shapes can be formed by placing some solid shapes side by side to form a new solid shape.
  • Example: (i) A cylinder is formed by stacking up circles vertically.

(ii) Cubes can be formed by placing cubes side by side.

Visualising solid shapes

Visualising solid objects by viewing the smallest unit

  • A solid can be visualised by breaking it down to the smallest unit.
  • For example, a cube of dimensions (3cm x 3cm x 3cm) can be made up of 27 small cubes of dimensions (1cm x 1cm x 1cm).
Visualising solid objects by viewing the smallest unit

Viewing sections of a solid by slicing or cutting

  • If you cut or slice a solid we get to view the cross-section.

Example: If a loaf of bread is cut vertically, then the crosssection is almost a square. But if it is cut or sliced horizontally, the cross-section is a rectangle.

  • Similarly, other solid shapes can be sliced in order to find their 2D cross-sectional shapes.

Example: A cucumber cut vertically gives a circle.

Viewing sections of a solid by slicing or cutting

Viewing sections of a solid by using shadows

  • Shadows can be used to view 3D objects as 2D shapes.
  • Example: The shadows of a cylinder are shown below.
Viewing sections of a solid by using shadows

Different views of a Solid

  • A solid can be visualised by looking at it from different angles, namely: (i) Front view (ii) Top view (iii) Side view.
  • Example: The different views of a figure are shown below.
Different views of a Solid

Quantities Associated with a Solid

Faces, edges and vertices

  • The corners of a solid shape are called its vertices.
  • The line segment joining two vertices is called an edge, or when two planes of a solid meet it forms an edge.
  • The surfaces of a solid shape are called as its face.
Quantities Associated with a Solid

The table below shows the number of faces, edges and vertices some solid shapes have.

The number of faces, edges and vertices in solid shapes

Nets of Solid Shapes

Building 3-D objects

A net is a flattened out skeletal outline or a blueprint of a solid which can be folded along the edges to create solid. The same solid can have multiple nets.

Example: A net for a cube box.

A net for a cube box.

Representing 3D Shapes on a Paper

Drawing solids on a flat surface

  • Solid shapes can be represented on a 2D flat surface like paper.
  • This is done by drawing oblique sketches, to make it appear 3D. This is called as 2D representation of a 3D solid.

Obliques sketches

  • Oblique sketches do not have the exact length of a solid shape but appears exactly like the solid shape.
  • Example: Drawing an oblique sketch of a cube:

Step 1: Draw the front and the opposite faces.

Step 2: Join the corresponding corners. (Figure 1)

Step 3: Redraw using dotted lines for hidden edges. (Figure 2)

This gives the oblique sketch of the cube.

Obliques sketches

Isometric sketches

  • Isometric sketches have measurements equal to that of the solid.
  • They are usually drawn on an isometric dotted paper.
  • Example: Drawing an isometric sketch of a cuboid of dimensions 4 × 3 × 3:

Step 1: Draw a rectangle to show the front face of the cuboid.

Isometric sketches - Step 1

Step 2: Draw four parallel line segments of length three starting from the four corners of the rectangle.

Isometric sketches - Step 2

Step 3: Connect the corresponding corners using appropriate line segments.

Isometric sketches - Step 3

Step 4: The figure thus obtained is the isometric sketch of the cuboid.

Isometric sketches - Step 4

Important Questions

Multiple Choice Questions:

Question 1. The name of the solid shape is

MCQ Questions for Class 7 Maths Chapter 15 Visualising Solid Shapes with Answers 1

(a) cone

(b) cylinder

(c) sphere

(d) cube

Question 2. The name of the solid shape is

MCQ Questions for Class 7 Maths Chapter 15 Visualising Solid Shapes with Answers 2

(a) cuboid

(b) cube

(c) pyramid

(d) cone

Question 3. The name of the solid shape is

MCQ Questions for Class 7 Maths Chapter 15 Visualising Solid Shapes with Answers 3

(a) cylinder

(b) cone

(c) sphere

(d) cube

Question 4. The name of the solid shape is

MCQ Questions for Class 7 Maths Chapter 15 Visualising Solid Shapes with Answers 4

(a) cube

(b) cylinder

(c) cone

(d) sphere

Question 5. The name of the solid shape is

MCQ Questions for Class 7 Maths Chapter 15 Visualising Solid Shapes with Answers 5

(a) cylinder

(b) cone

(c) cuboid

(d) sphere

Question 6. The name of the solid shape is

MCQ Questions for Class 7 Maths Chapter 15 Visualising Solid Shapes with Answers 6

(a) cylinder

(b) cone

(c) sphere

(d) pyramid

Question 7. The number of vertices of a cube is

(a) 8

(b) 12

(c) 6

(d) 3

Question 8. The number of edges of a cube is

(a) 8

(b) 12

(c) 6

(d) 3

Question 9. The number of faces of a cube is

(a) 8

(b) 12

(c) 6

(d) 3

Question 10. The number of vertices of the solid shape is

MCQ Questions for Class 7 Maths Chapter 15 Visualising Solid Shapes with Answers 7

(a) 1

(b) 2

(c) 3

(d) 4

Question 11. The number of faces of the solid shape is

MCQ Questions for Class 7 Maths Chapter 15 Visualising Solid Shapes with Answers 8

(a) 1

(b) 2

(c) 3

(d) 4

Question 12. The number of edges of the solid shape is

MCQ Questions for Class 7 Maths Chapter 15 Visualising Solid Shapes with Answers 9

(a) 1

(b) 2

(c) 3

(d) 6

Question 13. The number of vertices of the solid shape is

MCQ Questions for Class 7 Maths Chapter 15 Visualising Solid Shapes with Answers 10

(a) 9

(b) 4

(c) 6

(d) 8

Question 14. The number of faces of the solid shape is

MCQ Questions for Class 7 Maths Chapter 15 Visualising Solid Shapes with Answers 11

(a) 4

(b) 6

(c) 9

(d) 8

Question 15. The number of edges of the solid shape is

MCQ Questions for Class 7 Maths Chapter 15 Visualising Solid Shapes with Answers 12

(a) 16

(b) 9

(c) 6

(d) 4

Very Short Questions:

  1. If three cubes of dimensions 2 cm × 2 cm × 2 cm are placed end to end, what would be the dimension of the resulting cuboid?
  2. Answer the following:

(i) Why a cone is not a pyramid?

(ii) How many dimension a solid have?

(iii) Name the solid having one curved and two flat faces but no vertex.

  1. Write down the number of edges on each of the following solid figures:

(i) Cube

(ii) Tetrahedron

(iii) Sphere

(iv) Triangular prism

  1. What cross-section do you get when you give a horizontal cut to an ice cream cone?
  2. Determine the number of edges, vertices and faces in the given figure.
Visualising Solid Shapes Class 7 Extra Questions Maths Chapter 15 Q5
  1. Draw the sketch of two figure that has no edge.
  2. Draw the sketches of two figures that have no vertex.
  3. Draw the sketches of two figures that have no vertex.
  4. What shape would we get from the given figure?
Visualising Solid Shapes Class 7 Extra Questions Maths Chapter 15 Q9

Short Questions:

  1. For the solids given below sketch the front, side and top view
Visualising Solid Shapes Class 7 Extra Questions Maths Chapter 15 Q10
  1. Match the following:
Visualising Solid Shapes Class 7 Extra Questions Maths Chapter 15 Q11
  1. Complete the following table:
Visualising Solid Shapes Class 7 Extra Questions Maths Chapter 15 Q12
  1. Draw a plan, front and side elevations of the following solids.
Visualising Solid Shapes Class 7 Extra Questions Maths Chapter 15 Q13
  1. Name the solid that would be formed by each net:

Long Questions:

  1. Name the solids that have:

(i) 1 curved surface

(ii) 4 faces

(iii) 6 faces

(iv) 5 faces and 5 vertices

(v) 8 triangular faces

(vi) 6 triangular faces and 2 hexagonal faces.

  1. Draw the top, side and front views of the given solids:
Diagram

Description automatically generated
  1. Draw the net of a cuboid having same breadth and height, but length double the breadth.
  2. Draw the nets of the following:

(i) Triangular prisms

(ii) Tetrahedron

(iii) Cuboid.

Answer Key-

Multiple Choice Questions:

  1. (b) cylinder
  2. (a) cuboid
  3. (c) sphere
  4. (a) cube
  5. (b) cone
  6. (d) pyramid
  7. (a) 8
  8. (b) 12
  9. (c) 6
  10. (d) 4
  11. (d) 4
  12. (d) 6
  13. (a) 9
  14. (c) 9
  15. (a) 16

Very Short Answer:

  1. Length of the resulting cuboid = 2 cm + 2 cm + 2 cm = 6 cm

Breadth = 2 cm

Height = 2 cm

Visualising Solid Shapes Class 7 Extra Questions Maths Chapter 15 Q1

Hence the required dimensions = 6 cm × 2 cm × 2 cm.

  1. (i) Cone is not a pyramid because its base is not a polygon.

(ii) Three.

(iii) Cylinder

  1. (i) 12

(ii) 6

(iii) 0

(iv) 9

  1. Circle
  2. Edges = 8

Vertices = 5

Faces = 5

Diagram

Description automatically generated
  1. Sphere: Football, Earth, Round table

Cone: Conical funnel, ice cream cone, conical cracker.

  1. From the given net, we get a rectangular pyramid.

Short Answer:

Visualising Solid Shapes Class 7 Extra Questions Maths Chapter 15 Q10.1
Visualising Solid Shapes Class 7 Extra Questions Maths Chapter 15 Q10.2
  1. (i) → (e)

(ii) → (a)

(iii) → (b)

(iv) → (c)

(v) → (d)

Visualising Solid Shapes Class 7 Extra Questions Maths Chapter 15 Q12.1
Visualising Solid Shapes Class 7 Extra Questions Maths Chapter 15 Q13.1
  1. (i) Triangular pyramid

(ii) Square pyramid

(iii) Hexagonal pyramid

Long Answer:

  1. (i) Cylinder

(ii) Tetrahedron

(iii) Cube and cuboid

(iv) Square pyramid or rectangular pyramid

(v) Regular octahedron

(vi) Hexagonal prism.

Visualising Solid Shapes Class 7 Extra Questions Maths Chapter 15 Q16.1
Visualising Solid Shapes Class 7 Extra Questions Maths Chapter 15 Q17
Visualising Solid Shapes Class 7 Extra Questions Maths Chapter 15 Q18

Class 7 Mathematics – CHAPTER 12 : SYMMETRY

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Symmetry

Basics of Symmetry

  • Symmetry is a geometrical concept that is found in most cases including nature.
  • Any geometric shape can be said to be symmetric or asymmetric
  • A shape is said to be symmetric if there exists an imaginary line passing through that divides the shape into halves and that these halves overlap each other completely.
  • In other words, fold the shape about the imaginary line to check if the two halves completely overlap each other or not. If they overlap each other completely the shape is symmetric, if not, then it is asymmetric.
  • The imaginary line is called as the line of symmetry.
  • The symmetry observed in the above example is called as a line or bilateral symmetry.

Symmetry in Mathematics

In Mathematics, a meaning of symmetry defines that one shape is exactly like the other shape when it is moved, rotated, or flipped. Consider an example, when you are told to cut out a ‘heart’ from a piece of paper, don’t you simply fold the paper, draw one-half of the heart at the fold and cut it out to find that the other half exactly matches the first half? The heart carved out is an example of symmetry.

Symmetry Math definition states that “symmetry is a mirror image”. When an image looks identical to the original image after the shape is being turned or flipped, then it is called symmetry. It exists in patterns. You may have often heard of the term ‘symmetry’ in day to day life. It is a balanced and proportionate similarity found in two halves of an object, that is, one-half is the mirror image of the other half. And a shape that is not symmetrical is referred to as asymmetrical. Symmetric objects are found all around us, in nature, architecture, and art.

Symmetrical Figures

Symmetrical shapes or figures are the objects where we can place a line such that the images on both sides of the line mirror each other.  The below set of figures form symmetrical shapes when we place a plane or draw the lines.

Symmetrical figures

Reflection Symmetry

  • There exists at least one line that divides a figure into two halves such that one-half is the mirror image of the other half.
  • Reflection symmetry is a unique case of line symmetry as there exists lateral inversion in the two halves.
  • Lateral inversion signifies that left side of one half is the right side of its mirror half.

Examples of Reflection Symmetry

Regular polygons of N sides have N lines of symmetry.

 3 Lines of Symmetry

Square: 4 Lines SS of Symmetry

5 Lines of Symmetry

Pentagon: 5 Lines of Symmetry

A rectangle has a vertical and a horizontal line of symmetry.

2 Lines of Symmetry

Rectangle: 2 Lines of Symmetry

However, it is not symmetrical across its diagonal.

reflection symmetry

Is Parallelogram Symmetrical?

At first glance, a parallelogram may look symmetrical. But it is not symmetrical along any of the axes of reflection.

Reflection symmetry of Parallelogram

Reflection symmetry of Parallelogram

Reflection symmetry is also observed in inkblot paper. Pour a little ink and water drop on one side of a paper. Fold the paper into two halves and press it with your palm. Unfold the paper to see the symmetric pattern along the line of the fold. The line of the fold is the axis of reflection.

Reflection symmetry example

Point Symmetry

If a shape has point symmetry, then any point on the shape has a matching point which is exactly at the same distance from the point of symmetry but in the opposite direction.

Lines of symmetry for regular polygons

  • Regular polygons are closed shapes that have equal sides and equal angles.
  • Such polygons have multiple lines of symmetry.

Some regular polygons with their line of symmetry are shown below:

Lines of Symmetry - 4M Blog

Rotational Symmetry

  • There exists another concept of symmetry that does not involve folding the figure to check if they coincide.
  • Rotational symmetry is one where when a figure is rotated about a centre point, the figure looks exactly the same before rotation.
  • The particular centre for which rotational symmetry is observed is called the centre of rotation.
  • The angle of turning during rotation is called angle of rotation.
  • The number of positions in which a figure can be rotated and still appears exactly like it did before the rotation is called order of symmetry.

Rotational symmetry: A figure is rotated around a center point and it still appears exactly like it did before the rotation

Centre of rotation: Fixed point around which the rotation occurs

Angle of rotation: Angle of turning during rotation

Order of Symmetry: Number of positions in which a figure can be rotated and still appears exactly like it did before the rotation

Example: A star can be rotated 5 times along its tip and looks same every time. Hence, its order of symmetry is 5.

Rotational symmetry
Shape

Description automatically generated

Center of Rotation

For a figure or object that has rotational symmetry, the fixed point around which the rotation occurs is called the centre of rotation. Example: the centre of rotation of a windmill in the centre of the windmill from which its blades originate.

Angle of Rotational Symmetry

For a figure or object that has rotational symmetry, the angle of turning during rotation is called the angle of rotation. Example: when a square is rotated by 90 degrees, it appears the same after rotation. So, the angle of rotation for a square is 90 degrees.

In the same way, a regular hexagon has an angle of symmetry as 60 degrees, a regular pentagon has 72 degrees, and so on.

Order of Rotational Symmetry

The number of positions in which a figure can be rotated and still appears exactly as it did before the rotation, is called the order of symmetry. For example, a star can be rotated 5 times along its tip and look at the same every time. Hence, its order of symmetry is 5.

Rotational Symmetry Letters

There are many capital letters of English alphabets which has symmetry when they are rotated clockwise or anticlockwise about an axis. Some of them are: Z, H, S, N and O. When these letters are rotated 180 degrees clockwise or anticlockwise the letters appears to be same.

Examples of Rotational Symmetry

The recycle logo has an order of symmetry of 3.

Rotational Symmetry example

The paper windmill has an order of symmetry of 4.

Rotational Symmetry of order 4

The triangle has an order of symmetry of 3.

Rotational Symmetry of order 3

The Swastik symbol has an order of symmetry of 4.

Rotational Symmetry of order 4

The roundabout road sign has an order of symmetry of 3.

Rotational Symmetry of order 3

Geometry in rotational symmetry

Rotational symmetry in triangle and square:

 Rotational symmetry in triangle and square

Summary of Symmetry

Figures having both line symmetry and rotational symmetry:

Important Questions

Multiple Choice Questions:

Question 1. How many lines of symmetry are there in an equilateral triangle?

(a) 1

(b) 2

(c) 3

(d) 4

Question 2. How many lines of symmetry are there in a square?

(a) 1

(b) 2

(c) 3

(d) 4

Question 3. How many lines of symmetry are there in a rectangle?

(a) 1

(b) 2

(c) 3

(d) 4

Question 4. How many lines of symmetry are there in a regular pentagon?

(a) 1

(b) 2

(c) 3

(d) 5

Question 5. How many lines of symmetry are there in a regular hexagon?

(a) 2

(b) 4

(c) 6

(d) 3

Question 6. How many lines of symmetry are there in the following figure?

MCQ Questions for Class 7 Maths Chapter 14 Symmetry with Answers 1

(a) 1

(b) 2

(c) 3

(d) 4

Question 7. How many lines of symmetry are there in the following figure?

MCQ Questions for Class 7 Maths Chapter 14 Symmetry with Answers 2

(a) 1

(b) 2

(c) 3

(d) 4

Question 8. How many lines of symmetry are there in the following figure?

MCQ Questions for Class 7 Maths Chapter 14 Symmetry with Answers 3

(a) 1

(b) 2

(c) 3

(d) 4

Question 9. How many lines of symmetry are there in the following figure?

A picture containing shape

Description automatically generated

(a) 4

(b) 3

(c) 2

(d) 1

Question 10. How many lines of symmetry are there in the following figure?

A picture containing diagram

Description automatically generated

(a) 2

(b) 1

(c) 4

(d) 3

Question 11. How many lines of symmetry are there in following figure?

MCQ Questions for Class 7 Maths Chapter 14 Symmetry with Answers 6

(a) 1

(b) 2

(c) 3

(d) None of these

Question 12. How many lines of symmetry are there in the following figure?

MCQ Questions for Class 7 Maths Chapter 14 Symmetry with Answers 7

(a) 1

(b) 2

(c) 3

(d) Infinitely many

Question 13. How many lines of symmetry are there in an isosceles triangle?

(a) 4

(b) 3

(c) 1

(d) 2

Question 14. How many lines of symmetry are there in a scalene triangle?

(a) 1

(b) 0

(c) 2

(d) 4

Question 15. How many lines of symmetry are there in a rhombus?

(a) 1

(b) 2

(c) 3

(d) 4

Very Short Questions:

  1. Draw any two English alphabets having an only a vertical line of symmetry.
  2. Draw any two English alphabets having a horizontal line of symmetry.
  3. Draw any two English alphabets having both horizontal and vertical line of symmetry.
  4. Dray any two English alphabets which has no line of symmetry.
  5. Draw any two figures which have the order of rotational symmetry 4.
  6. Draw any two figures which have the order of rotational symmetry 2.
  7. State the order of rotational symmetry of the following figures.
Symmetry Class 7 Extra Questions Maths Chapter 14 Q7
  1. Draw a figure having an infinite number of lines of symmetry.
  2. Draw any two figure having no lines of symmetry.
  3. State the English alphabet which has only the horizontal line of symmetry.

Short Questions:

  1. Give the order of rotational symmetry of each of the following figures:
Symmetry Class 7 Extra Questions Maths Chapter 14 Q11
  1. How many lines of symmetry do the following have:

(a) a parallelogram

(b) an equilateral triangle

(c) a right angle with equal legs

(d) an angle with equal arms

(e) a semicircle

(f) a rhombus

(g) a square

(h) scalene triangle

  1. What letters of the English alphabet have reflectional symmetry about?

(а) a vertical mirror

(b) a horizontal mirror

(c) both horizontal and vertical mirrors

Long Questions:

  1. Give three examples of shapes with no line of symmetry.

Answer Key-

Multiple Choice Questions:

  1. (c) 3
  2. (d) 4
  3. (b) 2
  4. (d) 5
  5. (c) 6
  6. (a) 1
  7. (a) 1
  8. (a) 1
  9. (d) 1
  10. (b) 1
  11. (a) 1
  12. (d) Infinitely many
  13. (c) 1
  14. (b) 0
  15. (b) 2

Very Short Answer:

Symmetry Class 7 Extra Questions Maths Chapter 14 Q1
Symmetry Class 7 Extra Questions Maths Chapter 14 Q2
Symmetry Class 7 Extra Questions Maths Chapter 14 Q3
Symmetry Class 7 Extra Questions Maths Chapter 14 Q4
Symmetry Class 7 Extra Questions Maths Chapter 14 Q5
Symmetry Class 7 Extra Questions Maths Chapter 14 Q6
  1. (i) Order of equilateral triangle = 3

(ii) Order of regular pentagon = 5.

Symmetry Class 7 Extra Questions Maths Chapter 14 Q8

A circle has the infinite number of lines of symmetry.

  1. English alphabet R and P have no lines of symmetry.
  2. B, C, D, E, H, I, O, X and K are the English alphabets having an only horizontal line of symmetry.

Short Answer:

  1. (a) Order of rotational symmetry = 4

(b) Order of rotational symmetry = 5

(c) Order of rotational symmetry = 3

(d) Order of rotational symmetry = 6

(e) Order of rotational symmetry = 3

(f) Order of rotational symmetry = 4

Symmetry Class 7 Extra Questions Maths Chapter 14 Q12
  1. (a) The letters of English alphabet having reflectional symmetry about a vertical mirror are:

A, H, I, M, O, T, U, V, W, X, Y

(b) Letters of the English alphabets having reflectional symmetry about a horizontal mirror are:

B, C, D, E, H, I, O, X

(c) Letters of the English alphabet having reflectional of symmetry about vertical and horizontal mirror are:

O, X, I, H.

Long Answer:

  1. A shape has a no line of symmetry, if there is no line about which the figure may be folded and also parts of the figure will not coincide.

A scalene triangle, a quadrilateral and a parallelogram

Shape, rectangle

Description automatically generated

Class 7 Mathematics – CHAPTER 11 : EXPONENTS AND POWERS

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Exponents and Powers

Powers and Exponents

Powers amd Exponents
Introduction To Exponents | Exponents and Powers | Algebra | Math |  Letstute - YouTube

Exponent

An exponent of a number, represents the number of times the number is multiplied to itself. If 8 is multiplied by itself for n times, then, it is represented as:

8 × 8 × 8 × 8 × …..n times = 8n

The above expression, 8n, is said as 8 raised to the power n. Therefore, exponents are also called power or sometimes indices.

Examples:

2 x 2 x 2 x 2 = 24

5 x 5 x 5 = 53

10 x 10 x 10 x 10 x 10 x 10 = 106

Powers and exponents (Pre-Algebra, Discover fractions and factors) –  Mathplanet

General Form of Exponents

The exponent is a simple but powerful tool. It tells us how many times a number should be multiplied by itself to get the desired result. Thus any number ‘a’ raised to power ‘n’ can be expressed as:

Exponents And Powers
  • Here a is any number and n is a natural number.
  • an is also called the nth power of a.
  • ‘a’ is the base and ‘n’ is the exponent or index or power.
  • ‘a’ is multiplied ‘n’ times, and thereby exponentiation is the shorthand method of repeated multiplication.

Laws of Exponents

Powers with like bases

Power with Like Bases

Power of a Power

Power of a Power

Exponent Zero

Exponent Zero

Powers with unlike bases and same exponent

Powers with Unlike Bases

The laws of exponents are demonstrated based on the powers they carry.

  • Bases – multiplying the like ones – add the exponents and keep the base same. (Multiplication Law)
  • Bases – raise it with power to another – multiply the exponents and keep the base same.
  • Bases – dividing the like ones – ‘Numerator Exponent – Denominator Exponent’ and keep the base same. (Division Law)

Let ‘a’ is any number or integer (positive or negative) and ‘m’, ‘n’ are positive integers, denoting the power to the bases, then;

Multiplication Law

As per the multiplication law of exponents, the product of two exponents with the same base and different powers equals to base raised to the sum of the two powers or integers.

am × an = am+n

Division Law

When two exponents having same bases and different powers are divided, then it results in base raised to the difference between the two powers.

am ÷ an = am / an = am-n

Negative Exponent Law

Any base if has a negative power, then it results in reciprocal but with positive power or integer to the base.

a-m = 1/am

Product With the Same Bases

As per this law, for any non-zero term a,

am × an = am+n

Example 1: What is the simplification of 55 × 51?

Solution: 55 × 51 = 55+1 = 56

Example 2: What is the simplification of (−6)-4 × (−6)-7?

Solution: (−6)-4 × (−6)-7 = (-6)-4-7 = (-6)-11

Note: We can state that the law is applicable for negative terms also. Therefore the term m and n can be any integer.

Quotient with Same Bases

As per this rule,

am/an = am-n

where a is a non-zero term and m and n are integers.

Power Raised to a Power

According to this law, if ‘a’ is the base, then the power raised to the power of base ‘a’ gives the product of the powers raised to the base ‘a’, such as;

(am)n = amn

Zero Power

According to this rule, when the power of any integer is zero, then its value is equal to 1, such as;

a0 = 1

where ‘a’ is any non-zero term.

Example: What is the value of 50 + 22 + 40 + 71 – 31?

Solution: 50 + 22 + 40 + 71 – 31 = 1 + 4 + 1 + 7 – 3 = 10

Rules of Exponents

The rules of exponents are followed by the laws. Let us have a look at them with a brief explanation.

Suppose ‘a’ & ‘b’ are the integers and ‘m’ & ‘n’ are the values for powers, then the rules for exponents and powers are given by:

  • a0 = 1

As per this rule, if the power of any integer is zero, then the resulted output will be unity or one.

Example: 50 = 1

  • (am)n = a(mn)

‘a’ raised to the power ‘m’ raised to the power ‘n’ is equal to ‘a’ raised to the power product of ‘m’ and ‘n’.

Example: (52)3 = 52 x 3

  • am × bm = (ab)m

The product of ‘a’ raised to the power of ‘m’ and ‘b’ raised to the power ‘m’ is equal to the product of ‘a’ and ‘b’ whole raised to the power ‘m’.

Example: 52 × 62 = (5 × 6)2

  • am/bm = (a/b)m

The division of ‘a’ raised to the power ‘m’ and ‘b’ raised to the power ‘m’ is equal to the division of ‘a’ by ‘b’ whole raised to the power ‘m’.

Example: 52/62 = (5/6)2

Exponents and Powers Applications

Scientific notation uses the power of ten expressed as exponents, so we need a little background before we can jump in. In this concept, we round out your knowledge of exponents, which we studied in previous classes.

The distance between the Sun and the Earth is 149,600,000 kilometres. The mass of the Sun is 1,989,000,000,000,000,000,000,000,000,000 kilograms. The age of the Earth is 4,550,000,000 years. These numbers are way too large or small to memorize in this way.  With the help of exponents and powers, these huge numbers can be reduced to a very compact form and can be easily expressed in powers of 10.

Now, coming back to the examples we mentioned above, we can express the distance between the Sun and the Earth with the help of exponents and powers as following:

Distance between the Sun and the Earth 149,600,000 = 1.496 × 10 × 10 × 10 × 10 × 10 × 10 × 10 = 1.496 × 108 kilometers.

Mass of the Sun: 1,989,000,000,000,000,000,000,000,000,000 kilograms = 1.989 × 1030 kilograms.

Age of the Earth:  4,550,000,000 years = 4.55 × 109 years

Powers with negative exponents

Powers with Negative Exponents

Visualising Exponents

Visualising powers and exponents

Visualising Power

Uses of Exponents

Expanding a rational number using powers

Expanding a rational number using powers

Inter conversion between standard and normal forms

Inter conversion between standard and normal forms

Comparision of quantities using exponents

Comparision of quantities using exponents

Important Questions

Multiple Choice Questions:

Question 1. The exponential form of 10000 is

(a) 103

(b) 104

(c) 105

(d) none of these

Question 2. The exponential form of 100000 is

(a) 103

(b) 104

(c) 105

(d) none of these

Question 3. The exponential form of 81 is

(a) 34

(b) 33

(c) 32

(d) none of these

Question 4. The exponential form of 125 is

(a) 54

(b) 53

(c) 52

(d) none of these

Question 5. The exponential form of 32 is

(a) 23

(b) 24

(c) 25

(d) none of these

Question 6. The exponential form of 243 is

(a) 35

(b) 34

(c) 33

(d) 32

Question 7. The exponential form of 64 is

(a) 25

(b) 26

(c) 27

(d) 28

Question 8. The exponential form of 625 is

(a) 52

(b) 53

(c) 54

(d) 55

Question 9. The exponential form of 1000 is

(a) 101

(b) 102

(c) 103

(d) 104

Question 10. The value of (- 2)3 is

(a) 8

(b) -8

(c) 16

(d) -16

Question 11. The value of (- 2)4 is

(a) 8

(b) -8

(c) 16

(d) -16

Question 12. What is the base in 82?

(a) 8

(b) 2

(c) 6

(d) 10

Question 13. What is the exponent in 82?

(a) 8

(b) 2

(c) 16

(d) 6

Question 14. (-1) even number =

(a) -1

(b) 1

(c) 0

(d) none of these

Question 15. (-1) odd number =

(a) -1

(b) 1

(c) 0

(d) none of these

Very Short Questions:

  1. Express 343 as a power of 7.
  2. Which is greater 32 or 23?
  3. Express the following number as a powers of prime factors:

(i) 144

(ii) 225

  1. Find the value of:

(i) (-1)1000

(ii) (1)250

(iii) (-1)121

(iv) (10000)0

  1. Express the following in exponential form:

(i) 5 × 5 × 5 × 5 × 5

(ii) 4 × 4 × 4 × 5 × 5 × 5

(iii) (-1) × (-1) × (-1) × (-1) × (-1)

(iv) a × a × a × b × c × c × c × d × d

Short Questions:

  1. Express each of the following as product of powers of their prime factors:

(i) 405

(ii) 504

(iii) 500

  1. Simplify the following and write in exponential form:

(i) (52)3

(ii) (23)3

(iii) (ab)c

(iv) [(5)2]2

  1. Verify the following:
Exponents and Powers Class 7 Extra Questions Maths Chapter 13 Q8
  1. Simplify:
Exponents and Powers Class 7 Extra Questions Maths Chapter 13 Q9
  1. Simplify and write in exponential form:
Exponents and Powers Class 7 Extra Questions Maths Chapter 13 Q10
  1. Express each of the following as a product of prime factors is the exponential form:

(i) 729 × 125

(ii) 384 × 147

  1. Simplify the following:

(i) 103 × 90 + 33 × 2 + 70

(ii) 63 × 70 + (-3)4 – 90

  1. Write the following in expanded form:

(i) 70,824

(ii) 1,69,835

Long Questions:

  1. Find the number from each of the expanded form:

(i) 7 × 108 + 3 × 105 + 7 × 102 + 6 × 101 + 9

(ii) 4 × 107 + 6 × 103 + 5

  1. Find the value of k in each of the following:
Exponents and Powers Class 7 Extra Questions Maths Chapter 13 Q15
  1. Find the value of

(a) 30 ÷ 40

(b) (80 – 20) ÷ (80 + 20)

(c) (20 + 30 + 40) – (40 – 30 – 20)

  1. Express the following in standard form:

(i) 8,19,00,000

(ii) 5,94,00,00,00,000

(iii) 6892.25

  1. Evaluate:
Exponents and Powers Class 7 Extra Questions Maths Chapter 13 Q18
  1. Find the value of x, if
Exponents and Powers Class 7 Extra Questions Maths Chapter 13 Q20

Answer Key-

Multiple Choice Questions:

  1. (b) 104
  2. (c) 105
  3. (a) 34
  4. (b) 53
  5. (c) 25
  6. (a) 35
  7. (b) 26
  8. (c) 54
  9. (c) 103
  10. (b) -8
  11. (c) 16
  12. (a) 8
  13. (b) 2
  14. (b) 1
  15. (a) -1

Very Short Answer:

  1. We have 343 = 7 × 7 × 7 = 73

Thus, 343 = 73

Exponents and Powers Class 7 Extra Questions Maths Chapter 13 Q1
  1. We have 32 = 3 × 3 = 9

23 = 2 × 2 × 2 = 8

Since 9 > 8

Thus, 32 > 23

  1. (i) We have

144 = 2 × 2 × 2 × 2 × 3 × 3 = 24 × 32

Thus, 144 = 24 × 32

Exponents and Powers Class 7 Extra Questions Maths Chapter 13 Q3

(ii) We have

225 = 3 × 3 × 5 × 5 = 32 × 52

Thus, 225 = 32 × 52

Exponents and Powers Class 7 Extra Questions Maths Chapter 13 Q3.1
  1. (i) (-1)1000 = 1 [∵ (-1)even number = 1]

(ii) (1)250 = 1 [∵ (1)even number = 1]

(iii) (-1)121 = -1 [∵ (-1)odd number = -1]

(iv) (10000)0 = 1 [∵ a0 = 1]

  1. (i) 5 × 5 × 5 × 5 × 5 = (5)5

(ii) 4 × 4 × 4 × 5 × 5 × 5 = 43 × 53

(iii) (-1) × (-1) × (-1) × (-1) × (-1) = (-1)5

(iv) a × a × a × b × c × c × c × d × d = a3b1c3d2

Short Answer:

  1. (i) We have

405 = 3 × 3 × 3 × 3 × 5 = 34 × 51

Thus, 405 = 34 × 51

Exponents and Powers Class 7 Extra Questions Maths Chapter 13 Q6

(ii) We have

504 = 2 × 2 × 2 × 3 × 3 × 7 = 23 × 32 × 71

Thus, 504 = 23 × 32 × 71

Exponents and Powers Class 7 Extra Questions Maths Chapter 13 Q6.1

(iii) We have

500 = 2 × 2 × 5 × 5 × 5 = 22 × 53

Thus, 500 = 22 × 53

Exponents and Powers Class 7 Extra Questions Maths Chapter 13 Q6.2
  1. (i) (52)3 = 52×3 = 56

(ii) (23)3 = 23×3 = 29

(iii) (ab)c = ab×c = abc

(iv) [(5)2]2 = 52×2 = 54

Exponents and Powers Class 7 Extra Questions Maths Chapter 13 Q8.1
Exponents and Powers Class 7 Extra Questions Maths Chapter 13 Q9.1
Exponents and Powers Class 7 Extra Questions Maths Chapter 13 Q10.1
  1. (i) 729 × 125 = 3 × 3 × 3 × 3 × 3 × 3 × 5 × 5 × 5 = 36 × 53

Thus, 729 × 125 = 36 × 53

Exponents and Powers Class 7 Extra Questions Maths Chapter 13 Q11

(ii) 384 × 147 = 2 × 2 × 2 × 2 × 2 × 2 × 2 × 3 × 3 × 7 × 7 = 27 × 32 × 72

Thus, 384 × 147 = 27 × 32 × 72

Exponents and Powers Class 7 Extra Questions Maths Chapter 13 Q11.1
  1. (i) 103 × 90 + 33 × 2 + 70

= 1000 + 54 + 1

= 1055

(ii) 63 × 70 + (-3)4 – 90

= 216 × 1 + 81 – 1

= 216 + 80

= 296

  1. (i) 70,824

= 7 × 10000 + 0 × 1000 + 8 × 100 + 2 × 10 + 4 × 100

= 7 × 104 + 8 × 102 + 2 × 101 + 4 × 100

(ii) 1,69,835

= 1 × 100000 + 6 × 10000 + 9 × 1000 + 8 × 100 + 3 × 10 + 5 × 100

= 1 × 105 + 6 × 104 + 9 × 103 + 8 × 102 + 3 × 101 + 5 × 100

Long Answer:

  1. (i) 7 × 108 + 3 × 105 + 7 × 102 + 6 × 101 + 9

= 7 × 100000000 + 3 × 100000 + 7 × 100 + 6 × 10 + 9

= 700000000 + 300000 + 700 + 60 + 9

= 700300769

(ii) 4 × 107 + 6 × 103 + 5

= 4 × 10000000 + 6 × 1000 + 5

= 40000000 + 6000 + 5

= 40006005

Exponents and Powers Class 7 Extra Questions Maths Chapter 13 Q15.1
Exponents and Powers Class 7 Extra Questions Maths Chapter 13 Q15.2
  1. (a) We have 30 ÷ 40 = 1 ÷ 1 = 1 [∵ a0 = 1]

(b) (80 – 20) ÷ (80 + 20) = (1 – 1) ÷ (1 + 1) = 0 ÷ 2 = 0

(c) (20 + 30 + 40) – (40 – 30 – 20)

= (1 + 1 + 1) – (1 – 1 – 1) [∵ a0 = 1]

= 3 – 1

= 2

  1. (i) 8,19,00,000 = 8.19 × 107

(ii) 5,94,00,00,00,000 = 5.94 × 1011

(iii) 6892.25 = 6.89225 × 103

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Table

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Exponents and Powers Class 7 Extra Questions Maths Chapter 13 Q19.3
Exponents and Powers Class 7 Extra Questions Maths Chapter 13 Q20.1

Class 7 Mathematics – CHAPTER 10 : ALGEBRAIC EXPRESSIONS

0

Algebraic Expressions

Introduction to Algebraic Expressions

Constant

Constant is a quantity which has a fixed value.

Terms of Expression

Parts of an expression which are formed separately first and then added are known as terms. They are added to form expressions.

Example: Terms 4x and 5 are added to form the expression (4x +5).

Coefficient of a term

The numerical factor of a term is called coefficient of the term.

Example: 10 is the coefficient of the term 10xy in the expression 10xy+4y.

Algebra as Patterns

Writing Number patterns and rules related to them

If a natural number is denoted by n, its successor is (n + 1).

Example: Successor of n=10 is n+1 =11.

If a natural number is denoted by n, 2n is an even number and (2n+1) an odd number.

Example: If n=10, then 2n = 20 is an even number and 2n+1 = 21 is an odd number.

Writing Patterns in Geometry

Algebraic expressions are used in writing patterns followed by geometrical figures.

Example: Number of diagonals we can draw from one vertex of a polygon of n sides is (n – 3).

Writing Patterns in Geometry

Definition of Variables

Any algebraic expression can have any number of variables and constants.

Variable

A variable is a quantity that is prone to change with the context of the situation.

a,x,p,… are used to denote variables.

Constant

  • It is a quantity which has a fixed value.
  • In the expression 5x + 4, the variable here is x and the constant is 4.
  • The value 5x and 4 are also called terms of expression.
  • In the term 5x, 5 is called the coefficient of x. Coefficients are any numerical factor of a term.

Factors of a term

Factors of a term are quantities which can not be further factorised. A term is a product of its factors.

Example: The term –3xy is a product of the factors –3, x and y.

Formation of Algebraic Expressions

  • Variables and numbers are used to construct terms.
  • These terms along with a combination of operators constitute an algebraic expression.
  • The algebraic expression has a value that depends on the values of the variables.
  • For example, let 6p2 − 3p+5 be an algebraic expression with variable p

The value of the expression when p=2 is,

6(2)2 − 3(2) + 5

⇒ 6(4) − 6 + 5 = 23

The value of the expression when p=1 is,

6(1)2 − 3(1) + 5

⇒ 6 − 3 + 5 = 8

Like and Unlike Terms

Like terms

Terms having same algebraic factors are like terms.

Example: 8xy and 3xy are like terms.

Unlike terms

Terms having different algebraic factors are unlike terms.

Example: 7xy and −3x are unlike terms.

Monomial, Binomial, Trinomial and Polynomial Terms

Types of expressions based on the number of terms

Based on the number of terms present, algebraic expressions are classified as:

  • Monomial: An expression with only one term.

Example: 7xy, −5m, etc.

  • Binomial: An expression which contains two, unlike terms.

Example: 5mn + 4, x + y, etc

  • Trinomial: An expression which contains three terms.

Example: x + y + 5, a + b + ab, etc.

Polynomials

An expression with one or more terms.

Example: x + y, 3xy + 6 + y, etc.

Notation

The polynomial function is denoted by P(x) where x represents the variable. For example,

P(x) = x2 – 5x + 11

If the variable is denoted by a, then the function will be P(a)

Degree of a Polynomial

The degree of a polynomial is defined as the highest degree of a monomial within a polynomial. Thus, a polynomial equation having one variable which has the largest exponent is called a degree of the polynomial.

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Properties of polynomial

Some of the important properties of polynomials along with some important polynomial theorems are as follows:

Property 1: Division Algorithm

If a polynomial P(x) is divided by a polynomial G(x) result in quotient Q(x) with remainder R(x), then,

P(x) = G(x) • Q(x) + R(x)

Property 2: Bezout’s Theorem

Polynomial P(x) is divisible by binomial (x – a) if and only if P(a) = 0.

Property 3: Remainder Theorem

If P(x) is divided by (x – a) with remainder r, then P(a) = r.

Property 4: Factor Theorem

A polynomial P(x) divided by Q(x) results in R(x) with zero remainders if and only if Q(x) is a factor of P(x).

Property 5: Intermediate Value Theorem

If P(x) is a polynomial, and P(x) ≠ P(y) for (x < y), then P(x) takes every value from P(x) to P(y) in the closed interval [x, y].

Property 6

The addition, subtraction and multiplication of polynomials P and Q result in a polynomial where,

Degree (P ± Q) ≤ Degree (P or Q)

Degree (P × Q) = Degree (P) + Degree(Q)

Property 7

If a polynomial P is divisible by a polynomial Q, then every zero of Q is also a zero of P.

Property 8

If a polynomial P is divisible by two coprime polynomials Q and R, then it is divisible by (Q • R).

Property 9

If P(x) = a0 + a1x + a2x2 + …… + anxn is a polynomial such that deg(P) = n ≥ 0 then, P has at most “n” distinct roots.

Property 10: Descartes’ Rule of Sign

The number of positive real zeroes in a polynomial function P(x) is the same or less than by an even number as the number of changes in the sign of the coefficients. So, if there are “K” sign changes, the number of roots will be “k” or “(k – a)”, where “a” is some even number.

Property 11: Fundamental Theorem of Algebra

Every non-constant single-variable polynomial with complex coefficients has at least one complex root.

Property 12

If P(x) is a polynomial with real coefficients and has one complex zero (x = a – bi), then x = a + bi will also be a zero of P(x). Also, x2 – 2ax + a2 + b2 will be a factor of P(x).

Polynomial Functions

A polynomial function is an expression constructed with one or more terms of variables with constant exponents. If there are real numbers denoted by a, then function with one variable and of degree n can be written as:

Addition and Subtraction of Algebraic Equations

  • Mathematical operations like addition and subtraction can be applied to algebraic terms.
  • For adding or subtracting two or more algebraic expression, like terms of both the expressions are grouped together and unlike terms are retained as it is.
  • Sum of two or more like terms is a like term with a numerical coefficient equal to the sum of the numerical coefficients of all like terms.
  • Difference between two like terms is a like term with a numerical coefficient equal to the difference between the numerical coefficients of the two like terms.
  • For example, 2y + 3x − 2x + 4y

⇒ x (3 − 2) + y (2 + 4)

⇒ x + 6y

  • Summation of algebraic expressions can be done in two ways:

Consider the summation of the algebraic expressions 5a2 + 7a + 2ab and 7a2 + 9a + 11b

  • Horizontal method

Consider three algebraic expressions 5xy – 3x2 – 12y +5x, xy – 3x – 12yz + 5x3 and y – 6x2 – zy + 5x3.

Step 1: Write the given algebraic expressions using an additional symbol.

(5xy – 3x2 – 12y +5x) + (xy – 3x – 12yz + 5x3) + (y – 6x2 – zy + 5x3)

Step 2: Open the brackets and multiply the signs.

5xy – 3x2 – 12y + 5x + xy – 3x – 12yz + 5x3 + y – 6x2 – zy + 5x3

Step 3: Now, combine the like terms.

(5xy + xy) + (-3x2 – 6x2) + (-12y + y) + (5x – 3x) + (-12yz – yz) + (5x3 + 5x3)

Step 4: Add the coefficients. Keep the variables and exponents on the variables the same.

6xy – 9x2 – 11y + 2x – 13yz + 10x3

Column Method

In this method, the given expression must be written column wise one below the other. For adding two or more algebraic expressions the like terms of both the expressions are grouped together. The coefficients of like terms are added together using simple addition techniques and the variable which is common is retained as it is. The, unlike terms, are retained as it is and the result obtained is the addition of two or more algebraic expressions.

Addition And Subtraction
  • Vertical method

5a2 + 7a + 2ab

7a2 + 9a + 11b

A picture containing diagram

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The knowledge of like and unlike terms is crucial while studying addition and subtraction of algebraic expressions because the operation of addition and subtraction can only be performed on like terms. The terms whose variables and their exponents are the same are known as like terms and the terms having different variables are unlike terms.

Example: -5x2 + 12 xy – 3y + 7x2 + xy

In the given algebraic expression, -5x2 and 7x2 are like since both the terms have x2 as the common variable. Similarly, 12xy and xy are like terms.

Use of algebraic expressions in the formula of the perimeter of figures

Algebraic expressions can be used in formulating perimeter of figures.

Example: Let l be the length of one side then the perimeter of:

Equilateral triangle = 3l

Square = 4l

Regular pentagon = 5l

Use of algebraic expressions in formula of area of figures

Algebraic expressions can be used in formulation area of figures.

Example: Let l be the length and b be the breadth then the area of:

Square = l2

Rectangle = l × b = lb

Triangle = b×h2, where b and h are base and height, respectively.

Important Questions

Multiple Choice Questions-

Question 1. How many terms are there in the expression 2x2y?

(a) 1

(b) 2

(c) 3

(d) 4

Question 2. How many terms are there in the expression 2y + 5?

(a) 1

(b) 2

(c) 3

(d) 4

Question 3. How many terms are there in the expression 1.2ab – 2.4b + 3.6a?

(a) 1

(b) 2

(c) 3

(d) 4

Question 4. How many terms are there in the expression – 2p3 – 3p2 + 4p + 7?

(a) 1

(b) 2

(c) 3

(d) 4

Question 5. What is the coefficient of x in the expression 4x + 3y?

(a) 1

(b) 2

(c) 3

(d) 4

Question 6. What is the coefficient of x in the expression 2 – x + y?

(a) 2

(b) 1

(c) -1

(d) None of these

Question 7. What is the coefficient of x in the expression y2x + y?

(a) y2

(b) y

(c) 1

(d) 0

Question 8. What is the coefficient of x in the expression 2z – 3xz?

(a) 3

(b) z

(c) 3z

(d) -3z

Question 9. What is the coefficient of x in the expression 1 + x + xz?

(a) z

(b) 1 + z

(c) 1

(d) 1 + x

Question 10. What is the coefficient of x in the expression 2x + xy2?

(a) 2 + y2

(b) 2

(c) y2

(d) None of these

Question 11. What is the coefficient of y2 in the expression 4 – xy2?

(a) 4

(b) x

(c) -x

(d) None of these

Question 12. What is the coefficient of y2 in the expression 3y2 + 4x?

(a) 1

(b) 2

(c) 3

(d) 4

Question 13. What is the coefficient of y2 in the expression 2x2y – 10xy2 + 5y2?

(a) 5 – 10x

(b) 5

(c) -10 x

(d) None of these

Question 14. What is the coefficient of x in the expression ax3 + bx2 + d?

(a) a

(b) b

(c) d

(d) 0

Question 15. What is the coefficient of x2 in the expression ax + b?

(a) a

(b) b

(c) a + b

(d) 0

Very Short Questions:

  1. Identify in the given expressions, terms which are not constants. Give their numerical coefficients.

(i) 5x – 3

(ii) 11 – 2y2

(iii) 2x – 1

(iv) 4x2y + 3xy2 – 5

  1. Group the like terms together from the following expressions:

-8x2y, 3x, 4y, -32x, 2x2y, -y

  1. Identify the pairs of like and unlike terms:

(i) -32x, y

(ii) -x, 3x

(iii) -12y2x, 32xy2

(iv) 1000, -2

  1. Classify the following into monomials, binomial and trinomials.

(i) -6

(ii) -5 + x

(iii) 32x – y

(iv) 6x2 + 5x – 3

(v) z2 + 2

  1. Draw the tree diagram for the given expressions:

(i) -3xy + 10

(ii) x2 + y2

  1. Identify the constant terms in the following expressions:

(i) -3 +32x

(ii) 32 – 5y + y2

(iii) 3x2 + 2y – 1

  1. Add:

(i) 3x2y, -5x2y, -x2y

(ii) a + b – 3, b + 2a – 1

  1. Subtract 3x2 – x from 5x – x2.
  2. Simplify combining the like terms:

(i) a – (a – b) – b – (b – a)

(ii) x2 – 3x + y2 – x – 2y2

Short Questions:

  1. Subtract 24xy – 10y – 18x from 30xy + 12y – 14x.
  2. From the sum of 2x2 + 3xy – 5 and 7 + 2xy – x2 subtract 3xy + x2 – 2.
  3. Subtract 3x2 – 5y – 2 from 5y – 3x2 + xy and find the value of the result if x = 2, y = -1.
  4. Simplify the following expressions and then find the numerical values for x = -2.

(i) 3(2x – 4) + x2 + 5

(ii) -2(-3x + 5) – 2(x + 4)

  1. Find the value of t if the value of 3x2 + 5x – 2t equals to 8, when x = -1.

Long Questions:

  1. Subtract the sum of -3x3y2 + 2x2y3 and -3x2y3 – 5y4 from x4 + x3y2 + x2y3 + y4.
  2. What should be subtracted from 2x3 – 3x2y + 2xy2 + 3y2 to get x3 – 2x2y + 3xy2 + 4y2?
  3. To what expression must 99x3 – 33x2 – 13x – 41 be added to make the sum zero?
  4. If P = 2x2 – 5x + 2, Q = 5x2 + 6x – 3 and R = 3x2 – x – 1. Find the value of 2P – Q + 3R.
  5. If A = -(2x + 3), B = -3(x – 2) and C = -2x + 7. Find the value of k if (A + B + C) = kx.
  6. Find the perimeter of the given figure ABCDEF.
Algebraic Expressions Class 7 Extra Questions Maths Chapter 12 Q20
  1. Rohan’s mother gave him ₹ 3xy2 and his father gave him ₹ 5(xy2 + 2). Out of this total money he spent ₹ (10 – 3xy2) on his birthday party. How much money is left with him?

Answer Key-

Multiple Choice questions-

  1. (a) 1
  2. (b) 2
  3. (c) 3
  4. (d) 4
  5. (d) 4
  6. (c) -1
  7. (a) y2
  8. (d) -3z
  9. (b) 1 + z
  10. (a) 2 + y2
  11. (c) -x
  12. (c) 3
  13. (a) 5 – 10x
  14. (d) 0
  15. (d) 0

Very Short Answer:

Algebraic Expressions Class 7 Extra Questions Maths Chapter 12 Q1
  1. Group of like terms are:

(i) -8x2y, 2x2y

(ii) 3x, -32x

(iii) 4y, -y

  1. (i) -32x, y → Unlike Terms

(ii) -x, 3x → Like Terms

(iii) -12y2x, 32xy2 → Like Terms

(iv) 1000, -2 → Like Terms

  1. (i) -6 is monomial

(ii) -5 + x is binomial

(iii) 32x – y is binomial

(iv) 6x2 + 5x – 3 is trinomial

(v) z2 + z is binomial

Algebraic Expressions Class 7 Extra Questions Maths Chapter 12 Q5
  1. (i) Constant term = -3

(ii) Constant term =32

(iii) Constant term = -1

  1. (i) 3x2y, -5x2y, -x2y

= 3x2y + (-5x2y) + (-x2y)

= 3x2y – 5x2y – x2y

= (3 – 5 – 1) x2y

= -3x2y

(ii) a + b – 3, b + 2a – 1

= (a + b – 3) + (b + 2a – 1)

= a + b – 3 + b + 2a – 1

= a + 2a + b + b – 3 – 1

= 3a + 2b – 4

  1. (5x – x2) – (3x2 – x)

= 5x – x2 – 3x2 + x

= 5x + x – x2 – 3x2

= 6x – 4x2

  1. (i) a – (a – b) – b – (b – a)

= a – a + b – b – b + a

= (a – a + a) + (b – b – b)

= a – b

(ii) x2 – 3x + y2 – x – 2y2

= x2 + y2 – 2y2 – 3x – x

= x2 – y2 – 4x

Short Answer:

  1. (30xy + 12y – 14x) – (24xy – 10y – 18x)

= 30xy + 12y – 14x – 24xy + 10y + 18x

= 30xy – 24xy + 12y + 10y – 14x + 18x

= 6xy + 22y + 4x

  1. Sum of the given term is (2x2 + 3xy – 5) + (7 + 2xy – x2)

= 2x2 + 3xy – 5 + 7 + 2xy – x2

= 2x2 – x2 + 3xy + 2xy – 5 + 7

= x2 + 5xy + 2

Now (x2 + 5xy + 2) – (3xy + x2 – 2)

= x2 + 5xy + 2 – 3xy – x2 + 2

= x2 – x2 + 5xy – 3xy + 2 + 2

= 0 + 2xy + 4

= 2xy + 4

  1. (5y – 3x2 + xy) – (3x2 – 5y – 2)

= 5y – 3x2 + xy – 3x2 + 5y + 2

= -3x2 – 3x2 + 5y + 5y + xy + 2

= -6x2 + 10y + xy + 2

Putting x = 2 and y = -1, we get

-6(2)2 + 10(-1) + (2)(-1) + 2

= -6 × 4 – 10 – 2 + 2

= -24 – 10 – 2 + 2

= -34

  1. (i) 3(2x – 4) + x2 + 5

= 6x – 12 + x2 + 5

= x2 + 6x – 7

Putting x = -2, we get

= (-2)2 + 6(-2) – 7

= 4 – 12 – 7

= 4 – 19

= -15

(ii) -2(-3x + 5) – 2(x + 4)

= 6x – 10 – 2x – 8

= 6x – 2x – 10 – 8

= 4x – 18

Putting x = -2, we get

= 4(-2) – 18

= -8 – 18

= -26

  1. 3x2 + 5x – 2t = 8 at x = -1

⇒ 3(-1)2 + 5(-1) – 2t = 8

⇒ 3(1) – 5 – 2t = 8

⇒ 3 – 5 – 2t = 8

⇒ -2 – 2t = 8

⇒ 2t = 8 + 2

⇒ -2t = 10

⇒ t = -5

Hence, the required value of t = -5.

Long Answer:

  1. Sum of the given terms:
Algebraic Expressions Class 7 Extra Questions Maths Chapter 12 Q15

Required expression

  1. We have
Algebraic Expressions Class 7 Extra Questions Maths Chapter 12 Q16

Required expression

  1. Given expression:

99x3 – 33x2 – 13x – 41

Negative of the above expression is

-99x3 + 33x2 + 13x + 41

(99x3 – 33x2 – 13x – 41) + (-99x3 + 33x2 + 13x + 41)

= 99x3 – 33x2 – 13x – 41 – 99x3 + 33x2 + 13x + 41

= 0

Hence, the required expression is -99x3 + 33x2 + 13x + 41

  1. 2P – Q + 3R = 2(2x2 – 5x + 2) – (5x2 + 6x – 3) + 3(3x2 – x – 1)

= 4x2 – 10x + 4 – 5x2 – 6x + 3 + 9x2 – 3x – 3

= 4x2 – 5x2 + 9x2 – 10x – 6x – 3x + 4 + 3 – 3

= 8x2 – 19x + 4

Required expression.

  1. A + B + C = -(2x + 13) – 3(x – 2) + (-2x + 7)

= -2x – 13 – 3x + 6 – 2x + 7

= -2x – 3x – 2x – 13 + 6 + 7

= -7x

Since A + B + C = kx

-7x = kx

Thus, k = -7

  1. Required perimeter of the figure

ABCDEF = AB + BC + CD + DE + EF + FA

= (3x – 2y) + (x + 2y) + (x + 2y) + (3x – 2y) + (x + 2y) + (x + 2y)

= 2(3x – 2y) + 4(x + 2y)

= 6x – 4y + 4x + 8y

= 6x + 4x-4y + 8y

= 10x + 4y

Required expression.

  1. Money give by Rohan’s mother = ₹ 3xy2

Money given by his father = ₹ 5(xy2 + 2)

Total money given to him = ₹ 3xy2 + ₹ 5 (xy2 + 2)

= ₹ [3xy2 + 5(xy2 + 2)]

= ₹ (3xy2 + 5xy2 + 10)

= ₹ (8xy2 + 10).

Money spent by him = ₹ (10 – 3xy)2

Money left with him = ₹ (8xy2 + 10) – ₹ (10 – 3xy2)

= ₹ (8xy2 + 10 – 10 + 3x2y)

= ₹ (11xy2)

Hence, the required money = ₹ 11xy2