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Class 7 हिन्दी – अध्याय-6: गारो

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पढ़ो और समझो प्रश्न (पृष्ठ संख्या 32)

प्रश्न 1 जन + जाति = जनजाति

उत्तर- जनजाति शब्द दो शब्द ‘जन’ तथा ‘जाति’ से मिलकर बना है। इसका अर्थ है लोगों की जाति (समूह)। प्रायः यह शब्द भारत के आदिवासी लोगों के लिए प्रयोग किया जाता है।

प्रश्न 2 शांति + प्रिय = शांतिप्रिय

उत्तर- शांतिप्रिय शब्द दो शब्द ‘शांति’ तथा ‘प्रिय’ शब्दों से मिलकर बना है। इसका अर्थ है ऐसे लोग जिन्हें शांति पसंद होती है।

प्रश्न 3 महा + पुरुष = महापुरुष’

उत्तर- महापुरुष यह शब्द दो शब्दों ‘महा’ तथा ‘पुरुष’ से मिलकर बना है। इसका अर्थ है महान पुरुष।

प्रश्न 4 मित्रता + पूर्ण = मित्रतापूर्ण

उत्तर- मित्रतापूर्ण यह शब्द भी दो शब्दों ‘मित्रता’ तथा ‘पूर्ण’ शब्द से मिलकर बना है। इसका अर्थ है ऐसा व्यवहार जिसमें मित्र के समान स्नेह विद्यमान हो।

पाठ संबंधी प्रश्न (पृष्ठ संख्या 32)

प्रश्न 1 पाठ के आधार पर गारो जनजाति के बारे में कुछ पंक्तियाँ लिखो।

उत्तर- गारो एक जनजाति का नाम है। इनका संबंध चीन और तिब्बत से माना जाता है। प्राचीनकाल में यह खाने-पीने के साधनों की तलाश में एक स्थान से दूसरे स्थान तक विचरते रहते थे। मेघालय को इन्होंने अपना लिया और यहीं के हो गए। इस जनजाति के लोग शांति प्रिय होते हैं। उन्हें प्रकृति से बहुत गहरा लगाव होता है। प्रकृति के बीच में रहना इन्हें विशेष प्रिय है। ये परिश्रमी साहसी और दृढ़ निश्चयी लोग होते हैं।

प्रश्न 2 गारो लोग एक स्थान पर क्यों बस जाना चाहते थे?

उत्तर- गारो लोग स्वयं के खानाबदोश जीवन से तंग आ चुके थे। भोजन के लिए कई-कई दिनों तक भटकते रहना, विषम परिस्थितियों तथा मौसम का सामना करना व जंगली जानवरों के हमले से वे थक चुके थे। वे अपने लिए सुरक्षित और उपजाऊ स्थान चाहते थे जहाँ रहकर वह एक सुरक्षित और अच्छा जीवन जी सके। इसलिए वह किसी अच्छे स्थान पर बस जाना चाहते थे।

प्रश्न 3 जा पा जलिन पा और सुक पा बुंगि पा का नाम आदर से क्यों लिया जाता है?

उत्तर- इन दोनों ने ही अपनी जाति के विकास और सुरक्षा के लिए सुंदर स्थान खोजा था। मेघालय राज्य इनके ही महत्वकांशा का परिणाम था। आज गारो जनजाति सभ्य और फल-फूल रही है, तो इन दोनों के दृढ़ निश्चय के कारण। इसलिए इन दोनों का नाम गारो जाति में बड़े आदर से लिया जाता है।

सोचो और जवाब दो (पृष्ठ संख्या 32)

प्रश्न 1 जंगलों से हमें कौन-कौन सी चीज़ें प्राप्त होती हैं?

उत्तर- जंगलों से हमें कंद-मूल, फल-फूल, औषधियाँ, लकड़ियाँ इत्यादि प्राप्त होता है।

प्रश्न 2 गारो पहाड़ किस प्रदेश में हैं? मानचित्र पर उस प्रदेश का नाम लिखो।

उत्तर- गारो पहाड़ मेघालय में स्थित है। मानचित्र में इसे देखें-

कुछ यह भी करो (पृष्ठ संख्या 32-33)

प्रश्न 1 अपने प्रदेश या किसी अन्य राज्य की किसी जनजाति के बारे में पता करो। उसके बारे में अपनी कक्षा में बताओ।

उत्तर- ‘मुंडा’ जनजाति झारखण्ड की मुख्य जनजातियों में से एक है। यह भारत की पुरानी जनजातियों में से एक कही जाती है। अधिकत्तर मुंडा रांची जिले में ही निवास करते हैं। इनकी भाषा मुंडारी कही जाती है। इनका मुख्य पेशा कृषि है। जंगल इनकी जीविका का मुख्य तथा उपयोगी साधन है। यह जनजाति अपनी लोककथा और लोकगीतों के लिए विश्व में खासी प्रसिद्ध है।

प्रश्न 2 यह पाठ एक लोककथा पर आधारित है। अगर तुमने भी कभी कोई लोककथा सुनी है तो लोककथा और सामान्य कहानी के बारे में अपनी कक्षा में चर्चा करो।

उत्तर- लोककथा और समान्य कहानी में बहुत अंतर होता है। लोककथा किसी सत्य कहानी पर आधारित होती है जबकि सामान्य कहानी काल्पनिक होती है। लोककथा हमारी संस्कृति का आधार होती है। सामान्य कहानी के साथ ऐसा होना आवश्यक नहीं होता। लोककथा में उस समय के जन-जीवन का सजीव चित्रण होता है, समान्य कहानी में इस तत्व का अभाव होता है। ये हमारी अमूल्य धरोहर हैं, जो सदियों से एक-से दूसरी और दूसरी से तीसरी पीढ़ी को मिल रही हैं। सामान्य कहानी में ऐसा नहीं होता। लोककथा मौखिक रुप में जीवित होती हैं। सामान्य कहानी लिखित अवस्था में होती हैं। लोककथा के निर्माण के विषय में जानकारी प्राप्त नहीं होती है। परन्तु सामान्य कहानी में सभी जानकारी मिल जाती हैं।

प्रश्न 3 गारो लोगों ने बहुत लंबी यात्रा की थी। यदि तुमने भी कोई लंबी यात्रा की हो तो अपनी यात्रा के बारे में लिखो।

उत्तर- एक बार में अपने पिताजी के साथ दिल्ली से गढ़वाल गया हुआ था। हमने पूरी रात बस में बैठकर सफ़र किया। सुबह रामनगर पहुँचकर हमने अपने गाँव तक की दूसरी बस ली। वहाँ से हमारी यात्रा बहुत दुर्गम थी। वातावरण जितना मनभावन और रमणीय था। सफ़र उतना ही कठिन था। बस धीमी गति से चल रही थी; तब भी हमें डर लग रहा था। दोपहर बारह बजे हमारी बस ने हमें एक पक्की सड़क के किनारे छोड़ दिया। वहाँ पहुँचकर तो ऐसा लगा मानो मैं स्वर्ग में पहुँच गया हूँ। ठंडी हवा चल रही थी। चारों तरफ हृदय को आनंदित करने वाला दृश्य विद्यमान था। मेरे मामा हमें लेने आए थे। हमारा घर पहाड़ की तराई पर था। हमें नीचे तक पैदल यात्रा करनी थी। सारा सामान उन्होंने अपने कंधो पर उठा लिया। हम जंगल के रास्ते से गुज़रे। वहाँ शांति छायी हुई थी। कहीं-कहीं पर पानी की आवाज़ या पक्षियों का स्वर सुनाई पड़ रहा था। उस असीम शांति में सुकून और भय का मिला जुला स्वरूप विद्यमान था। हमें यह लग रहा था कि कोई जंगली जानवर न आ जाए। दो घंटे की उतराई ने हमारा दम ही निकाल दिया। परन्तु गाँव पहुँचकर हमने बड़ी राहत की साँस ली।

बार-बार बोलो (पृष्ठ संख्या 33)

प्रश्न 1 वर्षों तक इस प्रकार यात्रा होती रही।

वर्षों तक इस प्रकार यात्रा होती ही रही।

नीचे लिखे वाक्यों में सही जगह पर ‘ही’ लगाकर बोलो-

  1. सुधा सुबह तक पढ़ती रही।
  2. यह पंखा हमेशा आवाज़ करता रहता है।
  3. गारो लोगों का खानाबदोश जीवन कई सालों तक चलता रहा।
  4. सुशील थककर सो गया।
  5. दो घंटे बाद बस चल पड़ी।

उत्तर-  

  1. सुधा सुबह तक पढ़ती ही रही।
  2. यह पंखा हमेशा आवाज़ करता ही रहता है।
  3. गारो लोगों का खानाबदोश जीवन कई सालों तक चलता ही रहा।
  4. सुशील थककर सो ही गया।
  5. दो घंटे बाद बस चल ही पड़ी।

सही-सही (पृष्ठ संख्या 33)

प्रश्न 1 नीचे लिखे शब्दों में सही अक्षर भरो-

Graphical user interface, diagram, website

Description automatically generated

उत्तर- 

विषयसाहसआकर्षकपुरुष
शेषविषविषमशत्रु
षटकोणवर्षावर्षसमुद्र
सहज   

शब्दों की रचना (पृष्ठ संख्या 33)

प्रश्न 1 सामाजिक, पारंपारिक, ये शब्द इक (तद्धित) प्रत्यय लगाकर बनाए गए हैं। इसी प्रकार इक प्रत्यय लगाकर पाँच शब्द बनाओ।

उत्तर- 

  1. साप्ताहिक
  2. व्यापारिक
  3. सांसारिक
  4. वैवाहिक
  5. व्यवहारिक

Class 7 हिन्दी – अध्याय-5: थोड़ी धरती पाऊँ

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कविता संबंधी प्रश्न (पृष्ठ संख्या 25)

सर्वेस्वरदयाल सक्सेना

प्रश्न 1 कवि बाग-बगीचा क्यों लगाना चाहता है?

उत्तर- कवि बाग-बगीचा धरती को हरा-भरा बनाए रखने के लिए लगाना चाहता है ताकि वहाँ फूल-फल खिलें और अपनी खुशबू फैलाए, चिड़ियाँ चहचहाएँ और ताजी हवा जलाशय से होकर बहे।

प्रश्न 2 कविता में कवि की क्या विनती है?

उत्तर- कविता में कवि ने पेड़ों को नहीं काटने की साथ ही जो उन्हें काटें उन्हें भी रोकने की विनती की है।

प्रश्न 3 कवि क्यों कह रहा है कि

‘आज सभ्यता वहशी बन,

पेड़ों को काट रही है।’

उत्तर- कवि दिन-प्रतिदिन पेड़ों को कटते देख रहा है। मानव केवल अपने फायदे के लिए पेड़ों की अंधाधुंध कटाई कर रहा है। वह इनसे होने वाले नुकसान के बारे में नहीं सोच रहा है। वृक्षों की अंधाधुंध कटाई होने से वातावरण में प्रदुषण फैल रहा है जिससे कई प्रकार की बीमारियाँ हो रही हैं। अनियमित बारिश, आँधी-तूफ़ान आ रहे हैं। इसलिए कवि ने मानव सभ्यता को वहशी कहा है।

प्रश्न 4 कविता की इस पंक्ति पर ध्यान दो –

“बच्चे और पेड़ दुनिया को हरा-भरा रखते हैं।”

अब तुम यह बताओ कि पेड़ और बच्चों में क्या समानता है? उसे अपने ढंग से लिखो।

उत्तर- जिस तरह पेड़ धरती को हरा-भरा रखते हैं, उसकी सुंदरता को बढ़ाते हैं उसी तरह बच्चे भी घर भी हरा-भरा रखते हैं अपनी किलकारी से घर की सुंदरता को बनाए रखते हैं।

कैसी लगी कविता (पृष्ठ संख्या 21)

प्रश्न 1 कविता पढ़ो और जवाब दो-

कविता की कौन-सी पंक्तियाँ सबसे अच्छीं लगीं?

उत्तर- तो विनती है यही,

कभी मत उस दुनिया को खोना

पेड़ों को मत कटने देना,

मत चिड़ियों को रोना।

प्रश्न 2 कविता पढ़ो और जवाब दो-

वे पंक्तियाँ क्यों अच्छी लगीं?

उत्तर- इन पंक्तियों में कवि ने मानव सभ्यता से विनती की है कि पेड़ों से हरी-भरी दुनिया को नहीं उजाड़िए। पेड़ों को ना काटिये, ना कटने दीजिये। ये सिर्फ आपकी ही जरूरत नहीं बल्कि उन पक्षियों की भी जरूरत है जो इनपर रहते हैं। यह इस कविता का मूल सन्देश है।

बातचीत (पृष्ठ संख्या 25-26)

प्रश्न 1 नीचे एक लकड़हारे और एक बच्ची की बातचीत दी गयी है। इसे अपनी समझ से पूरा करो।

बच्ची- ओ भैया! आप इस पेड़ को क्यों काट रहे हो?

लकड़हारा- यह तो मेरा काम है।

बच्ची- पर यह तो गलत है।

लकड़हारा- यह कैसे गलत है? इसी से तो मेरे परिवार का भरण-पोषण होता है।

उत्तर- बच्ची- पर काका आप दूसरा काम भी तो कर सकते हो। आपके पेड़ काटने से पर्यावरण को नुकसान पहुँच रहा है।

लकड़हारा- मुझे यही काम आता है तो मैं इस उम्र में दूसरा काम कैसे करुँ? और फिर मेरे एक पेड़ काटने से पर्यावरण को कैसे नुकसान हो सकता है?

बच्ची- यह बात तो ठीक है काका की इस उम्र में आप दूसरा काम नहीं खोज सकते पर पर्यावरण के लिए हर एक पेड़ महत्वपूर्ण है। आज आप एक पेड़ काटेंगे कल फिर दूसरा, इस तरह से तो धीरे धीरे सभी पेड़ का सफाया हो जायेगा।

लकड़हारा- बात तो तुम्हारी बिलकुल ठीक है पर मैं यह नहीं समझ पाया की पेड़ के कटाने से पर्यावरण को क्या नुकसान है?

बच्ची- पेड़ जब ऑक्सीजन देते हैं तब ही तो हम सांस ले पाते हैं। यह वायु को शुद्ध करते हैं और बारिश करवाने में मदद भी करते हैं। पेड़ों के कारण ही धरती का तापमान नियंत्रित रहता है।

लकड़हारा (सोचते हुए)- मैं सब समझ गया। मैं भी अब पेड़ों को नहीं काटना चाहता पर अपने भरण-पोषण के लिए कुछ तो करना ही पड़ेगा ना ? तुम ही कुछ उपाय बताओ जिससे पर्यावरण को नुकशान ना पहुँचे और मेरा काम भी हो जाए?

बच्ची (कुछ सोचते हुए)- काका, आप एक काम करो। जब भी आप एक पेड़ काटो तो उसके बदले दो पेड़ लगाओ और उनके बड़े होने तक देखभाल करो। इससे तुम्हारा काम भी हो जायेगा और पर्यावरण भी सुरक्षित रहेग

लकड़हारा (प्रसन्न होकर)- धन्यवाद बेटी! तुमने मेरी आँखे खोल दी और पर्यावरण को सुरक्षित रखने का उपाय भी निकाल लिया। अब से मैं ऐसा ही करूँगा।

बच्ची (प्रसन्न होकर)- आपका भी धन्यवाद काका। हम सभी ही मिलकर इस धरती को हरा भरा रख सकते हैं।

प्रश्न 2 नीचे लिखे वाक्य पढ़ो। उनमें इस्तेमाल हुए मुहावरों को अपने ढंग से इस्तेमाल करके कुछ और वाक्य बनाओ।

बलदेव के दिल में जो बात बैठ जाती; उसे पूरा करके ही छोड़ता।

उत्तर- दिमाग में जो बात बैठ जाती है, वो जल्दी नहीं हटती।

प्रश्न 3 नीचे लिखे वाक्य पढ़ो। उनमें इस्तेमाल हुए मुहावरों को अपने ढंग से इस्तेमाल करके कुछ और वाक्य बनाओ।

वह इतना डरा हुआ कि उसके उसके हाथ-पाँव फूल गए।

उत्तर- जंगल में शेर की दहाड़ सुनकर मोहन के हाथ-पाँव फूल गए।

प्रश्न 4 नीचे लिखे वाक्य पढ़ो। उनमें इस्तेमाल हुए मुहावरों को अपने ढंग से इस्तेमाल करके कुछ और वाक्य बनाओ।

ऐसा लगा जैसे कि किसी ने चीता का खून चूस लिया हो।

उत्तर- मालिक ने नौकर से काम करवा-करवाकर खून चूस लिया है।

प्रश्न 5 नीचे लिखे वाक्य पढ़ो। उनमें इस्तेमाल हुए मुहावरों को अपने ढंग से इस्तेमाल करके कुछ और वाक्य बनाओ।

बलदेव का दिल काँप उठा।

उत्तर- महेश को अस्पताल में देख उसके पिताजी का दिल काँप उठा।

बाग-बगीचा (पृष्ठ संख्या 26)

प्रश्न 1 तुम पेड़ों को बचाने के लिए क्या कुछ कर सकते हो? बताओ।

उत्तर- हम पेड़ों को बचने के लिए निम्नलिखित कार्य कर सकते हैं-

  • अपने जन्मदिन पर पेड़ लगाकर उसकी देखभाल कर सकते हैं।
  • अन्य व्यक्तियों को पेड़ कटाने से रोक सकते हैं।
  • हमें अपने दोस्तों, रिश्तेदारों और अन्य करीबियों को पेड़ों के महत्व के बारे बताना चाहिए और उन्हें भी पेड़ बचाने के प्रेरित करना चाहिए।
  • आसपास लगे पेड़ों का ध्यान रखना चाहिए।

प्रश्न 2 कविता में कवि ने बगीचे के बारे में बहुत कुछ बताया है। बताओ, नीचे लिखी चीज़ों में से कौन सी चीज़ें बगीचे में होंगी?

कारफूल
क्यारियाँचिड़ियाँ
सड़कफल
खेततालाब
कारखानेपेड़
कुर्सीकागज़
पत्ताटहनी

उत्तर- 

निम्नलिखित चीज़ें बगीचे में होंगी-

  • फूल
  • क्यारियाँ
  • चिड़ियाँ
  • फल
  • पेड़
  • टहनी
  • पत्ता

यह भी करो (पृष्ठ संख्या 26)

प्रश्न 1 तुम्हारे घर के पास कौन-कौन से पेड़-पौधे, पशु-पक्षी आमतौर पर नज़र आते हैं? उनकी सूची बनाओ।

उत्तर- पेड़- आम, अमरुद, पीपल, आशोक, नारियल, केला आदि।

पौधे- तुलसी, कड़ी पत्ता, मेहंदी, निंबु, चमेली आदि।

पशु- कुत्ता, गाय, बिल्ली, सांड, भैंस आदि।

पक्षी- कौआ, गौरैया, कबूतर, तोता, मैना आदि।

प्रश्न 2 अपने आस-पास पता करके ऐसे किसी व्यक्ति से बात करो जिसने कोई पेड़ या पौधा लगाया है। उससे पूछकर निम्नलिखित जानकारी प्राप्त करो-

  1. पेड़/ पौधे का नाम
  2. कब लगाया था?
  3. देखभाल की या नहीं?
  4. क्या वह पेड़/ पौधा अब भी मौजूद है?

उत्तर-

व्यक्ति एक:

  • अमरुद
  • चार साल
  • देखभाल की थी।
  • नहीं

व्यक्ति दो:

  • निम्बू
  • दो साल
  • देखभाल नहीं की थी।
  • नहीं

व्यक्ति तीन:

  • आम
  • तीन साल
  • देखभाल की थी।
  • हाँ

व्यक्ति चार:

  • नारियल
  • छ साल
  • देखभाल की थी।
  • हाँ

खोजबीन (पृष्ठ संख्या 27)

प्रश्न 1 हमारे देश में पुराने समय से ही पेड़-पौधों को लगाने और उन्हें कटने से बचाने की परंपरा रही है। कई बार लोगों ने मिलकर पेड़ों को बचाने के लिए आंदोलन भी किया। ऐसे ही किसी आंदोलन के बारे में जानकारी इकट्ठी करके कॉपी में लिखो। इसके लिए तुम्हें पुस्तकालय, समाचार-पत्रों, शिक्षिका या माता-पिता और इंटरनेट से भी सहायता मिल सकती है।

उत्तर- चिपको आंदोलन पेड़ों की सुरक्षा से जुड़ा आंदोलन था। यह आन्दोलन चमोली जिले में सन 1973 में प्रारम्भ हुआ।धीरे-धीरे यह आंदोलन पूरे उत्तराखंड में फैल गया। इस आंदोलन को सुंदरलाल बहुगुणा ने शुरू किया जिसमें स्त्रियों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। इसमें लोगों ने पेड़ों केा गले लगा लिया ताकि उन्हें कोई काट न सके। इसलिए इस आंदोलन का नाम चिपको पड़ा। यह आंदोलन पूरी तरह अहिंसक था और बेहद सफल हुआ।

समान अर्थ शब्दों (पृष्ठ संख्या 27)

प्रश्न 1 इन शब्दों के समान अर्थ वाले कुछ शब्दों को लिखो।

धरती-________

चिड़िया-________

हवा-________

पेड़- ________

दुनिया-_______ 

उत्तर- धरती – पृथ्वी, वसुधा

चिड़िया – पक्षी, पंछी

हवा – पवन, वायु

पेड़ – तरु, वृक्ष

दुनिया – विश्व, संसार

Class 7 हिन्दी – अध्याय-4: गुब्बारे पर चीता

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कहानी से प्रश्न (पृष्ठ संख्या 21)

प्रेमचंद

प्रश्न 1 हेडमास्टर साहब ने बच्चों को सरकस में जाने से क्यों मना किया होगा?

उत्तर- हेडमास्टर साहब सरकस में होने वाले खेलों को जानते थे। सरकस वाले होने वाले करतबों को बढ़ा-चढ़ाकर विज्ञापन में दिखाते हैं। जंगली जानवरों के होने से बच्चों के लिए खतरा भी बना रहता है। इसलिए उन्होंने बच्चों को सरकस में जाने से मना किया होगा।

प्रश्न 2 सरकस के बारे में कौन-कौन सी अफ़वाहें फैली हुईं थीं?

उत्तर- सरकस में शेर और बकरी एक बर्तन में पानी पिएँगे, हाथी पैरगाड़ी पर बैठेगा, तोता बंदूक छोड़ेगा और बनमानुष बाबू बनकर मेज पर बैठेगा। सरकस के बारे में ऐसी अफवाहें फैली हुईं थीं।

प्रश्न 3 बलदेव सरकस में जाकर निराश क्यों हो गया?

उत्तर- बलदेव को लगा था कि शक्तिशाली जंगली जानवर तरह-तरह के करतब करेंगें परन्तु जब उसने सरकस में शेर, बाघ, भालू जैसे जानवरों को कमजोर हालत में देखा तो वह निराश हो गया।

प्रश्न 4 बलदेव और चीता दोनों ऊपर उठते जा रहे थे। फिर भी चीते ने बलदेव को कोई नुकसान क्यों नहीं पहुँचाया?

उत्तर- चीता अपने प्राण संकट में देख बहुत डरा हुआ था। वह अपने प्राण बचाने की सोच रहा था, उस समय वह अपना सारा चीतापन भूल गया था इसलिए उसने बलदेव को कोई नुकसान नहीं पहुँचाया।

प्रश्न 5 कहानी के इस वाक्य पर ध्यान दो –

“इतने में उसे एक बड़ा भारी गुब्बारा दिखाई दिया” तुम्हें क्या लगता है कि गुब्बारा भारी होता है? लेखक ने उसे भारी क्यों कहा है?

उत्तर- मेरे समझ से गुब्बारा भारी नहीं होता है। लेखक ने गुब्बारे की विशालता दिखाने के लिए उसे भारी कहा है। भारी कहकर लेखक गुब्बारे के बड़े आकार की ओर इशारा कर रहे हैं।

सोचो और बताओ (पृष्ठ संख्या 21)

प्रश्न 1 गुब्बारे में से हवा निकलने पर वह नीचे क्यों आने लगता है?

उत्तर- गुब्बारे को ऊपर उड़ाने के लिए उसमें गरम हवा भरी जाती है। गरम हवा हल्की होती है। अत: गुब्बारा इसके कारण ऊपर उठने लगता है। जैसे-जैसे गुब्बारे में से हवा निकलने लगती है। गरम हवा का प्रभाव समाप्त होने लगता है। गुब्बारा भारी होने लगता है और गुरुत्वाकर्षण के कारण वह नीचे गिर जाता है।

प्रश्न 2 स्कूल में तुम्हें क्या-क्या करने के लिए अनुमति लेनी पड़ती है?

उत्तर- 

  1. स्कूल से बाहर जाने की अनुमति लेनी पड़ती है।
  2. किसी मित्र को बुलाने की अनुमति लेनी पड़ती है।
  3. बाहर से कुछ मंगवाने की अनुमति लेनी पड़ती है।
  4. देर से आने की अनुमति लेनी पड़ती है।
  5. अवकाश में जाने की अनुमति लेनी पड़ती है।
  6. पानी पीने जाने के लिए अनुमति लेनी पड़ती है।

प्रश्न 3 क्या तुमने अपने आस-पास के जानवरों की दुर्दशा देखी है? उसके बारे में बताओ।

उत्तर- मैंने चिड़ियाघर में जानवरों की दुर्दशा देखी है। उन्हें एक छोटे-से स्थान पर रखा जाता है। वहाँ उन्हें सही प्रकार का वातावरण नहीं मिलता है, जिसके कारण वे दुर्बल हो जाते हैं। पानी की सफ़ाई कई-कई दिनों तक नहीं होती जिसके कारण वे कई प्रकार की बीमारियों से भी ग्रस्त होते हैं।

प्रश्न 4 सरकस में जानवरों के करतब दिखाए जाते हैं। उनके प्रति क्रूरता बरती जाती है। क्या ऐसे सरकस को मनोरंजन का साधन माना जा सकता है? सरकस को स्वस्थ मनोरंजन का साधन बनाने के लिए क्या किया जाना चाहिए?

उत्तर- जिस सरकस में जानवरों के प्रति क्रूरता बरती जाती है, वह मनोरंजन के साधन नहीं माना जा सकता है। उस पर लगाम लगाना आवश्यक है। जानवरों को भी मनुष्य के समान जीने का अधिकार प्राप्त होना चाहिए। जानवरों के साथ, अच्छा व्यवहार किया जाना चाहिए। सरकस में ऐसे करतबों को स्थान दें, जिनमें जानवरों का प्रयोग ही नहीं किया जाए। यदि जानवरों को दिखाना बहुत आवश्यक है, तो उनसे ऐसे करतब करवाएँ जाएँ जिनमें उन्हें शारीरिक कष्ट न के बराबर हो। ऐसा करके हम सरकस को स्वस्थ मनोरंजन का साधन बना सकते हैं।

मुहावरे (पृष्ठ संख्या 22)

प्रश्न 1 नीचे लिखे वाक्य पढ़ो। उनमें इस्तेमाल हुए मुहावरों को अपने ढंग से इस्तेमाल करके कुछ और वाक्य बनाओ।

बलदेव के तो होश उड़े हुए थे।

उत्तर- पुलिस को देखते ही चोरों के होश उड़ गए।

प्रश्न 2 नीचे लिखे वाक्य पढ़ो। उनमें इस्तेमाल हुए मुहावरों को अपने ढंग से इस्तेमाल करके कुछ और वाक्य बनाओ।

बलदेव के दिल में जो बात बैठ जाती; उसे पूरा करके ही छोड़ता।

उत्तर- दिमाग में जो बात बैठ जाती है, वो जल्दी नहीं हटती।

प्रश्न 3 नीचे लिखे वाक्य पढ़ो। उनमें इस्तेमाल हुए मुहावरों को अपने ढंग से इस्तेमाल करके कुछ और वाक्य बनाओ।

वह इतना डरा हुआ कि उसके उसके हाथ-पाँव फूल गए।

उत्तर- जंगल में शेर की दहाड़ सुनकर मोहन के हाथ-पाँव फूल गए।

प्रश्न 4 नीचे लिखे वाक्य पढ़ो। उनमें इस्तेमाल हुए मुहावरों को अपने ढंग से इस्तेमाल करके कुछ और वाक्य बनाओ।

ऐसा लगा जैसे कि किसी ने चीता का खून चूस लिया हो।

उत्तर- मालिक ने नौकर से काम करवा-करवाकर खून चूस लिया है।

प्रश्न 5 नीचे लिखे वाक्य पढ़ो। उनमें इस्तेमाल हुए मुहावरों को अपने ढंग से इस्तेमाल करके कुछ और वाक्य बनाओ।

बलदेव का दिल काँप उठा।

उत्तर- महेश को अस्पताल में देख उसके पिताजी का दिल काँप उठा।

तुम्हारी बात (पृष्ठ संख्या 22)

प्रश्न 1 तुम्हारे स्कूल से भागने के कौन-कौन से बुरे परिणाम हो सकते हैं?

उत्तर- 

  1. स्कूल से निकाला जा सकता है।
  2. अध्यापकों की नज़रों में गिर सकते हैं।
  3. पढ़ाई से मन हट सकता है।
  4. माता-पिता के क्रोध का सामना करना पड़ सकता है।
  5. इसके लिए कठिन सज़ा भी मिल सकती है।
  6. बुरे लोगों के हाथ लग सकते हैं।
  7. बुरे लोगों द्वारा अपंग बनाया जा सकता है।
  8. किसी के द्वारा मारा भी जा सकता है।

प्रश्न 2 किसी चीज़ के प्रचार के लिए विज्ञापन का इस्तेमाल क्यों किया जाता है?

उत्तर- विज्ञापन आज प्रचार का सबसे प्रभावशाली, माध्यम है। विज्ञापन के माध्यम से लोगों को उत्पाद के विषय में जानकारी दी जाती है। इसके माध्यम से लोगों से सीधा संपर्क स्थापित किया जाता है।

प्रश्न 3 तुम भी सड़क सुरक्षा, प्रदूषण और शिक्षा के बारे में विज्ञापन बनाकर अपने मित्र को दिखाओ तथा पूछो कि उसे तुम्हारा विज्ञापन पसंद आया या नहीं। कारण भी पूछो।

उत्तर- इस प्रश्न का उत्तर विद्यार्थी स्वयं करें।

Class 7 हिन्दी – अध्याय-3: मैं हूँ रोबोट

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पाठ संबंधी प्रश्न (पृष्ठ संख्या 15)

-राजीव गर्ग

प्रश्न 1 तुममें और रोबोट में क्या-क्या अंतर है?

उत्तर- रोबोट का शरीर लोहा-इस्पात और प्लास्टिक का बना होता है वहीं इंसान का शरीर हड्डियों तथा माँस का बना होता है।

रोबोट दिए गए आदेश के अनुसार काम करता है वहीं मनुष्य अपनी इच्छानुसार काम करता है।

रोबोट के शरीर में तारों का जाल बिछा होता है जिनमें विद्युत की धारा बहती है वहीं मनुष्य के शरीर में शिराओं और धमनियों का जाल बिछा होता है जिसमें खून की धारा बहती है।

रोबोट किसी भी वातावरण में काम कर सकता है जो की मनुष्य नही कर सकता है।

रोबोट गंध का अनुभव नहीं कर सकता वहीँ मनुष्य गंध का अनुभव कर सकता है।

प्रश्न 2 अगर तुम्हें रोबोट से कुछ करवाना हो तो क्या करोगे?

उत्तर- छात्र अपनी निजी राय दें।

सही मिलान करो (पृष्ठ संख्या 15)

प्रश्न 1 सही मिलान करो

क.तुम्हारे शरीर मेंचाँद पर पहुँचा है।
ख.मनुष्य अपने बुद्धि के बल से शिराओं और धमनियों का जाल बिछा हुआ है।
ग.रोबोट का मस्तिष्क लोहा-इस्पात और प्लास्टिक का बना है।
घ.रोबोट का शरीरविषैले और विषम वातावरण में काम कर सकता है।
ड़.रोबोटकंप्यूटर है।

उत्तर-

क.तुम्हारे शरीर मेंशिराओं और धमनियों का जाल बिछा हुआ है।
ख.मनुष्य अपने बुद्धि के बल सेचाँद पर पहुँचा है।
ग.रोबोट का मस्तिष्क कंप्यूटर है।
घ.रोबोट का शरीरलोहा-इस्पात और प्लास्टिक का बना है।
ड़.रोबोटविषैले और विषम वातावरण में काम कर सकता है।

सोचो और जवाब दो (पृष्ठ संख्या 15)

प्रश्न 1 अगर रोबोट की आँखें या हाथ न होते तो कौन-कौन सा काम नहीं कर पाता?

उत्तर- अगर रोबोट की आँखें या हाथ ना होते तो वह कुछ देख नहीं पाता, मांगीं गयीं चीज़ों का ला नहीं पाता। अन्य बहुत सारे काम नहीं कर पाता जैसे सामान लाना, सफाई करना, बोझ नहीं उठा पाता आदि।

प्रश्न 2 रोबोट ऐसे कौन-कौन से काम कर सकता है जो मनुष्य नहीं कर सकता।

उत्तर- रोबोट बेहद गर्म चीज़ों को अपने हाथों से पकड़ सकता है और बिना कुछ खाए-पिये, कितने भी गर्म या ठंडे, गंदे वातावरण में में रहकर काम कर सकता है। गहरे से गहरे समुद्र में भी चीज़ों को खोज सकता है। खतरनाक और अनजान ग्रहों पर जाकर उनका अध्यन कर सकता है।

प्रश्न 3 रोबोट ऐसे कौन-कौन से काम नहीं कर सकता जो मनुष्य कर सकता है।

उत्तर- मनुष्य गंध का अनुभव सकता है जो कि रोबोट नहीं कर सकता।

मनुष्य सुख-दुःख का अनुभव कर सकता है जो की रोबोट नहीं कर सकता।

नमूने के अनुसार लिखो (पृष्ठ संख्या 16)

प्रश्न 1 नमूना- सजीव – निर्जीव

क़. सम –

ख. गर्मी –

ग. गन्दा –

घ. कम –

ड़. जीवन –

च. हाजिर –

उत्तर- नमूना- सजीव – निर्जीव

क़. सम – विषम

ख. गर्मी – सर्दी

ग. गन्दा – साफ

घ. कम – ज्यादा

ड़. जीवन – मरण

च. हाजिर – गैरहाजिर  

वाक्य पुरा करो (पृष्ठ संख्या 16)

प्रश्न 1 मेरा शरीर हाड़-माँस का नहीं______लोहा-इस्पात और प्लास्टिक का बना है। (बल्कि/ या)

उत्तर- मेरा शरीर हाड़-माँस का नहीं बल्कि लोहा-इस्पात और प्लास्टिक का बना है। (बल्कि/ या)

प्रश्न 2 वेणु सातवीं कक्षा में पढ़ता है_______उसकी बहन आठवीं कक्षा में पढ़ती है। (और/ फिर)

उत्तर- वेणु सातवीं कक्षा में पढ़ता है और उसकी बहन आठवीं कक्षा में पढ़ती है।

मेरे विचार से असली गरीब मंजरी है। वह केवल कनक से ईर्ष्या करती थी। जब कनक ने उसे डूबने से बचाया तब उसे अपने असहाय होने का पता चला जो कि सच्चे अर्थ में गरीब की निशानी है।

प्रश्न 3 पहले खाना खा लो_______पढ़ना। (लेकिन/ फिर)

उत्तर- पहले खाना खा लो फिर पढ़ना।

प्रश्न 3 तुम्हें घूमना पसंद है________खेलना? (किंतु/ या)

उत्तर- तुम्हें घूमना पसंद है या खेलना?

प्रश्न 4 मैं तैरना चाहता हूँ_______मुझे तैरना नहीं आता। (लेकिन/ और)

उत्तर- मैं तैरना चाहता हूँ लेकिन मुझे तैरना नहीं आता।

प्रश्न 5 छाता लेकर जाओ_______भीग जाओगे। (फिर/ वरना)

उत्तर- छाता लेकर जाओ वरना भीग जाओगे।

Class 7 हिन्दी – अध्याय-2: सबसे सुंदर लड़की

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वाक्य जोड़ो (पृष्ठ संख्या 9)

-विष्णु  प्रभाकर

नमूना

नमूना- सहेलियाँ नाचती हैं। वे गाती भी हैं।

सहेलियाँ नाचती-गाती हैं।

लहरें उछलती हैं। वे कूदती भी हैं।

उत्तर- लहरें उछलती-कूदती हैं।

नमूना- 

सहेलियाँ नाचती हैं। वे गाती भी हैं।

सहेलियाँ नाचती-गाती हैं।

सब बच्चे हँसते हैं। वे खेलते भी हैं।

उत्तर- सब बच्चे हँसते-खेलते हैं।

नमूना- 

नमूना- सहेलियाँ नाचती हैं। वे गाती भी हैं।

सहेलियाँ नाचती-गाती हैं।

मेरी माँ पढ़ना जानती है। वह लिखना भी जानती हैं।

उत्तर- मेरी माँ पढ़ना-लिखना जानती हैं।

कहानी से (पृष्ठ संख्या 9)

प्रश्न 1 हर्ष और कनक छोटे होने पर भी समुद्र की लहरों में कैसे तैर सकते थे?

उत्तर- हर्ष और कनक समुद्र के किनारे रहते थे। उन्हें तैरने का कई वर्षो का अनुभव था इसलिए वे समुद्र की लहरों में भी तैर सकते थे।

प्रश्न 2 हर्ष का पिता क्या काम करता था?

उत्तर- हर्ष के पिता कलाकार थे। वे समुद्र में जाल डालकर सीपियाँ, रंग-बिरंगी कौड़ियाँ, अनेक प्रकार के सुंदर-सुंदर शंख, चित्र-विचित्र पत्थर बटोरते और उनसे वह तरह-तरह के खिलौने और मालाएँ तैयार करते जिसे वह पास के बड़े नगर में बेच आते।

प्रश्न 3 कनक छोटे-छोटे शंखों की मालाएँ बनाकर क्यों बेचती थी?

उत्तर- कनक के पिता की मृत्यु हो चुकी थी। माँ मछलियाँ बेचकर घर चलातीं थी। उनकी आर्थिक सहायता करने के लिए कनक छोटे-छोटे शंखों की मालाएँ बनाकर बेचती थी।

प्रश्न 4 मंजरी को कनक क्यों नहीं भाती थी?

उत्तर- कनक एक अच्छी तैराक थी। वह हर्ष के साथ हाथ में हाथ डालकर तूफ़ानी लहरों पर दूर निकल जाती, ऐसा देखना मंजरी को अच्छा नहीं लगता इसलिए उसे कनक नहीं भाती।

प्रश्न 5 मंजरी ने कनक को अपना खिलौना क्यों दे दिया?

उत्तर- मंजरी ने कनक को अपना खिलौना इसलिए दिया क्योंकि उसने मंजरी को समुद्र की लहरों में डूबने से बचाया था। मंजरी की नजरों में वह सबसे सुंदर लड़की थी।

रिक्त स्थान भरो (पृष्ठ संख्या 9)

प्रश्न 1 नमूना- गुड़िया जैसी सुंदर

  1. दूध जैसा  ______
  2. हाथी जैसा ______ 
  3. रात जैसा ______
  4. रुई जैसा _____
  5. (ड़) चीनी जैसा _____

उत्तर- 

  1. दूध जैसा  सफ़ेद
  2. हाथी जैसा मोटा
  3. रात जैसा अँधेरा
  4. रुई जैसा मुलायम
  5. चीनी जैसा मीठा

कौन कैसा (पृष्ठ संख्या 10)

प्रश्न 1 नीचे कुछ शब्द लिखें हैं। उन्हें उचित खाने में लिखो।

दयालु, डरपोक, साहसी, सुंदर, अमीर, गरीब, समझदार, लालची,  ईर्ष्यालु, अच्छी, मेहनती, आलसी, मूर्ख, लापरवाह, मनमौजी।

उत्तर-  

कनकमंजरी
दयालुडरपोक
साहसीईर्ष्यालु
गरीब अमीर
समझदारलालची
अच्छीलापरवाह
मेहनतीमुर्ख
मनमौजीआलसी

सुंदर (पृष्ठ संख्या 10)

प्रश्न 1 मंजरी बिलकुल गुड़िया जैसी सुंदर थी। तुम्हें सबसे सुंदर कौन लगती/ लगता है? क्यों?

उत्तर- मंजरी बिलकुल गुड़िया जैसी सुंदर थी। परन्तु हमें कनक सबसे सुंदर लगती है। इसके पीछे यह कारण है कि कनक, मंजरी के समान सुंदर नहीं थी। परन्तु हृदय से वह बहुत सुंदर थी। उसे किसी से ईर्ष्या नहीं थी, वह मेहनती थी, अपनी माताजी की बहुत सहायता करती थी, वह बहादुर और निस्वार्थ लड़की थी। मंजरी की जान बचाते हुए उसने अपने प्राणों की भी चिंता नहीं की थी। अत: वही सबसे सुंदर थी। उसके गुण बहुत अच्छे थे। मंजरी में इन गुणों का अभाव था।

गरीब (पृष्ठ संख्या 10)

प्रश्न 1 “वह बेचारी थी बड़ी गरीब।”

लोग आमतौर पर गरीबों को बेचारा और असहाय क्यों मानते हैं? कहानी में कनक को बेचारी कहा गया है जबकि वह निडर और दूसरों की सहायता करने वाली लड़की थी। दूसरी ओर मंजरी गरीब नहीं थी पर ईर्ष्यालु और डरपोक थी। तुम्हारे विचार से असली गरीब कौन है?

उत्तर- लोग आमतौर पर धन को ताकतवर होने का मापक मानते हैं। वे सोचते हैं जो धनवान है वही ताकतवर है। गरीब कुछ नहीं कर सकता, वह असहाय है।

मेरे विचार से असली गरीब मंजरी है। वह केवल कनक से ईर्ष्या करती थी। जब कनक ने उसे डूबने से बचाया तब उसे अपने असहाय होने का पता चला जो कि सच्चे अर्थ में गरीब की निशानी है।

प्रश्न 2 तुमने अपने आस-पास अमीर और गरीब, दोनों तरह के लोग देखे होंगे। तुम्हारे विचार से गरीबी के क्या कारण हो सकते हैं?

उत्तर- अशिक्षा गरीबी का प्रमुख कारण है। अशिक्षित लोगों को ढंग का रोजगार नहीं मिल पाता जिससे कारण उन्हें कम वेतन मिलता है।

प्रश्न 3 अमीरी और गरीबी के अंतर को कैसे दूर किया जा सकता है? कुछ उपाय सुझाओ।

उत्तर- अमीरी और गरीबी के अंतर को दूर करने के लिए हमें इन उपायों को अपनाना होगा-

  • शिक्षा को बढ़ावा देना।
  • न्यूनतम मजदूरी को बढ़ाना तथा इसे लागू करने के लिए कड़े कानून बनाना।
  • रोजगार की संख्या को बढ़ाना।
  • जनसंख्या वृद्धि में कमी लाना।

जन्मदिन (पृष्ठ संख्या 10)

प्रश्न 1 क्या तुम्हारा जन्मदिन मनाया जाता है?

उत्तर- हाँ मेरा जन्मदिन मनाया जाता है।

प्रश्न 2 तुम्हारे कितने दोस्तों और संबंधियों का जन्मदिन मनाया जाता है और कितनों का नहीं मनाया जाता?

उत्तर- मेरे भईया, दीदी, मित्रों इत्यादि का जन्मदिन मनाया जाता है।

मेरे माता-पिताजी, दादा-दादी, नानी-नानी का जन्मदिन नहीं मनाया जाता है।

समुद्र (पृष्ठ संख्या 11)

प्रश्न 1 भारत के मानचित्र को देखो। भारत तीन दिशाओं से समुद्र से घिरा है। उन तीनों दिशाओं के नाम मानचित्र में भरो। समुद्र के पास वाले राज्यों के नाम भी भरो।

उत्तर- पश्चिम दिशा, पूर्व दिशा और दक्षिण दिशाओं से भारत समुद्र से घिरा है।

समुद्र के पास वाले राज्यों के नाम – गुजरात, गोवा, महाराष्ट्र, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, ओड़िशा, पश्चिम बंगाल

वाक्य बनाओ (पृष्ठ संख्या 11)

प्रश्न 1 उसके पिता एक सुंदर-सा खिलौना बनाने में लगे हैं।’इस वाक्य में ‘सुंदर-सा’ लगाकर वाक्य बनाया गया है। तुम भी साधारण, बड़ा, छोटा, लंबा, गोल, चौकोर और त्रिकोण शब्द में सा, से या सी का प्रयोग कर वाक्य बनाओ।

उत्तर- साधारण-सा – उसके पास एक साधारण-सा खिलौना है।

बड़ा-सा – मैंने एक बड़ा-सा हाथी देखा।

छोटा-सा – मेरे पास एक छोटा-सा बैग है।

लंबा-सा – वहाँ एक लंबा-सा साँप है।

गोल-सी – उसने मुझे एक गोल-सी मिठाई खिलाई।

चौकोर-सा – मुझे वह चौकोर-सा बर्तन दो। 

त्रिकोण-सी – उसने पन्ने पर एक त्रिकोण-सी आकृति बनाई।

Class 7 हिन्दी – अध्याय-1: चिड़िया और चुरुंगुन

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अभ्यास नमूने के अनुसार (पृष्ठ संख्या 3)

-हरिवंश राय बच्चन

नमूना

छोड़ घोंसला बाहर आया,

देखी डालें, देखे पात।

चुरुंगन घोंसला छोड़कर बाहर आया। उसने डालें और पत्ते देखे।

डाली से डाली पर पहुँचा,

देखीं कलियाँ देखे फूल।

उत्तर- चुरुंगुन एक डाली से दूसरी डाली पर पहुँचा। उसने कलियाँ और फूल देखे।

नमूना- छोड़ घोंसला बाहर आया,

देखी डालें, देखे पात।

चुरुंगन घोंसला छोड़कर बाहर आया। उसने डालें और पत्ते देखे।

खाने-गाने के सब साथी,

देख रहे हैं मेरी बाट।

उत्तर- चुरुंगुन के खानेगाने वाले सब साथी, उसकी राह देख रहे हैं।

नमूना- छोड़ घोंसला बाहर आया,

देखी डालें, देखे पात।

चुरुंगन घोंसला छोड़कर बाहर आया। उसने डालें और पत्ते देखे।

कच्चे-पक्के फल पहचाने,

खाए और गिराये काट।

उत्तर- चुरूंगुन कच्चेपक्के फल पहचानने लगा है। उसने कुछ फल खाए और काटकर गिराये हैं।

नमूना- छोड़ घोंसला बाहर आया,

देखी डालें, देखे पात।

चुरुंगन घोंसला छोड़कर बाहर आया। उसने डालें और पत्ते देखे।

उस तरु से इस तरु पर आता,

   जाता हूँ धरती की ओर।

उत्तर- चुरुंगुन एक तरु से दूसरे तरु पर आताजाता रहता है। वह धरती की ओर भी जाता है।

कविता से (पृष्ठ संख्या 3-4)

प्रश्न 1 चुरुंगुन अपने ‘उड़ने’ के बारे में बार-बार अपनी माँ से क्यों पूछता है?

उत्तर- चुरुंगुन अपने ‘उड़ने’ के बारे में बार-बार अपनी माँ से इसलिए पूछता है क्योंकि वह अभी नादान है, उसे नहीं पता कि उड़ना किसे कहते हैं, उड़ने लायक कब बना जाता है। वह माँ से यह जानना चाहता है कि वह उड़ने लायक हो गया है।

प्रश्न 2 चुरुंगुन को कौन सी चीज़ें अच्छी लगती हैं?

उत्तर- चुरुंगुन को डालों-पत्तों पर घूमना, पत्ते का हिलमिल कर बातें करते देखना, कलियों और फूलों को देखना, कच्चे-पक्के फल खाना, अपने साथियों के साथ खेलना, सभी वृक्षों पर आना-जाना, धरती की ओर जाना तथा नीला गगन देखना अच्छा लगता है।

प्रश्न 3 चुरुंगुन अभी-अभी अपने घोंसले से निकला है। फिर भी वह पूरी दुनिया के बारे में जानना चाहता है। तुम किन चीज़ों के बारे में जानना चाहते हो?

“या तो क्षितिज मिलन बन जाता/ या तनती साँसों की डोरी।”

उत्तर- छात्र लिखें कि वह किन चीज़ों के बारे में जानना चाहते हैं जैसे- पशु-पक्षी के बारे में जानना, समुद्र में रहने वाले जीवों के बारे में जानना, ऐतिहासिक धरोहरों के बारे में आदि।

क्रम से लगाओ (पृष्ठ संख्या 4)

प्रश्न 1 नीचे कुछ चीज़ों के नाम लिखें हैं। चुरुंगुन ने पहले किसे देखा? क्रम से लगाओ।

फूल, पात, फुनगी, दाल, फल, कलियाँ, धरती, साथी, तरु, दाना, गगन

उत्तर- डाल, पात, कलियाँ, फूल, फुनगी, फल, साथी, तरु, धरती, दाना, गगन

चुरुंगुन उड़ गया (पृष्ठ संख्या 4)

प्रश्न 1 उड़ने के बाद चुरुंगुन कहाँ-कहाँ गया होगा? उसने क्या-क्या देखा होगा? अपने शब्दों में लिखो।

उत्तर-  हाँ उड़ने के बाद चुरुंगुन खेत-खलिहानों, बागों में गया होगा। वहाँ उसने फसलों, रंग-बिरंगे खुशबूदार फूल, नदियों, आदमी, पशु तथा पक्षियों को देखा होगा।

वचन बदलो (पृष्ठ संख्या 4)

प्रश्न 1 वचन बदलो

नमूना → घोंसला – घोंसले, घोंसलों

उत्तर-

एकवचनबहुवचन
डालडालें, डालों
बातबातें, बातों
कलीकलियाँ, कलियों
फूलफूलों
फलफलों
साथीसाथियों
तरुतरुओं
दानादानें
डैनाडैने

वाक्य बनाओ (पृष्ठ संख्या 4)

बार-बार बोलो और प्रत्येक शब्द से वाक्य बनाओ-

  • डाल – ढाल
  • बात – भात
  • फूल – मूल
  • दाना – धान
  • फल – पल

उत्तर-

डाल – चिड़िया डाल पर बैठी है।

ढाल – उसके हाथ में ढाल भी है।

बात – तुम मुझसे बात मत करो।

भात – मुझे थोड़ा और भात दो।

फूल – इस फूल की खुशबू अच्छी है।

मूल – परिश्रम सफलता का मूल मंत्र है।

दाना – चिड़ियाँ दाना चुग रही हैं।

धान – इस साल धान की उपज पिछले साल से ज्यादा हुई है।

फल – पेड़ों पर फल पक गए हैं।

पल – आग लगने से पल में सब कुछ तबाह हो गया

Class 7 हिन्दी – अध्याय-15: आश्रम का अनुमानित व्यय

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-मोहनदास करमचंद गांधी

सारांश

मोहनदास करमचंद गांधी ने दक्षिण अफ्रीका से लौटकर अहमदाबाद में एक आश्रम की स्थापना की थी। इस पाठ में उसी आश्रम का खर्च के बारे में जानकारी दी गई है।

आरंभ में आश्रम में रहने वाले व्यक्तियों की संख्या 40 जो आगे जाकर 50 के पास पहुँच सकती है। हर महीने करीबन दस अतिथि इनमें से तीन या चार लोग अपने परिवार सहित या अकेले भी हो सकते हैं। इसलिए रहने के स्थान की व्यवस्था कुछ इस प्रकार होनी चाहिए कि परिवार वाले अलग और शेष लोग साथ रह सके। आश्रम के लिए 50000 वर्गफुट जमीन की जरुरत होगी और आश्रम में रहने वालों को कमरे के अलवा तीन रसोईघर और तीन हजार पुस्तकों को रखने के लिए एक पुस्तकालय और अलमारियों की भी जरुरत होगी।

खेती के लिए 5 एकड़ जमीन और उसके साथ तीस लोगों के काम के लिए खेती,बढई और मोची के औजार की भी जरूरत होगी। इन औजारों का खर्च पाँच रुपए तथा रसोई के आवश्यक सामान का खर्च 150 रुपए तथा प्रति व्यक्ति 10 रुपए तय किया गया।

सामान लाने व मेहमान के लिए आने-जाने के लिए बैलगाड़ी और 50 व्यक्तियों का अनुमानित वार्षिक खर्च 6000 रुपए तय हुआ। गांधीजी चाहते थे कि अहमदाबाद को यह सब खर्च उठाना चाहिए। और यदि अहमदाबाद उन्हें जमीन और सभी के लिए मकान दे दें तो वे बाकि के खर्च का कहीं और से इंतजाम कर लेंगें। उन्होंने यह भी कहा कि खर्च का अनुमान जल्दी लगाए जाने के कारण उनसे कुछ चीजें छूट भी गई होगीं साथ ही स्थानीय स्थितियों की जानकारी न होने के कारण उनके अनुमान में भूलें भी हो सकती हैं। इस लेखा-जोखा में उन्होंने राज-मिस्त्री,लोहार और शिक्षण संबधी खर्च को शामिल नहीं किया है।

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लेखा-जोखा प्रश्न (पृष्ठ संख्या 139)

प्रश्न 1 हमारे यहाँ बहुत से काम लोग खुद नहीं करके किसी पेशेवर कारीगर से करवाते हैं। लेकिन गाँधी जी पेशेवर कारीगरों के उपयोग में आनेवाले औज़ार-छेनी, हथौड़े, बसूले इत्यादि क्यों खरीदना चाहते होंगें?

उत्तर- गाँधी जी आश्रम में आने वाले प्रत्येक व्यक्ति को स्वावलंबी और आत्मनिर्भर बनाना चाहते होंगें इसलिए वह पेशेवर कारीगरों के उपयोग में आनेवाले औज़ार- छेनी, हथौड़े, बसूले इत्यादि खरीदना चाहते होंगें।

प्रश्न 2 गाँधी जी ने अखिल भारतीय कांग्रेस सहित कई संस्थाओं व आंदोलनों का नेतृत्व किया। उनकी जीवनी या उनपर लिखी गई किताबों से उन अंशों को चुनिए जिनसे हिसाब-किताब के प्रति गाँधी जी की चुस्ती का पता चलता है?

उत्तर- गांधीजी बचपन में स्कूल हमेशा समय पर जाते और छुट्टी होते ही घर वापस चले आते। वे समय के पाबंद इंसान थे। वे कभी भी फिजूलखर्ची नहीं करते थे यहाँ तक कि पैसा बचाने के लिए वे कई बार कई किलोमीटर पैदल यात्रा करते थे क्योंकि उनका मानना था कि धन को जरुरी कामों में ही खर्च करना चाहिए। कुछ किताबों के इन अंशों से हिसाब-किताब के प्रति गाँधी जी की चुस्ती पता चलता का है।

प्रश्न 3 मान लीजिए, आपको कोई बाल आश्रम खोलना है। इस बजट से प्रेरणा लेते हुए उसका अनुमानित बजट बनाइए। इस बजट में दिए गए किन-किन मदों पर आप कितना खर्च करना चाहेंगे। किन नयी मदों को जोड़ना-हटाना चाहेंगे?

उत्तर- यदि हमें कोई बाल आश्रम खोलना है तो हमें निम्नलिखित मदों पर खर्च करना होगा –

खर्च

इमारत
10 लाख
प्रबंधक15,000 मासिक
सहायक कर्मचारी35,000मासिक
बालकों के वस्त्र, बिस्तर, पुस्तकें, शिक्षा व्यवस्था आदि।2 लाख सालाना
खाद्य पदार्थों पर खर्च25,000 मासिक
अन्य खर्च–बिजली, पानी, रख-रखाव, चिकित्सा आदि।30,000 मासिक
कुल अनुमानित खर्च3 लाख 5 हजार

प्रश्न 4 आपको कई बार लगता होगा कि आप कई छोटे-मोटे काम (जैसे- घर की पुताई, दूध दुहना, खाट बुनना) करना चाहें तो कर सकते हैं। ऐसे कामों की सूची बनाइए, जिन्हें आप चाहकर भी नहीं सीख पाते। इसके क्या कारण रहे होंगे? उन कामों की सूची भी बनाइए, जिन्हें आप सीखकर ही छोड़ेंगे।

उत्तर- 

  • कपड़े सिलना- यह काम मुझे बहुत पेचीदा लगता है इसलिए मैं इसे नही कर पाता।
  • पेड़-पौधे लगाना- चूँकि मुझे पौधों के बारे में ज्यादा जानकारी नही है इसलिए मुझे यह नही आता।
  • पेड़-पौधे लगाना, कार चलाना, कम्प्यूटर चलाना आदि काम मैं सीखकर ही छोड़ूंगा।

प्रश्न 5 इस अनुमानित बजट को गहराई से पढ़ने के बाद आश्रम के उद्देश्यों और कार्यप्रणाली के बारे में क्या-क्या अनुमान लगाए जा सकते हैं?

उत्तर- आश्रम में स्वयं काम करने को ज्यादा महत्व दिया जाता था क्योंकि गांधीजी ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें।गांधीजी लोगों को आजीविका प्रदान कर, लघु उद्योग को बढ़ावा देकर, श्रम को बढ़ावा देकर उन्हें स्वावलंबी बनाना चाहते हैं।

भाषा की बात प्रश्न (पृष्ठ संख्या 139-140)

प्रश्न 1 अनुमानित शब्द अनुमान में इत प्रत्यय जोड़कर बना है। इत प्रत्यय जोड़ने पर अनुमान का न नित में परिवर्तित हो जाता है। नीचे-इत प्रत्यय वाले कुछ और शब्द लिखे हैं। उनमें मूल शब्द पहचानिए और देखिए कि क्या परिवर्तन हो रहा है-

प्रमाणित, व्यथित, द्रवित, मुखरित, झंकृत, शिक्षित, मोहित, चर्चित।

उत्तर- प्रमाणित – प्रमाण + इत

व्यथित – व्यथा + इत

द्रवित – द्रव + इत

मुखरित – मुखर + इत

झंकृत – झंकार + इत

शिक्षित – शिक्षा + इत

मोहित – मोह + इत

चर्चित – चर्चा + इत

इत प्रत्यय की भाँति इक प्रत्यय से भी शब्द बनते हैं और शब्द के पहले अक्षर में भी परिवर्तन हो जाता है, जैसे- सप्ताह + इक = साप्ताहिक। 

नीचे इक प्रत्यय से बनाए गए शब्द दिए गए हैं। इनमें मूल शब्द पहचानिए और देखिए क्या परिवर्तन हो रहा है-

मौखिक, संवैधानिक, प्राथमिक, नैतिक, पौराणिक, दैनिक।

मौखिक – मुख + इक

संवैधानिक – संविधान + इक

प्राथमिक – प्रथम + इक

नैतिक – नीति + इक

पौराणिक – पुराण + इक

दैनिक – दिन + इक

प्रश्न 2 बैलगाड़ी और घोड़ागाड़ी शब्द दो शब्दों को जोड़ने से बने हैं। इसमें दूसरा शब्द प्रधान है, यानी शब्द का प्रमुख अर्थ दूसरे शब्द पर टिका है। ऐसे सामासिक शब्दों को तत्पुरुष समास कहते हैं। ऐसे छः शब्द और सोचकर लिखिए और समझिए कि उनमें दूसरा शब्द प्रमुख क्यों है?

उत्तर-

  • धनहीन – धन से हीन
  • रेलभाड़ा – रेल के लिए भाड़ा
  • रसोईघर – रसोई के लिए घर
  • आकाशवाणी – आकाश से वाणी
  • देशनिकाला – देश से निकाला हुआ
  • पापमुक्त – पाप से मुक्त

Class 7 हिन्दी – अध्याय-14: संघर्ष के कराण मैं तुनुकमिजाज हो गया धनराज

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-विनीता पांडेय

सारांश

यह पाठ हॉकी के प्रसिद्ध खिलाड़ी धनराज पिल्लै का पैंतीस वर्ष के हो जाने पर विनीता पाण्डेय द्वारा लिया गया साक्षात्कार है। इस पाठ ने धनराज पिल्लै के बचपन से लेकर अब तक की प्रमुख घटनाओं का वर्णन है।

साक्षात्कार सार कुछ इस प्रकार से हैं-

धनराज पिल्लै का बचपन कठिनाइयों से भरा था। उनके परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। धनराज के दोनों बड़े भाई भी हॉकी खेलते थे। धनराज भी हॉकी खेलना चाहते थे परन्तु उनके पास हॉकी स्टिक खरीदने के पैसे नहीं थे। अपने मित्रों से हॉकी स्टिक उधार माँग कर वे खेलते थे। जब उनके बड़े भाई को भारतीय कैंप में चुन लिया गया तब उन्होंने अपनी पुरानी स्टिक धनराज को दे दी। यही धनराज की अपनी पहली स्टिक थी।

धनराज को 1985 में मणिपुर में खेले जाने वाली जूनियर राष्ट्रीय हॉकी खेलने का अवसर मिला। उस समय धनराज सोलह वर्ष के दुबले-पतले और छोटे बच्चे जैसे चेहरे वाले दिखाई देते थे। बाद में सन 1888 में उन्हें सीनियर टीम में चुन लिया गया। इसके कारण वे मुंबई पहुँच गए। इसी दौरान उनके भाई रमेश ने मुंबई लीग में बेहतरीन खेल खेलकर धूम मचा रखी थी। 1988 में नेशनल कैंप के 57 खिलाड़ी में उनका नाम न होने से वे मायूस हो गए थे परन्तु एक वर्ष के बाद ही उन्हें ऑलविन एशियन कप के लिए चुन लिया गया और उसके बाद से ये आगे ही बढ़ते गए।

धनराज पढ़ाई में कमजोर थे। वे दसवीं तक ही पढ़ पाए। धनराज यह मानना था कि यदि वे हॉकी न खेलते तो उन्हें चपरासी की नौकरी भी न मिलती।

विनीता ने जब उनके तुनकमिजाज होने का कारण पूछा तो उन्होंने इस का कारण बचपन से जुड़ा बताया। उनकी माँ को उनके पालन-पोषण के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती थी। वे अपना गुस्सा रोक नहीं पाते थे, उस पर अन्य लोग भी उन्हें उकसाते रहते थे। उन्हें अपनी जिंदगी में छोटी-छोटी चीजों के लिए भी काफी संघर्ष करना पड़ा। इस कारण उनका स्वभाव ऐसा बन गया था। धनराज भावुक भी है उनसे किसी का कष्ट देखा नहीं जाता। अपनी गलती पर वे माफ़ी माँगने पर भी संकोच नहीं करते।

धनराज ने यह भी बताया कि कृत्रिम घास को देखकर वे विज्ञान की तरक्की पर आश्चर्यचकित थे। उनकी सबसे पहली कार सेकेंड हैण्ड अरमाडा थी। बाद में उन्होंने 2000 में फोर्ड आइकॉन खरीदी। सर्वप्रथम पुणे में भाऊ रोड पर 1994 में दो बेडरूम का फ्लैट खरीदा। 1999 में महाराष्ट्र सरकार ने उन्हें पवई में एक फ्लैट दिया। राष्ट्रपति से उनकी मुलाकात से उन्हें खास होने का अहसास हुआ।

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साक्षात्कार से प्रश्न (पृष्ठ संख्या 133)

प्रश्न 1 साक्षात्कार पढ़ कर आपके मन में धनराज पिल्लै की कैसी छवि उभरती है? वर्णन कीजिए।

उत्तर- साक्षात्कार पढ़ कर हमारे मन में धनराज पिल्लै की यही छवि उभरती है कि वह दुबले-पतले से दिखने वाले भारत के एक साधारण मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मे किसी आम युवक जैसे ही हैं। उन्होंने जमीन से उठ कर आसमान तक पहुँचने का सफर तय किया है। एक अभावग्रस्त बचपन जीने वाला यह व्यक्ति आज हॉकी का नामी खिलाड़ी है। फिर भी वह अपनी जड़ों को नहीं भूला है। आम इंसान की तरह साधारण जीवन जीने में उसे आज भी कोई संकोच नहीं होता है। वह मेहनती है, जुझारू है। परिवार और दोस्तों का उनके जीवन में महत्वपूर्ण स्थान है। हॉकी से उन्हें गहरा लगाव है। वह जानते हैं कि हॉकी से ही उन्हें यह सम्मान और प्यार मिला है। वह एक सरल हृदय, भावुक व्यक्ति हैं।

प्रश्न 2 धनराज पिल्लै ने ज़मीन से उठकर आसमान का सितारा बनने तक की यात्रा तय की है। लगभग सौ शब्दों में इस सफ़र का वर्णन कीजिए।

उत्तर- धनराज पिल्लै का बचपन मुश्किलों से भरा हुआ था। उन्होंने अभाव और गरीबी को करीब से देखा और महससू किया। उनके पास अपने लिए एक हॉकी स्टिक तक खरीदने के पैसे नहीं थे। शुरू में तो दोस्तों से उधार लेकर और बाद में अपने बड़े भाई की पुरानी स्टिक से उन्होंने काम चलाया लेकिन आखिरकार उनकी मेहनत रंग लाई। मात्र 16 साल की उम्र में उन्हें मणिपुर में 1986 में जूनियर राष्ट्रीय हॉकी खेलने का अवसर मिला। सन् 1986 में उन्हें सीनियर टीम में स्थान मिला। उस वर्ष अपने बड़े भाई रमेश के साथ मिलकर उन्होंने मुंबई लीग में अपने बेहतरीन खेल से खूब धूम मचाई। अंततः 1989 में उन्हें ऑलविन एशिया कप कैंप के लिए चुन लिया गया। उसके बाद शुरू हुई उनकी सफलता की कहानी और उन्होंने फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

प्रश्न 3 ‘मेरी माँ ने मुझे अपनी प्रसिद्धि को विनम्रता से सँभालने की सीख दी है’-धनराज पिल्लै की इस बात का क्या अर्थ है?

उत्तर- धनराज पिल्लै कहते हैं कि उनकी माँ ने उन्हें अपनी प्रसिद्धि को विनम्रता से सँभालने की सीख दी है। इसका यह अर्थ है कि प्रसिद्धि पाकर स्वयं को इतना बड़ा नहीं समझ लेना चाहिए कि हम दूसरों का आदर और सम्मान करना ही भूल जाएँ। सफलता की सीढ़ियाँ चढ़कर बीते दिन भुला देना जरा भी समझदारी की बात नहीं है। धनराज की माँ ने उन्हें यही सिखाने की कोशिश की होगी कि सफलता पाकर घमंड नहीं करना चाहिए अपितु और अधिक नम्र हो जाना चाहिए, तभी प्रसिद्धि तथा मान-सम्मान सदा साथ रहते हैं।

साक्षात्कार से आगे प्रश्न (पृष्ठ संख्या 133-134)

प्रश्न 1 ध्यानचंद को हॉकी का जादूगर कहा जाता है। क्यों? पता लगाइए।

उत्तर- मेजर ध्यानचंद हॉकी के एक प्रसिद्ध खिलाड़ी थे। हॉकी की स्टिक हाथ में लेकर वह किसी जादूगर की भाँति विपक्षी टीम के सदस्यों के बीच से गेंद निकाल कर ले जाते थे। वह हॉकी खेलने में माहिर थे। उनके दाँव-पेंच समझ पाना अत्यंत कठिन था, उन्हें हराना तो दूर की बात थी। लोग उन्हें हॉकी खेलता देख कर दाँतों तले उँगली दबा लेते थे। यही कारण था कि उन्हें हॉकी का जादूगर कहा जाता है।

प्रश्न 2 किन विशेषताओं के कारण हॉकी भारत का राष्ट्रीय खेल माना जाता है?

उत्तर- हॉकी एक प्राचीन खेल है। यह पुराने समय से भारत में खेला जाता रहा है। इसके प्रति लोगों का आकर्षण और रुचि कभी कम नहीं हुई। हॉकी खेलने के लिए बहुत अधिक साधन और धन जुटाने की भी आवश्यकता नहीं है। सीमित संसाधन में खेला जाने वाला यह खेल निरंतर विकसित और प्रचलित होता रहा, इसलिए इसे भारत का राष्ट्रीय खेल माना जाता है।

प्रश्न 3 आप समाचार-पत्रों, पत्रिकाओं में छपे हुए साक्षात्कार पढ़ें और अपनी रुचि से किसी व्यक्ति को चुनें, उसके बारे में जानकारी प्राप्त कर कुछ प्रश्न तैयार करें और साक्षात्कार लें।

उत्तर- रोज सुबह आपके घर में आने वाले समाचार पत्र को ही ले जी ले लीजिए यह भाषा शिक्षा का महत्व पूर्ण रोचक संसाधन हो सकता है पाठ्य पुस्तक से हीटर समाचार पत्र से प्रकाशित की थी कहानी से नहीं बल्कि उसमें किसी भी एक विषय पर हम भाषा शिक्षण कर सकते हैं जो आपको सरल लगे वह आप अपना लेखन कर सकते हैं और उदासीन कक्षा को रोचक बना सकते हो जैसे कि एक व्यक्ति अपने नौकरी के लिए विज्ञापन दिया है यह न्यूज़ पेपर में आप एक ऐड बना सकते हो और उसे अपने क्लास पर सुना सकते हुए अपनी कॉपी पर लिख सकते हो

अनुमान और कल्पना प्रश्न (पृष्ठ संख्या 134)

प्रश्न 1 ‘यह कोई ज़रूरी नहीं कि शोहरत पैसा भी साथ लेकर आए’ -क्या आप धनराज पिल्लै की इस बात से सहमत हैं? अपने अनुभव और बड़ों से बातचीत के आधार पर लिखिए।

उत्तर- यह बात एकदम सही है कि कोई जरूरी नहीं कि शोहरत पैसा साथ लेकर आए। इसका उदाहरण स्वयं धनराज पिल्लै का जीवन है। हॉकी का नामी खिलाड़ी बन जाने के बाद भी वह साधारण लोगों की तरह भीड़ भरे स्टेशनों पर धक्के खाते हुए लोकल ट्रेनों का इंतजार किया करते थे। बात वही थी, उन्हें शोहरत मिली थी परंतु उस अनुपात में पैसा नहीं मिला। धनराज पिल्लै अपवाद नहीं है। हमारे समाज में कई ऐसे उदाहरण भरे पड़े हैं जब प्रसिद्ध व्यक्तियों को गरीबी और मुफलिसी का जीवन जीने के लिए मजबूर होना पड़ा। हम मशहूर शहनाई वादक उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ का उदाहरण ले सकते हैं, जिनके पास अपने इलाज तक के लिए यथेष्ट पैसे नहीं थे। प्रसिद्ध साहित्यकार ‘प्रेमचंद’ का जीवन भी इसका उदाहरण है, जो अंत तक धन के लिए संघर्ष करते हुए मृत्यु को प्राप्त हुए।

प्रश्न 2 

  1. अपनी गलतियों के लिए माफ़ी माँगना आसान होता है या मुश्किल?
  2. क्या आप और आपके आसपास के लोग अपनी गलतियों के लिए माफी माँग लेते हैं?
  3. माफ़ी माँगना मुश्किल होता है या माफ करना? अपने अनुभव के आधार पर लिखिए।

उत्तर-

  1. अपनी गलतियों के लिए माफ़ी माँगना बिल्कुल आसान नहीं होता क्योंकि माफ़ी माँगने का अर्थ है किसी के सामने झुकना, अपने को छोटा बनाना। यह प्रायः अपने स्वाभिमान को ठेस पहुँचाने जैसा होता है।
  2. नहीं, कई बार तो लोग अपनी गलतियाँ मानने को भी तैयार नहीं होते, माफी माँगना तो दूर की बात हैं।
  3. माफी माँगना मुश्किल होता है या माफ करना, यह कई बार अपराध की प्रकृति पर निर्भर करता है। देखा गया है कि अक्षम्य अपराधों के लिए लोग बड़ी जल्दी माफी माँग लेते हैं, परंतु वैसे हालात में उन्हें माफ करना अत्यंत कठिन होता है? वहीं दूसरी और छोटी-बड़ी गलतियों में माफी माँगना लोग अपनी शान के खिलाफ समझते हैं। जबकि माफ करने वाला कई बार बिना माँगे ही ऐसे मामलों में अपनी माफी दे देता है।

भाषा की बात प्रश्न (पृष्ठ संख्या 133)

प्रश्न 1 नीचे कुछ शब्द लिखे हैं जिनमें अलग-अलग प्रत्ययों के कारण बारीक अंतर है। इस अंतर को समझाने के लिए इन शब्दों का वाक्य में प्रयोग कीजिए-

प्रेरणाप्रेरकप्रेरित
संभवसंभावितसंभवतः
उत्साहितउत्साहवर्धकउत्साह

उत्तर-

  • प्रेरणा- महापुरुषों के जीवन से हमें प्रेरणा मिलती है।
  • प्रेरक- महापुरुष सदैव आम जन के प्रेरक रहे हैं।
  • प्रेरित- महापुरुषों का जीवन हमें सदा अच्छे कर्म करने के लिए प्रेरित करता है।
  • संभव- संभव है अगले महीने मैं दिल्ली जाऊँ।
  • संभावित- अपनी संभावित दिल्ली यात्रा के लिए मुझे तैयारियाँ तो करनी ही होंगी।
  • संभवतः- संभवतः मेरी दिल्ली यात्रा स्थगित हो जाए।
  • उत्साह- यात्रा को लेकर मेरे मन में बड़ा उत्साह है।
  • उत्साहित- मैं इस यात्रा को लेकर बहुत उत्साहित हूँ।
  • उत्साहवर्द्धक- कॉमन वेल्थ खेलों में दीपिका कुमारी को मिली सफलता उत्साहवर्द्धक थी।

प्रश्न 2 तुनुकमिज़ाज शब्द तुनुक और मिजाज दो शब्दों के मिलने से बना है। क्षणिक, तनिक और तुनुक एक ही शब्द के भिन्न रूप हैं। इस प्रकार का रूपांतर दूसरे शब्दों में भी होता है। जैसे- बादल, बादर, बदरा, बदरिया, मयूर, मयूरा, मोर, दर्पण, दर्पन, दरपन। शब्दकोष की सहायता लेकर एक ही शब्द के दो या दो से अधिक रूपों को खोजिए। कम-से-कम चार शब्द और उनके अन्य रूप लिखिए।

उत्तर- धरित्री, धरती, धरा

चाँद, चंद्र, चंदा

समुद्र, समंदर, सागर

मनुज, मनुष्य, मानव, मानुस

प्रश्न 3 हर खेल के अपने नियम, खेलने के तौर-तरीके और अपनी शब्दावली होती है। जिस खेल में आपकी रुचि हो उससे संबंधित कुछ शब्दों को लिखिए, जैसे- फुटबॉल के खेल से संबंधित शब्द हैं- गोल, बैंकिंग, पासिंग, बूट इत्यादि।

उत्तर- क्रिकेट-बल्ला, गेंद, विकेट, बॉलिंग, रन, छक्का, चौका आदि। सिली प्वाइंट, मिडआन, मिडआफ, रन आउट, शतक, फील्डर, गेंदबाज, आउट, फील्डिंग आदि।

Class 7 हिन्दी – अध्याय-13: वीर कुवर सिंह

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प्रस्तुत पाठ में सन 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के योद्धा कुँवरसिंह की वीरता और साहस का वर्णन किया गया है। अंग्रजों के विरुद्ध विद्रोह करने पर 8 अप्रैल सन 1857 को मंगल पांडे को फाँसी की सजा दे दी गई थी। 10 मई 1857 को मेरठ में भारतीय सैनिकों ने अंग्रजों के खिलाफ आंदोलन किया। 11 मई को उन्होंने ने दिल्ली पर कब्ज़ा कर बहादुरशाह जफ़र को भारत का शासक बना दिया।

सन 1857 में ब्रिटिश सरकार की जड़ें हिलाने वाले स्वतंत्रता संग्राम के प्रमुख सेनानी थे- मंगल पांडे, नाना साहेब, तात्या टोपे, अजीममुल्लाखान, रानी लक्ष्मीबाई, बेगम हजरत महल, कुँवरसिंह मौलवी अहमदुल्लाह,बहादुर खान, राव तुलाराम आदि थे। इस आंदोलन में कुँवरसिंह जैसे वयोवृद्ध व्यक्ति ने भी ब्रिटिश शासन के खिलाफ बहादुरी के साथ युद्ध किया।

वीर कुँवरसिंह का जन्म 1782 में बिहार के शाहबाद जिले के जगदीशपुर रियासत में हुआ था। उनके माता-पिता पंचरतन कुँवर और साहबजादा सिंह थे। कुँवरसिंह अपने पिता की तरह ही वीर,स्वाभिमानी और उदार थे। पिता की मृत्यु के बाद 1827 में उन्होंने अपनी जगदीशपुर की रियासत की कमान सँभाली। इस दौरान उन्होंने अंग्रेजों से डटकर लोहा लिया। 
25 जुलाई, सन 1857 को दानापुर की सैनिक टुकड़ी ने विद्रोह कर दिया और वे सोन नदी पार कर आरा की ओर चल पड़े। कुँवरसिंह ने आरा पर विजय प्राप्त कर ली। उस समय आरा क्रांति का मुख्य केंद्र बन गया था। जमींदारों का अंग्रजों के साथ सहयोग और आधुनिक शस्त्रों की कमी के कारण अंग्रजों ने जगदीशपुर पर कब्जा कर लिया। कुंवरसिंह ने इस पार हार न मानते हुए तुरंत भावी संग्राम की योजना में लग गए। उन्होंने ने सासाराम से मिर्जापुर, रीवा, कालपी, कानपूर, लखनऊ, आजमगढ़ में क्रांति की आग को जलाए रखा। लगातार अंग्रजों से युद्ध करके उन्होंने 22 मार्च 1858 को आजमगढ़ पर कब्जा कर लिया। अंग्रजों ने उनपर दोबारा हमला किया परन्तु दूसरी बार भी उन्हें हराकर कुंवरसिंह ने 23 अप्रैल 1858 को स्वतंत्रता का विजय झंडा लहराकर जगदीशपुर चले गए। लेकिन इसके तीन दिन बाद ही वीर कुंवरसिंह का निधन हो गया।

वीर कुँवर सिंह युद्धकला में पूरी तरह से कुशल थे। वे अत्यंत चतुर तथा साहसी योद्धा थे। उन्होंने अनेकों बार अंग्रजों को चकमा दिया। एक बार गंगा नदी को पार करने के लिए अंगेज सेनापति डगलस को झूठी खबर में फँसाकर अपनी सेना के साथ शिवराजपुर से गंगा पार गए। कुशल योद्धा होने के साथ सामाजिक कार्य भी करते थे। उन्होंने अपने समय में निर्धनों की सहायता की, कुएँ खुदवाए, तालाब बनवाए। वे अत्यंत उदार एवं संवेदनशील व्यक्ति थे। लोकभाषाओं में आज भी उस वीर सेनानी का यशगान किया जाता है।

प्रस्तुत पाठ में सन 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के योद्धा कुँवरसिंह की वीरता और साहस का वर्णन किया गया है। अंग्रजों के विरुद्ध विद्रोह करने पर 8 अप्रैल सन 1857 को मंगल पांडे को फाँसी की सजा दे दी गई थी। 10 मई 1857 को मेरठ में भारतीय सैनिकों ने अंग्रजों के खिलाफ आंदोलन किया। 11 मई को उन्होंने ने दिल्ली पर कब्ज़ा कर बहादुरशाह जफ़र को भारत का शासक बना दिया।

सन 1857 में ब्रिटिश सरकार की जड़ें हिलाने वाले स्वतंत्रता संग्राम के प्रमुख सेनानी थे- मंगल पांडे, नाना साहेब, तात्या टोपे, अजीममुल्लाखान, रानी लक्ष्मीबाई, बेगम हजरत महल, कुँवरसिंह मौलवी अहमदुल्लाह,बहादुर खान, राव तुलाराम आदि थे। इस आंदोलन में कुँवरसिंह जैसे वयोवृद्ध व्यक्ति ने भी ब्रिटिश शासन के खिलाफ बहादुरी के साथ युद्ध किया।

वीर कुँवरसिंह का जन्म 1782 में बिहार के शाहबाद जिले के जगदीशपुर रियासत में हुआ था। उनके माता-पिता पंचरतन कुँवर और साहबजादा सिंह थे। कुँवरसिंह अपने पिता की तरह ही वीर,स्वाभिमानी और उदार थे। पिता की मृत्यु के बाद 1827 में उन्होंने अपनी जगदीशपुर की रियासत की कमान सँभाली। इस दौरान उन्होंने अंग्रेजों से डटकर लोहा लिया। 

25 जुलाई, सन 1857 को दानापुर की सैनिक टुकड़ी ने विद्रोह कर दिया और वे सोन नदी पार कर आरा की ओर चल पड़े। कुँवरसिंह ने आरा पर विजय प्राप्त कर ली। उस समय आरा क्रांति का मुख्य केंद्र बन गया था। जमींदारों का अंग्रजों के साथ सहयोग और आधुनिक शस्त्रों की कमी के कारण अंग्रजों ने जगदीशपुर पर कब्जा कर लिया। कुंवरसिंह ने इस पार हार न मानते हुए तुरंत भावी संग्राम की योजना में लग गए। उन्होंने ने सासाराम से मिर्जापुर, रीवा, कालपी, कानपूर, लखनऊ, आजमगढ़ में क्रांति की आग को जलाए रखा। लगातार अंग्रजों से युद्ध करके उन्होंने 22 मार्च 1858 को आजमगढ़ पर कब्जा कर लिया। अंग्रजों ने उनपर दोबारा हमला किया परन्तु दूसरी बार भी उन्हें हराकर कुंवरसिंह ने 23 अप्रैल 1858 को स्वतंत्रता का विजय झंडा लहराकर जगदीशपुर चले गए। लेकिन इसके तीन दिन बाद ही वीर कुंवरसिंह का निधन हो गया।

वीर कुँवर सिंह युद्धकला में पूरी तरह से कुशल थे। वे अत्यंत चतुर तथा साहसी योद्धा थे। उन्होंने अनेकों बार अंग्रजों को चकमा दिया। एक बार गंगा नदी को पार करने के लिए अंगेज सेनापति डगलस को झूठी खबर में फँसाकर अपनी सेना के साथ शिवराजपुर से गंगा पार गए। कुशल योद्धा होने के साथ सामाजिक कार्य भी करते थे। उन्होंने अपने समय में निर्धनों की सहायता की, कुएँ खुदवाए, तालाब बनवाए। वे अत्यंत उदार एवं संवेदनशील व्यक्ति थे। लोकभाषाओं में आज भी उस वीर सेनानी का यशगान किया जाता है।

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निबंध से प्रश्न (पृष्ठ संख्या 127)

प्रश्न 1 वीर कुँवरसिंह के व्यक्तित्व की कौन-कौन सी विशेषताओं ने आपको प्रभावित किया?

उत्तर- वीर कुँवरसिंह के व्यक्तित्व की निम्न विशेषताओं ने हमें प्रभावित किया है-

  • बहादुर
  • साहस
  • बुद्धिमान व चतुर
  • उदार
  • सांप्रदायिक सद्भाव

प्रश्न 2 कुँवरसिंह को बचपन में किन कामों में मजा आता था? क्या उन्हें उन कामों से स्वतंत्रता सेनानी बनने में कुछ मदद मिली?

उत्तर- कुँवरसिंह को बचपन में घुड़सवारी, तलवारबाजी और कुश्ती लड़ने में मजा आता था। उन्हें इन कामों से स्वतंत्रता सेनानी बनने में भरपूर मदद मिली। इन सब से उनके अंदर साहस और वीरता का विकास हुआ साथ ही वे तलवारबाजी और घुड़सवारी की कला में निपुण हुए जिसे उन्हेोने अंग्रेज़ों के खिलाफ युद्ध करने में इस्तेमाल किया।

प्रश्न 3 सांप्रदायिक सद्भाव में कुँवर सिंह की गहरी आस्था थी -पाठ के आधार पर कथन की पुष्टि कीजिए।

उत्तर- इब्राहिम खाँ और किफायत हुसैन उनकी सेना में धर्म के आधार पर नहीं अपितु कार्यकुशलता और वीरता के कारण उच्च पद पर आसीन थे। उनके यहाँ हिन्दुओं के और मुसलमानों के सभी त्योहार एक साथ मिलकर मनाए जाते थे। उन्होंने पाठशाला के साथ मकतब भी बनवाए। इनसे पता चलता है की सांप्रदायिक सद्भाव में कुँवर सिंह की गहरी आस्था थी।

प्रश्न 4 पाठ के किन प्रसंगों से आपको पता चलता है कि कुँवर सिंह साहसी, उदार एवं स्वाभिमानी व्यक्ति थे?

उत्तर- साहसी- ऊनि पूरी जीवन गाथा उनके साहसी होने का प्रमाण है। कुँवर सिंह ने जगदीशपुर हारने के बाद भी मनोबल नही खोया और संग्राम में भाग लिया। उन्होंने अपनी घायल भुजा को स्वयं काटकर गंगा में समर्पित कर दिया जो की साहस का अद्वितीय उदहारण है।

उदार- कुँवरसिंह बड़े ही उदार हृदय थे। उनकी माली हालत अच्छी न होने के बावजूद वे निर्धनों की हमेशा सहायता करते थे। उन्होंने कई तालाबों, कुँओं, स्कूलों तथा रास्तों का निर्माण किया।

स्वाभिमानी- वयोवृद्ध हो चुकने के बाद भी उन्होंने अंग्रेज़ों के सामने घुटने नहीं टेके और उनका डटकर मुकाबला किया।

प्रश्न 5 आमतौर पर मेले मनोरंजन, खरीद फ़रोख्त एवं मेलजोल के लिए होते हैं। वीर कुँवरसिंह ने मेले का उपयोग किस रूप में किया?

उत्तर- वीर कुँवरसिंह ने मेले का उपयोग स्वतंत्रता की क्रांतिकारी गतिविधियों, गुप्त बैठकों की योजनाओं को कार्यान्वयित करने के रूप में किया।

निबंध से प्रश्न (पृष्ठ संख्या 127)

प्रश्न 1 सन् 1857 के आंदोलन में भाग लेनेवाले किन्हीं चार सेनानियों पर दो-दो वाक्य लिखिए।

उत्तर- 

  1. रानी लक्ष्मीबाई-झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई बचपन से ही तलवारबाजी और युद्धाभ्यास किया करती थीं। पति गंगाधर राव की मृत्यु के बाद अपने राज्य को अंग्रेज़ों से बचाने के लिए उन्होंने वीरतापूर्वक युद्ध किया तथा 23 वर्ष की अल्पायु में ही शहीद हो गई।
  2. मंगल पांडे-अंग्रेजी सेना का मामूली सा सिपाही मंगल पांडे कट्टर धर्मावलंबी था। कारतूस में गाय और सूअर की चर्बी की बात पता चलने पर उन्होंने ने विद्रोह की शुरूआत की थी।
  3. नाना साहेब पेशवा-कानपुर के नाना साहब पेशवा ने रानी लक्ष्मीबाई को अपनी मुँहबोली बहन माना था। वह एक वीर योद्धा, कुशल सेनानी तथा परम देशभक्त थे।
  4. अजीमुल्लाह खान-वीर योद्धा, परम देशभक्त तथा धर्मनिरपेक्ष अजीमुल्ला खान नाना साहेब पेशवा के विधिवेत्ता थे। उन्होंने बढ़-चढ़ कर स्वाधीनता संग्राम में हिस्सा लिया तथा अंग्रेज़ों के हाथों पकड़े गए।

प्रश्न 2 सन् 1857 के क्रांतिकारियों से संबंधित गीत विभिन्न भाषाओं और बोलियों में गाए जाते हैं। ऐसे कुछ गीतों को संकलित कीजिए।

उत्तर- सन् 1857 के क्रांतिकारियों से संबंधित गीत विभिन्न भाषाओं और बोलियों में गाए जाते हैं। ऐसे कुछ गीतों को संकलित कीजिए।

अनुमान और कल्पना प्रश्न (पृष्ठ संख्या 127)

प्रश्न 1 वीर कुंवर सिंह का पढ़ने के साथ-साथ कुश्ती और घुड़सवारी में अधिक मन लगता था। आपको पढ़ने के अलावा और किन-किन गतिविधियों या कामों में खूब मज़ा आता है? लिखिए।

उत्तर- हमें पढ़ने के साथ-साथ क्रिकेट खेलने, पार्क में घू, सिनेमा देखने एवं दोस्तों के साथ गप्पे मारना अच्छा लगता है। इसके अलावा बाइक की सवारी करना अच्छा लगता है।

प्रश्न 2 सन् 1857 में अगर आप 12 वर्ष के होते तो क्या करते? कल्पना करके लिखिए।

उत्तर- सन् 1857 में यदि मैं 12 वर्ष के होता तो उस समय की राजनीति, सामाजिक स्थिति और माहौल का प्रभाव मझ पर भी अवश्य पड़ता। इससे मुझमें भी देशप्रेम और विद्रोह की भावना जरूर विकसित होती। मैं भी तलवारबाजी, कुश्ती तथा घुड़सवारी का अभ्यास करता। इतना ही नहीं मैं स्वतंत्रता संग्राम के सेनानियों के संदेश एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचाने में उनकी सहायता भी करता।

प्रश्न 3 अनुमान लगाइए, स्वाधीनता की योजना बनाने के लिए सोनपुर के मेले को क्यों चुना गया होगा?

उत्तर- सोनपुर का मेला एशिया का सबसे बड़ा मेला है। यह हरिहर क्षेत्र में काफी दूर तक लगता है। इसमें काफी भीड़ होती है तथा तरह-तरह के पशु-पक्षियों की खरीद-बिक्री भी की जाती है। स्वतंत्रता सेनानियों ने स्वाधीनता की योजना बनाने के लिए इन्हीं कारणों से इस मेले को चुना होगा। भीड़-भाड़ के कारण अंग्रेजों के लिए उन्हें पहचानना और पकड़ पाना असंभव था। इतना ही नहीं मेले जैसी जगह में अगर वह एकत्र होकर बातचीत करते थे, तो कोई उन पर संदेह भी नहीं कर सकता था। किसी के लिए यह समझ पाना अत्यंत मुश्किल होता कि उनमें क्रांतिकारी कौन है और मेले का दर्शक कौन है। उनके वहाँ आने का वास्तविक उद्देश्य क्या है, यह भी पता न चल पाता।

भाषा की बात प्रश्न (पृष्ठ संख्या 127)

प्रश्न 1 आप जानते हैं कि किसी शब्द को बहुवचन में प्रयोग करने पर उसकी वर्तनी में बदलाव आता है। जैसे- सेनानी एक व्यक्ति के लिए प्रयोग करते हैं और सेनानियों एक से अधिक के लिए। सेनानी शब्द की वर्तनी में बदलाव यह हुआ है कि अंत के वर्ण ‘नी’ की मात्रा दीर्घ ।’ (ई) से ह्रस्व ” (इ) हो गई है। ऐसे शब्दों को, जिनके अंत में दीर्घ ईकार होता है, बहुवचन बनाने पर वह इकार हो जाता है, यदि शब्द के अंत में ह्रस्व इकार होता है, तो उसमें परिवर्तन नहीं होता जैसे- दृष्टि से दृष्टियों।

  • नीचे दिए गए शब्दों का वचन बदलिए।

नीति….

जिम्मेदारियों…

सलामी….

स्थिति….

स्वाभिमानियों….

गोली….

उत्तर-

नीतिनीतियों
जिम्मेदारियोंजिम्मेदारी
सलामीसलामियाँ
स्थितिस्थितियों
स्वाभिमानियोंस्वाभिमानी
गोलीगोलियाँ

Class 7 हिन्दी – अध्याय-12: भोर और बरखा

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-मीरा बाई

सारांश

भोर और बरखा’ मीरा बाई द्वारा रचित है। इसमें दो पद हैं। पहले पद में मीराबाई ने ब्रज की भोर का सुंदर वर्णन किया है। दूसरे पद में सावन ऋतु का वर्णन है।

पहले पद में माता यशोदा श्रीकृष्ण को संबोधित करते हुए ‘बंसीवारे ललना’, ‘मोरे प्यार’, ‘लाल जी’, उपर्युक्त कथन कहते हुए अपने पुत्र श्रीकृष्ण को जगाने का प्रयास कर रही हैं।

माता यशोदा श्रीकृष्ण को जगाने के अपने प्रयास में कृष्ण से निम्न बातें कहती हैं कि रात बीत चुकी है, सभी के दरवाजें खुल चुके हैं, देखो गोपियाँ दही बिलो कर तुम्हारा मनपसंद माखन निकाल रही है, द्वार पर देव और मानव सभी तुम्हारे दर्शन की प्रतीक्षा में खड़े हैं, तुम्हारे मित्रगण भी तुम्हारी जय-जयकार कर रहें हैं, सभी अपने हाथ में माखन रोटी लेकर गाएँ चराने के लिए तुम्हारी प्रतीक्षा कर रहें हैं। अत: तुम जल्दी उठ जाओ।

दूसरे पद में सावन का बड़ा ही मनोहारी वर्णन किया गया है। सावन के महीने में मनभावन वर्षा हो रही है। बादल उमड़-घुमड़कर कर चारों दिशाओं में फैल जाते हैं। बिजली चमकने लगती हैं। वर्षा की झड़ी लग जाती है। वर्षा की नन्हीं-नन्हीं बूंदें गिरने लगती हैं पवन भी शीतल और सुहावनी हो जाती है। सावन का महीना मीरा को श्रीकृष्ण की भनक अर्थात् श्रीकृष्ण के आने का अहसास कराता है।

भावार्थ

जागो बंसीवारे ललना!

जागो मोरे प्यारे!

रजनी बीती, भोर भयो है, घर-घर खुले किंवारे।

गोपी दही मथत, सुनियत हैं कंगना के झनकारे।।

उठो लालजी! भोर भयो है, सुर-नर ठाढ़े द्वारे।

ग्वाल-बाल सब करत कुलाहल, जय-जय सबद उचारै।।

माखन-रोटी हाथ मँह लीनी, गउवन के रखवारे।

मीरा के प्रभु गिरधर नागर, सरण आयाँ को तारै।।

भावार्थ- मीरा बाई के इस पद में वो यशोदा माँ द्वारा कान्हा जी को सुबह जगाने के दृश्य का वर्णन कर रही हैं।

यशोदा माता कान्हा जी से कहती हैं कि ‘उठो कान्हा! रात ख़त्म हो गयी है और सभी लोगों के घरों के दरवाजे खुल गए हैं। ज़रा देखो, सभी गोपियाँ दही को मथकर तुम्हारा मनपसंद मक्खन निकाल रही हैं। हमारे दरवाज़े पर देवता और सभी मनुष्य तुम्हारे दर्शन करने के लिए इंतज़ार कर रहे हैं। तुम्हारे सभी ग्वाल-मित्र हाथ में माखन-रोटी लिए द्वार पर खड़े हैं और तुम्हारी जय-जयकार कर रहे हैं। वो सब गाय चराने जाने के लिए तुम्हारा इंतज़ार कर रहे हैं। इसलिए उठ जाओ कान्हा!

बरसे बदरिया सावन की।

सावन की, मन-भावन की।।

सावन में उमग्यो मेरो मनवा, भनक सुनी हरि आवन की।

उमड़-घुमड़ चहुँदिस से आया, दामिन दमकै झर लावन की।।

नन्हीं-नन्हीं बूँदन मेहा बरसे, शीतल पवन सुहावन की।

मीरा के प्रभु गिरधर नागर! आनंद-मंगल गावन की।।

भावार्थ- अपने दूसरे पद में मीराबाई सावन का बड़ा ही मनमोहक चित्रण कर रही हैं। पद में उन्होंने बताया है कि सावन के महीने में मनमोहक बरसात हो रही है। उमड़-घुमड़ कर बादल आसमान में चारों तरफ फैल जाते हैं, आसमान में बिजली भी कड़क रही है। आसमान से बरसात की नन्ही-नन्ही बूँदें गिर रही हैं। ठंडी हवाएँ बह रही हैं, जो मीराबाई को ऐसा महसूस करवाती हैं, मानो श्रीकृष्ण ख़ुद चलकर उनके वास आ रहे हैं।

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कविता से प्रश्न (पृष्ठ संख्या 120)

प्रश्न 1 बंसीवारे ललना’, ‘मोरे प्यारे’, ‘लाल जी’, कहते हुए यशोदा किसे जगाने का प्रयास करती हैं और वे कौन-कौन सी बातें कहती हैं?

उत्तर- यशोदा श्रीकृष्ण को जगाने का प्रयास करती हैं। वह कहती हैं कि रात बीत गई है, सुबह हो गई है। सबके घरों के दरवाजे खुल गए हैं। गोपियाँ दही मथ रही हैं, उनके कंगन की खनक सुनाई दे रही है। मेरे लाल उठ जाओ। सुबह हो गई है। देवता और मनुष्य द्वार पर खड़े हैं। ग्वाल-बाल शोर मचा रहे हैं और तुम्हारी जयकार लगा रहे हैं। अतः अब उठ जाओ।

प्रश्न 2 नीचे दी गई पंक्ति का आशय अपने शब्दों में लिखिए-

‘माखन-रोटी हाथ मँह लीनी, गउवन के रखवारे’

उत्तर- गायों की रक्षा करने वालों ने हाथ में माखन रोटी ली हुई है। वे तुम्हारी प्रतीक्षा कर रहे हैं। हे कृष्णा उठो और जाओ।

प्रश्न 3 पढ़े हुए पद के आधार पर ब्रज की भोर का वर्णन कीजिए।

उत्तर- ब्रज में भोर होते ही घरों के दरवाजे खुल जाते हैं। गोपियाँ दही मथने लगती हैं। उनके कंगन की खनक हर घर से सुनाई देने लगती है। ग्वाल-बाल गायों को चराने के लिए वन जाने की तैयारी में निकल जाते हैं।

प्रश्न 4 मीरा को सावन मनभावन क्यों लगने लगा?

उत्तर- मीरा को सावन मनभावन लगने लगा क्योंकि उन्हें श्रीकृष्ण के आने का आभास हो गया।

प्रश्न 5 पाठ के आधार पर सावन की विशेषताएँ लिखिए।

उत्तर- सावन में बादल चारों दिशाओं से उमड़-घुमड़ कर आते हैं। बिजली चमकने लगती है, वर्षा की झड़ी लग जाती है। नन्ही-नन्ही बूंदें बरसने लगती हैं और ठंडी-शीतल हवा बहने लगती है।

कविता से आगे प्रश्न (पृष्ठ संख्या 120)

प्रश्न 1 मीरा भक्तिकाल की प्रसिद्ध कवयित्री थीं। इस काल के दूसरे कवियों के नामों की सूची बनाइए तथा उनकी एक-एक रचना का नाम लिखिए।

उत्तर-

भक्ति काल के कविरचना
कबीरदासबीजक
सूरदाससूरसागर
तुलसीदासरामचरित मानस
मलिक मोहम्मद जायसीपद्मावत
रैदासभक्ति पद

प्रश्न 2 सावन वर्षा ऋतु का महीना है, वर्षा ऋतु से संबंधित दो अन्य महीनों के नाम लिखिए।

उत्तर- वर्षा के तीन महीने मुख्य हैं। आषाढ़, सावन और भादों। सावन से पहले आषाढ़ आता है और उसके बाद भादों का महीना।

अनुमान और कल्पना प्रश्न (पृष्ठ संख्या 121)

प्रश्न 1 सुबह जगने के समय आपको क्या अच्छा लगता है?

उत्तर- सुबह जगने के समय पक्षियों की चहचहाहट सुनना तथा आकाश में सूर्योदय की लालिमा देखना अच्छा लगता है।

प्रश्न 2 यदि आपको अपने छोटे भाई-बहन को जगाना पड़े, तो कैसे जगाएँगे?

उत्तर- यदि छोटे भाई बहन को जगाना पड़े, तो प्यार से उनके बालों को सहलाते हुए जगाएँगे।

प्रश्न 3 वर्षा में भींगना और खेलना आपको कैसा लगता है?

उत्तर- वर्षा में भींगना और खेलना मुझे बहुत अच्छा लगता है।

प्रश्न 4 मीरा बाई ने सुबह का चित्र खींचा है। अपनी कल्पना और अनुमान से लिखिए कि नीचे दिए गए स्थानों की सुबह कैसी होती है-

  1. गाँव, गली या मुहल्ले में
  2. रेलवे प्लेटफॉर्म पर
  3. नदी या समुद्र के किनारे
  4. पहाड़ों पर

उत्तर-

  1. गाँव में सुबह होते ही गायों के रंभाने और चिड़ियों के चहचहाने की आवाज सुनाई देती होगी। मंदिर में घंटियों के बजने की आवाज आती होगी। लोग भजन गाते हुए अपने-अपने काम पर लग जाते होंगे। किसान हल लेकर खेतों पर जाने को तैयार हो जाते होंगे।
  2. रेलवे प्लेट फॉर्म पर सुबह-सुबह गाड़ी पकड़ने के लिए तैयार यात्री आते दिखाई देते होंगे। सफाई कर्मचारी झाडू लगाना शुरू कर देते होंगे। स्टेशन पर रुकी गाड़ियों से रात की यात्रा के बाद अलसाए और थके यात्री उतरते नजर आते होंगे। कुछ लोग पत्र-पत्रिकाएँ तथा उस दिन का अखबार खरीदते दिखाई देते होंगे।
  3. नदी या समुद्र के किनारे सुबह के समय सूरज निकलने से आकाश लाल दिखाई देता होगा। नदी या समुद्र के पानी में उनकी परछाई से लाल आभा नजर आती होगी। पक्षी चहचहाते और उड़ते दिखाई देते होंगे। सुबह-सुबह सैर पर निकले लोग किनारे पर टहलते, दौड़ते या व्यायाम करते नजर आते होंगे।
  4. पहाड़ों पर सुबह सुहानी लगती होगी। उगते हुए सूरज की किरणे अत्यंत मनोरम लगती होगी। ठंडी, मंद हवा मन को सुकून देती होगी।

भाषा की बात प्रश्न (पृष्ठ संख्या 121)

प्रश्न 1 कृष्ण को ‘गउवन के रखवारे’ कहा गया है जिसका अर्थ है गौओं का पालन करनेवाला। इसके लिए एक शब्द दें।

उत्तर- गौओं का पालन करने वाले कृष्ण को गोपाल कहते हैं।

प्रश्न 2 नीचे दो पंक्तियाँ दी गई हैं। इनमें से पहली पंक्ति में रेखांकित शब्द दो बार आए है, और दूसरी पंक्ति में भी दो बार। इन्हें पुनरुक्ति (पुनः उक्ति कहते) हैं। पहली पंक्ति में रेखांकित शब्द विशेषण है और दूसरी पंक्ति में संज्ञा।

‘नन्ही-नन्ही बूंदन मेहा बरसे’

‘घर-घर खुले किंवारे’

  • इस प्रकार के दो-दो उदाहरण खोजकर वाक्य में प्रयोग कीजिए और देखिए कि विशेषण तथा संज्ञा की पुनरुक्ति के अर्थ में क्या अंतर है? जैसे-मीठी-मीठी बातें, फूल-फूल महके।

उत्तर-

विशेषण पुनरुक्ति-

छोटे-छोटे: मुझे छोटे-छोटे बच्चे बड़े प्यारे लगते हैं।

मीठे-मीठे: मीठे-मीठे फल मुझे पसंद है।

सुंदर-सुंदर: बाग में सुंदर-सुंदर फूल खिले हैं।

मधुर-मधुरः मीरा मधुर-मधुर गीत सुनाती है।

ठंडी-ठंडी: पहाड़ों पर ठंडी-ठंडी हवा चलती है।

संज्ञा पुनरुक्ति-

गली-गली: आज गली-गली में रौनक है।

घर-घर: घर-घर में तुम्हारी ही चर्चा है।

कोना-कोना: मैने घर का कोना-कोना छान मारा।

गाँव-गाँव: यह प्रथा गाँव-गाँव में विद्यमान है।

कुछ करने को प्रश्न (पृष्ठ संख्या 121)

प्रश्न 1 कृष्ण को ‘गिरधर’ क्यों कहा जाता है? इसके पीछे कौन सी कथा है? पता कीजिए और कक्षा में बताइए।

उत्तर- कृष्ण को ‘गिरिधर’ कहा जाता हैं क्योंकि उन्होंने गिरि अर्थात् पर्वत को अपनी उँगली पर उठाया था। इसके पीछे एक कथा इस प्रकार है। ब्रज के लोग पारम्परिक रूप से इन्द्र देवता की पूजा किया करते थे। श्रीकृष्ण ने ब्रज के लोगों से इंद्र की पूजा करना छोड़ गोवर्धन की पूजा करने का आह्वान किया। ब्रजवासियों ने ऐसा ही किया। इससे इंद्र कुपित हो उठे और ब्रज के लोगों को सबक सिखाने के लिए ब्रज में मूसलाधार वर्षा शुरू करा दी जिससे ब्रज की गलियाँ, नदी-नाले सभी भर गए। ब्रज के लिए यह घोर संकट था। उनके घरों में पानी भरने लगा। लोग अपने प्राणों की रक्षा हेतु श्री कृष्ण के पास गए। श्रीकृष्ण ने उनकी रक्षा के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी ऊँगली पर छतरी की तरह उठा लिया जिसके नीचे शरण लेकर ब्रजवासियों ने अपनी जान बचाई। इस घटना के बाद श्रीकृष्ण का अन्य नाम गिरिधर पड़ गया।